‘भारत-अमेरिका के बीच जल्द होगा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट’, पूर्व विदेश सचिव का बड़ा बयान

 शाश्वत तिवारी

नई दिल्ली। भारत के पूर्व विदेश सचिव और राज्यसभा सांसद हर्षवर्धन श्रृंगला ने भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ लागू होने के बीच दोनों देशों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने वर्जीनिया में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि यह स्थिति अस्थायी है और दोनों देश जल्द ही व्यापार समझौते (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) के रास्ते पर आगे बढ़ेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर लगाया गया 50% टैरिफ चिंता का कारण जरूर है, लेकिन इससे दोनों देशों के रिश्तों की बुनियाद कमजोर नहीं होगी। पूर्व भारतीय राजनयिक ने भरोसा दिलाते हुए कहा हम इसके प्रभाव को कम करने के लिए काम कर रहे हैं। भारत इसके विकल्प तैयार कर रहा है। इस क्रम में भारत ने ऑस्ट्रेलिया, यूएई और ब्रिटेन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर समझौते किए हैं और यूरोपीय संघ के साथ समझौता भी लगभग अंतिम चरण में है। इसका मतलब है कि हम अपने निर्यात को इन बाजारों तक पहुंचा सकते हैं।

उन्होंने दोनों देशों के रिश्तों में गहराई पर जोर देते हुए कहा कि भारत और अमेरिका के बीच रिश्ते केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं। अमेरिका के साथ हमारे सबसे व्यापक और बहुआयामी संबंध हैं, जो किसी भी अन्य देश से कहीं अधिक मजबूत हैं। इस रिश्ते की मजबूती हमारे साझा मूल्य और सिद्धांत हैं, जो हमें इस रिश्ते में आने वाले किसी भी उतार-चढ़ाव से उबारेंगे। उन्होंने भारत में अगले अमेरिकी राजदूत के रूप में सर्जियो गोर की नियुक्ति को सकारात्मक कदम करार दिया। श्रृंगला ने कहा कि यह दोनों देशों के रिश्तों में सकारात्मक ऊर्जा लाएगा।

वहीं दूसरी ओर विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (अमेरिका) नागराज नायडू काकनूर और रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव (अंतर्राष्ट्रीय सहयोग) विश्वेश नेगी ने 25 अगस्त को दक्षिण एवं मध्य एशियाई मामलों के ब्यूरो की अमेरिकी वरिष्ठ ब्यूरो अधिकारी बेथानी पी. मॉरिसन और हिंद-प्रशांत सुरक्षा मामलों के कार्यवाहक सहायक रक्षा सचिव जेडीडिया पी. रॉयल के साथ वर्चुअल भारत-अमेरिका 2+2 अंतर-सत्रीय वार्ता की सह-अध्यक्षता की। इस वार्ता के माध्यम से अधिकारियों ने द्विपक्षीय पहलों को आगे बढ़ाया, क्षेत्रीय सुरक्षा विकास पर चर्चा की और कई साझा रणनीतिक प्राथमिकताओं पर विचारों का आदान-प्रदान किया। उन्होंने व्यापार और निवेश, ऊर्जा सुरक्षा, जिसमें असैन्य-परमाणु सहयोग को मजबूत करना, महत्वपूर्ण खनिजों की खोज, मादक पदार्थों और आतंकवाद-रोधी सहयोग, आदि पर चर्चा की। इस दौरान दोनों पक्षों ने रक्षा सहयोग बढ़ाने की आशा व्यक्त की, जिसमें भारत-अमेरिका प्रमुख रक्षा साझेदारी के लिए एक नए दस-वर्षीय ढांचे पर हस्ताक्षर करना, साथ ही रक्षा औद्योगिक, विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग को आगे बढ़ाना, परिचालन समन्वय, क्षेत्रीय सहयोग, और सूचना-साझाकरण शामिल है।

 

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