- अपहरण के बाद सकुशल वापस आए दोनों मासूमों की आपबीती
- लखनऊ और लखीमपुर-खीरी पुलिस टीम को सलाम
ए अहमद सौदागर
लखनऊ। गुरुवार दोपहर से लेकर शुक्रवार देर शाम तक दोनों बच्चे प्रदुम्न यादव और अर्जुन सिंह घरवालों से दस-दस लाख रुपए की फिरौती मांगने वाले सीतापुर व हाल पता आलमबाग क्षेत्र स्थित पटेल नगर निवासी 19 वर्षीय विजय शर्मा के कब्जे में थे। दोनों का एक-एक घंटा कईयों घंटे के बराबर बीता। लखीमपुर-खीरी जिले में रेलवे स्टेशन के पास सुनसान जगह पर अपहरणकर्ता विजय शर्मा के साथ रहने वाले दोनों बच्चों को इंतजार था कि कब घरवाले आएंगे उन्हें लेने। वह भीतर ही भीतर इंतजार कर ही रहे थे कि इसी दौरान वहां पर चारों ओर बूटों की आवाज धमकने लगी। यह आवाज किसी आम आदमियों की नहीं बल्कि राजधानी लखनऊ और लखीमपुर-खीरी जिले की पुलिस टीमों के बूटों की आवाजें थीं। पुलिस टीम ने घेरेबंदी कर दोनों बच्चों प्रद्युमन यादव और अर्जुन सिंह को सकुशल बरामद करते हुए फिरौती मांगकर जल्द अमीर बनने की लालच करने वाले अपहरणकर्ता विजय शर्मा को धरदबोचा।
आलमबाग क्षेत्र स्थित बीजी कॉलोनी में रहने वाले आटो चालक संजय यादव और उनकी पत्नी रेनू देवी तथा मोहल्ले में ही रहने वाले मैकेनिक संजय सिंह और उनकी पत्नी ने बेटों से बात की जो वह फूट-फूट कर रो पड़े। दोनों ने बताया कि हमें कोल्डड्रिंक पिलाने के बहाने अपने साथ लेकर गया और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी देते हुए यातनाएं देनी शुरू कर दी थी। मुंह खोलने पर थप्पड़ जड़ दिया दोनों ने अपने माता-पिता को बताया कि हम लोग चीख-पुकार करते हुए कहा कि अंकल हमें हमारे घर पहुंचा दीजिए, लेकिन बेखौफ विजय शर्मा नहीं पसीजा। कहावत नहीं बल्कि हकीकत है कि अपराधी अपराध करता है लेकिन कहीं न कहीं कुछ सुबूत जरुर छोड़ जाता है। ऐसा ही हुआ जैसे ही अपहरणकर्ता विजय शर्मा अपना मोबाइल फोन चालू किया कि पुलिस टीम ने तुरंत लोकेशन ट्रेस कर उसे धरदबोचा और दोनों मासूमों को सकुशल बरामद कर बचा लिया।
परिवार और दोनों मासूम छात्र अब भी डरा-सहमा है
अर्जुन सिंह और प्रदुम्न यादव के अलावा उनके परिवारजन जो हुआ उससे बुरा सपना समझकर भुलाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन 12-13 घंटे तक दोनों परिवारों पर जो बीती वह याद करते ही सिहर उठते हैं उन्हें बार-बार वही मैसेज याद आता है कि बच्चों को सही सलामत चाहते हो तो दस दस लाख रुपए दे दीजिए। फिलहाल पुलिस की बहादुरी को अबकी बार सलाम किया जाता है कि समय रहते बच्चों को बचा लिया।
