No Confusion: 31अक्टूबर की रात में मनेगी दीपावली, दीपावली पर बन रहे विशेष योग

  • तुला राशि मे सूर्य- चंद्र की युति बनाती है अमावस
  • वृश्चिक राशि मे बन रही बुध-शुक्र की युति-लक्ष्मी नारायण योग
  • वृहस्पति का बन रहा बुध-शुक्र पर सम सप्तक योग
  • धनतेरस को स्वर्ण कलश मे लेकर अमृत लेकर प्रकटे धन्वंतरि

बलराम कुमार मणि त्रिपाठी

संवत् 2081, कार्तिक कृष्ण अमावस्या गुरुवार 31अक्टूबर को सायं 3.12 से एक अक्टूबर को सायं 5.13 तक अमावस्या है‌। इस तरह वर्ष 2024 ई मे 31 अक्टूबर की रात भर अमावस्या रहेगा। इसलिए दीपावली 31अक्टूबर को मनाया जाना सुनिश्चित है‌। हर त्यौहार कुछ कथानकों से जुड़ा है। धन्वंतरि का अमृत कलश लेकर समुद्र से निकलना धनतेरस को महालक्ष्मी का समुद्र मंथन से प्रकट होना दीपावली को और चंद्रमा का सोलह कलाओ के साथ समुद्र मंथन से निकलना आश्विन पूर्णिमा को।… हनुमज्जयंती कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को भी मनाई जाती है और चैत पूर्णिमा को भी‌।

इस वर्ष दीपावली की रात में सूर्य और चंद्रमा तुला राशि में तो बुध शुक्र वृश्चिक राशि में होगा। ज्योतिषीय दृष्टि से बुध शुक्र का योग लक्ष्मी गणेश की युति जिसे लक्ष्मी नारायण योग भी कहते हैं‌। तुला- तराजू (व्यापारियों का तौलने वाली मशीन)  सूर्य चंद्र दोनों मित्र है‌। तुला का दूसरा स्थान वृश्चिक- धन का स्थान है, जहां शुक्र की स्वामिनी – लक्ष्मी और बुध के स्वामी गणेश है का पूजन होगा।

यह है कर्म से महालक्ष्मी का आवाहन….स्थिर लग्न वृष, सिंह, वृश्चिक, कुंभ में लक्ष्मी गणेश का पूजन होता है‌। वृष लग्न में करने पर समसप्तक दृष्टि से वृहस्पति की पूर्ण दृष्टि बुध-शुक्र पर होगी। यह भी अत्यंत शुभ है‌, वृहस्पति को नारायण की संज्ञा दी गई‌। मीन का -स्वामी वृहस्पति है, किंतु इस राशि में शुक्र उच्च का माना जाता है। सिंह लग्न में पूजा करने पर तुला तीसरे पराक्रम स्थान और बुध शुक्र चतुर्थ स्थान मे( सुख भाव) में होगे। यह भी अत्यंत शुभ है। वृष लग्न सायंकाल 6-27 से 8.23 तक और सिंह लग्न रात्रि 12.55से 3.09 तक होगा।

दिवाली पर गुरुवार का संयोग माता लक्ष्मी की प्रसन्नता के लिए चार चांद लगाने वाला होगा। व्यापारी वर्ग व्यापार की उन्नति व सिद्धि के लिए महालक्ष्मी का पूजन-वंदन करता है। तिथि विशेष पर तांत्रिक लोग तंत्र-मंत्र की सिद्धि करते हैं। बंगाली समाज के लोग निशीथ काल में महाकाली पूजन करते हैं। कार्तिक अमावस्या अपने आप में स्वयं सिद्ध मुहूर्त है। इसलिए इस दिन किसी कार्य को किया जाए तो वर्ष भर उसमें सफलता मिलती है।

एक नवम्बर को पूजन

जो लोग दिन में पूजन कराते हैं, उनके लिए वृश्चिक लग्न एक नवंबर सुबह 7.37-9.54 और कुंभ लग्न सायं  3.22-4.50 तक रहेगा‌‌। अमावस्या सायंकाल 5.13 बजे तक है।

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