जेलों के असल मुद्दों से भटक गए कारागार मंत्री!

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  • समीक्षा बैठक में भ्रष्टाचार रोकने के बजाय निर्माण व आधुनिकीकरण पर दिया जोर
  • आकंठ भ्रष्टाचार में डूबी आगरा, बुलंदशहर, कांसगंज, एटा जेल पर नहीं हुई कोई चर्चा

राकेश यादव ‘निडर’

लखनऊ। कारागार विभाग की विभागीय समीक्षा बैठक में कुछ चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। बैठक में कारागार मंत्री ने भ्रष्टाचार में लिप्त जेलों पर चर्चा करने के बजाए कमीशनखोरी और घूसखोरी के मामलों पर अधिक जोर दिया। जेलों पर होने वाली घटनाओं के समय काम नहीं आने वाले आधुनिक उपकरण लगाने और ओवर क्राउडिंग को कम करने की लिए मोटा कमिशन लेकर होने वाले निर्माण कार्यों जल्दी पूरा कराए जाने पर कुछ ज्यादा ही जोर दिया गया। हकीकत यह है कि समीक्षा बैठक में कारागार मंत्री असल मुद्दों से भटक कर उन मुद्दों पर चर्चा की जिनमें कमीशनखोरी की संभावनाएं अधिक दिखी। यह समीक्षा बैठक विभागीय अधिकारियों और कर्मियों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। इसको लेकर तमाम तरह की अटकलें और कयास लगाए जा रहे हैं।

प्रदेश के कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान ने बीते शनिवार को कारागार विभाग की विभागीय समीक्षा के लिए बैठक आहूत की गई। इस बैठक में शासन और मुख्यालय के अफसरों के साथ प्रदेश भर के परिक्षेत्र डीआईजी, वरिष्ठ अधीक्षक और प्रभारी अधीक्षक शामिल हुए। सूत्रों का कहना है कि बैठक में दो दिन पहले आगरा जिला जेल में चल रहे भ्रष्टाचार का वीडियो वायरल हुआ। इसमें जेल अधिकारियों की बेतहाशा वसूली को उजागर किया गया। इसके साथ ही कासगंज जेल में नवनियुक्त प्रोन्नत अधीक्षक बंदियों के साथ सुरक्षाकर्मियों के उत्पीड़न करने और एटा जेल में सजायाफ्ता कैदियों के जेल स्थानांतरण और चहेते ठेकेदार से आपूर्ति कराने को लेकर अधीक्षक और जेलर में टकराव हुआ। नवनियुक्त अधीक्षक की तानाशाही का आलम यह था कि उन्होंने जेलर को हटवा दिया। यह अलग बात है कि हटाया गया जेलर न्याय पाने के लिए न्यायालय की शरण में चला गया। कारागार मंत्री ने भ्रष्टाचार के उजागर हुए इन मुद्दों पर चर्चा करना मुनासिब नहीं समझा। बैठक में इन मामलों पर कोई चर्चा ही नहीं की गई।

सूत्र बताते है कि बैठक में कानपुर जेल नगर से हुए बंदी की फरारी, बरेली जेल में आत्महत्या पर तो चर्चा हुई लेकिन जिला जेल आगरा में हुई आत्महत्या, मुरादाबाद और बुलंदशहर जेल अधीक्षक के भ्रष्टाचार और सुरक्षाकर्मियों के उत्पीड़न पर कोई चर्चा ही नहीं की गई। कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान ने मोटा कमिशन वसूल कर कराए जा रहे निर्माण कार्य और कमिशन खोरी के लिए सुर्खियों में रहने वाले आधुनिक उपकरणों को व्यवस्थित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जेलों में ओवर क्राउडिंग की समस्या से निजात दिलाने के लिए नई जेलों एवं बैरकों के निर्माण कार्यों में तेजी लाने और जेलों के आधुनिकीकरण के लिए ठोस कदम उठाए जाने पर जोर दिया। उन्होंने सीसीटीवी कैमरों की संख्या, स्टोरेज क्षमता एवं पावर बैकअप बढ़ाया जाए। सूत्रों की माने तो आधुनिक उपकरण की खरीद फरोख्त और निर्माण कार्यों में मंत्री समेत आला अफसरों को लाखों रुपए का मोटा कमिशन मिलता है। इस संबंध में जब कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो हर बार की तरह इस बार भी उन्होंने फोन नहीं उठाया।

आकाओं का संरक्षण प्राप्त होने से अधिकारी हुए बेलगाम

कारागार विभाग के मंत्री और आला अफसरों का मातहत अधिकारियों पर कोई नियंत्रण नहीं है। यही वजह है कि प्रदेश की जेलों में लूट मची हुई है। स्थानांतरण सत्र के दौरान मोटी रकम देकर कमाऊ जेलों पर पहुंचे अधिकारी पहले तबादले के दी गई रकम वसूलकर उसकी भरपाई करने में जुटे हुए है। यह सच बुलंदशहर, एटा, मैनपुरी, फिरोजाबाद, मुजफ्फरनगर जेल की लूट इसका जीता जागता उदाहरण है। आगरा जिला जेल अधीक्षक को परिक्षेत्र डीआईजी का संरक्षण प्राप्त होने की वजह यह जो कुछ भी करें इनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं होती है। कार्यवाही नहीं होने से अधिकारी बेलगाम हो गए हैं। सुविधा शुल्क लेकर विशेष ड्यूटी लगाने के लिए विभाग में चर्चित एआईजी प्रशासन का भी इन्हें संरक्षण प्राप्त है।

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