कौशांबी जेल में बैरेक निर्माण में चल रहा बड़ा खेल!

  • बंदियों से काम कराकर ठेकेदार को किया जा रहा भुगतान
  • विभागीय अधिकारियों को भेजी गई शिकायत से हुआ खुलासा

लखनऊ। प्रदेश की जेलों में कमाई के अजब गजब कारनामे प्रकाश में आ रहे। जेल में निर्माण कार्य बंदियों से कराया जा रहा है और भुगतान बाहरी मजदूर और मिस्त्री के नाम पर किया जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि जेल प्रशासन के अधिकारियों को जब इस बात की भनक लगी तो आनन फानन में उन्होंने इस घोटाले से बचने के लिए निर्माण का कार्य जेल के बंदियों के बजाए बाहर के मजदूरों और मिस्रियों से कराकर मामले को दबाने का प्रयास किया है। उधर इस संबंध में कारागार मुख्यालय के अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है।

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मामला प्रयागराज जेल परिक्षेत्र की कौशांबी जेल का है। जेल के अंदर दो नंबर हाते में एक दो मंजिला नई बैरेक का निर्माण कराया जा रहा है। बैरेक का निर्माण ठेकेदार के मिस्त्री और मजदूरों के बजाए जेल के बंदियों से कराया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि नई बैरेक का निर्माण ठेकेदार के मिस्त्री और मजदूर से कराए जाने के बजाए जेल में बंद बंदियों से कराया जा रहा है। जेल के बंदी मिस्त्री और मजदूरों को पारिश्रमिक के तौर पर मात्र डेढ़ सौ रुपए का भुगतान किया जाता है, जबकि ठेकेदार के मिस्त्री को 650 रुपए और मजदूर को 250 रुपए के हिसाब से भुगतान किया जा रहा। मतलब जेल प्रशासन के अधिकारी बंदियों से डेढ़ सौ रुपए में काम करवाकर 650 और 250 रुपए का भुगतान कर राजस्व का मोटा चुना लगा रहे हैं। यह मामला जेल कर्मियों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

सूत्रों का कहना जेल प्रशासन के इस धांधलेबाजी की पुष्टि जेल में कार्य के लिए निकाली गई गैंग बुक (कमान) से की जा सकती है। बताया गया है कि एक जनवरी 2025 को बैरेक के निर्माण के लिए करीब एक दर्जन बंदियों की राजकमान निकली गई। सूत्रों का कहना है कि बैरेक निर्माण के लिए ठेकेदार का एक मिस्त्री इस्तियाख ही जेल के अंदर आता है। जिसकी पुष्टि जेल की गेट बुक, सीसीटीवी के साथ कमान गैंग बुक से की जा सकती है। इसका विरोध होने पर बीती 21 जनवरी को अधीक्षक ने मौके पर पहुंचकर काम बंद करा दिया। इसके बाद 24 जनवरी से कुछ दिनों तक निर्माण कार्य के लिए बाहर से मजदूर और मिस्त्री बुलाए गए। इसकी भी पुष्टि गेट बुक से की जा सकती है। कुछ दिन बाद ही स्थिति फिर से जस की तस हो गई है। निर्माण का कार्य जेल के बंदियों से ही कराया जा रहा है। इस संबंध में प्रमुख सचिव से लेकर आईजी जेल तक से शिकायत की गई लेकिन स्थित आज भी जस की तस बनी हुई है। उधर इस संबंध में जब मुख्यालय के निर्माण अनुभाग और जेल अधीक्षक से बात करने का प्रयास किया गया तो किसी भी अधिकारी का फोन नहीं उठा।

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खुद तो खुद रिश्तेदार को भी कमाई करा रहे अफसर!

कौशांबी जेल में अधिकारी खुद तो खुद अपने रिश्तेदारों को भी कमाई कराने में जुटे हुए हैं। आईजी जेल को भेजी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जेल के मुखिया ने अपने एक रिश्तेदार को कानपुर से बुलाकर मुलाकात का पर्ची राइटर नामित किया है। जोकि पूरी तरह से नियम विरुद्ध है। यह मुलाकात पर्ची राइटर जेल में लंबे समय से जमे चर्चित वरिष्ठ सहायक बाबू के आवास में रहता है। शिकायत में कहा गया है कि जेल के मुखिया इस वरिष्ठ सहायक पर इस कदर मेहरबान हैं कि डिप्टी जेलर के अवकाश पर रहने पर इसको गल्ला गोदाम, एम एस के, मुलाकात ही नहीं हवालात तक का प्रभार सौंप दिया जाता हैं।

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