मां के लिए एक दिन बस! अरे वो हर क्षण मेरी आत्मा में बसती है…

आत्मा को झंझोड़ देने के लिए काफी है साल में एक दिन ‘मदर्स डे’

मंजु शुक्ला

मां यानी सृष्टि। मां यानी अस्तित्व। मां यानी व्यक्तित्व। मां के लिए कोई दो शब्द नहीं लिख सकता। एक वही है जो बच्चे को नौ माह तक कोख में रखती है। तीन साल तक अपने गोद में और 16 साल तक अपनी आंखों के सामने रखती है। उसके बाद जीवन भर मां बच्चे को अपने हृदय में रखती है। उस मां के लिए एक दिन…। आखिर वो कौन सा दिन है जो बिना मां के गुजर सकता है। यदि गुजर रहा हैं तो समझो आप बिना आत्मा के जिंदा हो…, केवल शरीर मात्र। माँ शक्ति की प्रथम अभिव्यक्ति है। माँ के नाम के साथ शक्ति, दिव्य ऊर्जा और सर्वशक्तिमानता का विचार आता है। बच्चा मानता है कि उसकी माँ सर्वशक्तिमान, कुछ भी करने में सक्षम। माँ हमारे भीतर सोई हुई गुप्त शक्ति है। उसकी आराधना के बिना हम स्वयं को कभी नहीं जान सकते। ब्रह्मांड में शक्ति की प्रत्येक अभिव्यक्ति माँ है। वह जीवन है। वह बुद्धि है। वह प्रेम है। … माँ का एक टुकड़ा, एक बूँद कृष्ण था। एक बुद्ध था। एक ईसा था मसीह। पैगम्बर मोहम्मद साहब भी मां का अंश ही था। यदि आप प्रेम और ज्ञान चाहते हैं तो उसकी पूजा करें। मेरी इसी अभिव्यक्ति में शामिल हुए दो और लेखक… उन्होंने भी मां को कुछ शब्दों में पिरोया। उसे वैसे ही गूंथा, जैसे अबोध आंचल को गूंथ लेता है। पढ़िए और अच्छा लगे तो दो शब्द जरूर लिखिएगा… चाहे वो आपका सोशल मीडिया प्लेटफार्म हो… कमेंट हो या फिर कागज का टुकड़ा…।

मां पर दो शब्द

हरिन्द्र नाथ सिंह, लेखक

मां ये सिर्फ शब्द नही है, जीवन की ये वो भावना होती है,जिसमें स्नेह, धैर्य, विश्वास, कितना सब कुछ समाया रहता है। मां सिर्फ हमारा शरीर ही नही गढ़ती, बल्कि हमारा मन, हमारा व्यक्तित्व, हमारा आत्मविश्वास गढ़ती है और अपनी सन्तान के लिए बहुत कुछ करते हुए वो खुद को खपा देती है। खुद को भुला देती है। मां की तपस्या, उसकी सन्तान को सही इन्सान बनाती है। मां की ममता उसकी सन्तान को मानवीय संवेदना से भर देती है। मां एक व्यक्तित्व नही, मां एक स्वरूप है। अभाव की हर एक कथा से ऊपर, एक मां की गौरव गाथा होती है। संघर्ष के हर पल से बहुत ऊपर, एक मां की इच्छा शक्ति होती है। आज की भटक रही युवा पीढी मां की ममता का मोल कम समझ रही है, लेकिन जिसे जब समझ आ जाता है तो वह बदल जाता है, बहुत बदल जाता है। यूं कहें वह सफल हो जाता है। सफलतम बन जाता है।

मातृ देवो भवः

पनपा ‘गोरखपुरी’

माँ सृजन करती है इसलिए वह ब्रह्माणी है। माँ पालन करती है इसलिए वह वैष्णवी है और अपने बच्चों में संस्कारों को सृजित कर दुर्गुणों का नाश करती है इसलिए माँ ही रुद्राणी है। माँ का प्यार दुनियाँ का सर्वश्रेष्ठ प्यार है, माँ का त्याग दुनियाँ का सर्वश्रेष्ठ त्याग है। माँ का बलिदान दुनियाँ का सर्वश्रेष्ठ बलिदान है, माँ की सीख दुनियाँ की सर्वश्रेष्ठ सीख है और माँ की गोद दुनियाँ का सबसे सुरक्षित और शीतल स्थान है। कभी मन्दिर न जा सको तो कोई बात नहीं बस माँ के चरणों में बैठ जाया करना और कभी माथे पर चंदन ना लगा सको तो कोई बात नहीं बस माँ के चरणों की पवित्र रज माथे पर लगा लेना इससे बढ़कर कोई दूसरा सौभाग्य नहीं हो सकता है। सारे तीर्थ करने के उपरान्त भी यदि सबसे बड़े तीर्थ माँ-बाप की सेवा से वंचित रह गये तो फिर समझ लेना कि सब व्यर्थ ही गया है। करुणा, प्रेम और वात्सल्य की प्रतिमूर्ति सर्वदेव और सर्ववेद वंदिता माँ के श्री चरणों को समर्पित मातृ-दिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ।

मां पर क्या लिखूं…

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मदर्स डे पर अपने भावों की अभिव्यक्ति करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में वीडियो जारी करते हुए लिखा- मां के लिए क्या लिखूं, मां ने तो सबको लिखा है। उन्होंने मातृ दिवस के शुभ अवसर पर अपने संदेश में कहा कि प्रदेश की सभी महतारियों को सादर प्रणाम। जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।

 

Analysis homeslider

लखनऊ की एक अलग पहचान कायस्थों की होली

लखनऊ की होली, बाहर से देखिए तो लगेगा बस रंग, गुलाल, हँसी-ठिठोली तक नजर आती है। मगर भीतर उतरकर देखिए तो यह शहर फागुन में सिर्फ़ रंग नहीं बदलता, मिज़ाज भी बदलता है। यहाँ होली एक दिन का नहीं, कई दिनों का सिलसिला है। होलाष्टक लगते ही गली-कूचों में जैसे कोई अदृश्य ढोल बजने लगता […]

Read More
Analysis homeslider International

मिडिल ईस्ट में जंगः इजरायल का दावा, मर गया खामनेई

ट्रम्प ने कहा- ईरानियों के पास बड़ा मौका, बदल लीजिए अपना नेता ईरान और इज़राइल टकराव तेज, खामेनेई के बेटी-दामाद के मौत की हुई पुष्टि नया लुक डेस्क (आशीष द्विवेदी/श्वेता शर्मा/अंकिता यादव) तेहरान/ तेल अवीव/ वॉशिंगटन। इजरायल और अमेरिकी संयुक्त सैन्य कार्रवाई के चलते दुनिया में महायुद्ध जैसे हालात बनते नजर आ रहे हैं। केवल […]

Read More
Analysis homeslider International

इजरायल-ईरान युद्ध… इस आग की इंतहा क्या है…?

किसे पुकारेंगे ये मासूम… एक धमाका और 40 जिंदगी के साथ-साथ सैकड़ों सपनें तबाह… पांच दर्जन के आसपास घायलों में से कौन बचेगा और कौन नहीं… किससे पूछें सवाल…? आज इजरायल ने ईरान पर बमबारी कर मासूम 40 बच्चियों के खून से अपने हाथ को रंग लिया। वैसे सभ्यता के आरम्भ से ही मनुष्य की […]

Read More