पाकिस्तान-चंद्रयान-हिंदुस्तान! टक्कर आस्था और विज्ञान में!!

के. विक्रम राव 

इस्लामी पाकिस्तान टीवी ने चंद्रयान पर गत दिनों कई इंटरव्यू प्रसारित किये। इनमें आमजन के संग आलिम और फाजिल (ज्ञानी) भी शामिल रहे। कुछ ने भारत से सबूत मांगा कि चांद पर तिरंगा कैसे लहराया ? इन लोगों का कयास था कि अमेरिकी NASA के पुराने चित्र को ISRO ने चला दिया। अतः दावा बोगस है। अंतरिक्ष कार्यक्रम में ISRO एक और आयाम भारत जोड़ने वाला है। अगले शनिवार (2 सितंबर 2023) की सुबह सूरज की ओर L-1 रवियान रवाना होगा। जब चंद्रयान के उतरने के स्थल को नरेंद्र मोदी ने “शिवशक्ति केंद्र” नाम दिया, चंद हिंदुस्तानियों ने भी ऐतराज किया। अर्थात सेक्युलर भारत ने भगवान भोलेनाथ को विज्ञान में क्यों डाल दिया ? कुछ राहुल गांधी-टाइप संदिग्धता थी। तब पुलवामा नरसंहार (14 फरवरी 2019) में केंद्रीय पुलिस बल के 40 सिपाहियों को पाकिस्तानी आतंकी गिरोह जैशे-मोहम्मद ने भून दिया था। उस वक्त कांग्रेसी उसे लोकसभा का चुनावी स्टंट बता रहे थे। वे झूठे साबित हुये। विश्वनाथ की नगरी प्रधानमंत्री का चुनाव क्षेत्र भी है। क्या इसलिए ? इस पर ISRO के अध्यक्ष श्रीधर पणिक्कर सोमनाथ ने सटीक जवाब दिया : “चंद्रयान-3 की लैंडिंग साइट का नाम शिव-शक्ति रखने का देश को अधिकार है। कई दूसरे देशों ने चंद्रमा पर अपना नाम रखा है। यह हमेशा उस देश का विशेष अधिकार रहा है। एक परंपरा रही है।

पाकिस्तानी एंकर ने बताया : पवित्र कुरान में लिखा है : “और उसने सूर्य और चंद्रमा को तुम्हारे अधीन कर दिया, जो लगातार चलते रहते हैं।” सूरह 14, आयत 33। पृथ्वी की स्थिर प्रकृति पर पवित्र कुरान कहता है : “निस्संदेह, अल्लाह आकाश और पृथ्वी को संभाले रखता है, ऐसा न हो कि वे भटक जाएँ।” सूरह 35, आयत 41। मिलती-जुलती मान्यता तब रोमन चर्च की भी रही। मगर इतालवी नक्षत्र शास्त्री पहली बार गैलीलियो गैलिली ने स्पष्ट निर्धारित किया था कि “ब्रह्मांड का केंद्र सूर्य है और पृथ्वी तथा अन्य ग्रह उसकी परिक्रमा कर रहे हैं।” उन दिनों पृथ्वी को स्थिर और सूर्य को उसकी परिक्रमा करते हुए बताया जाता था। गैलीलियो के शोध का विरोध हुआ। उनपर नास्तिकता और पाखंड के आरोप भी लगाए। गैलीलियो के वैज्ञानिक खोज को रोमन चर्च ने धार्मिक किताबों का अपमान माना। उन्हें सजा दी गई। आज सभी यह जानते हैं कि पृथ्वी गोल है। गैलीलियो की पुस्तक “द डायलॉग ऑफ टू द प्रिंसिपल सिस्टम ऑफ द वर्ल्ड” में उनका दावा था कि पृथ्वी सूर्य का चक्कर लगाती है। उसी ने यह बात सर्वप्रथम बताई थी। हालांकि विज्ञान से जुड़े सत्य और सटीक पहलुओं की खोज करने वाले गैलीलियो को कई उत्पीड़न झेलने पड़े। सिद्धांत ‘पृथ्वी गतिमान है’ के कारण उन्हें सजा मिली। बाइबल में जो बात लिख दी गई, वही अंतिम और अटल सत्य हो गई।

इस संदर्भ में इस्लामी आस्था के प्रसंग से दो जुड़े हुये प्रकरण देखें। मशहूर इस्लामी विद्या केंद्र दारुल उलूम के पूर्व कुलाधिपति मौलाना गुलाम मोहम्मद वस्तानवी को कुछ वर्ष पूर्व पद से हटा दिया गया था। कारण था कि उन्होंने एक शैक्षिक समारोह में विजेता छात्रों को गणेश की प्रतिमा प्रदान की थी। उन पर मूर्तिपूजा का गुनाह (जनवरी 2011) मढ़ा गया था। इसी भांति भारतीय गणतंत्र के सेक्युलर संविधान को धता बताते केरल के मुस्लिम लीगी मंत्री अहमद देवरकोवली ने पानी के नवनिर्मित जहाज के जलावतरण पर नारियल फोड़ने से मना कर दिया था, क्योंकि वह भी हिंदू संस्कार था अहमद तब केरल सरकार के बंदरगाह और नाविक मंत्री थे। यूं चंद्रयान के कारण वहां की मुस्लिम लीगी सरकार की पाकिस्तानी मीडिया में नाकारापन के कारण तीव्र भर्त्सन भी हुई। पाकिस्तानी महिला एंकर ने लाइव शो के दौरान कहा : “भारत जहां चांद पर पहुंच चुका है, वहीं हम अभी भी बीच में ही फंसे हुए हैं। अगर हमें भारत का मुकाबला करना है तो इसे अन्तरिक्ष में करनी चाहिए, जिसमें भारत आगे जा रहा है।” पाकिस्तानी न्यूज शो में पुरुष एंकर ने कहा : “आप अंदाजा लगा सकते है कि भारत चांद पर पहुंच गया है और हम अभी तक अपने ही बच्चों को चांद-चांद कह रहे हैं।

भारत के चंद्रयान मिशन पर सबसे ज़्यादा चर्चा पाकिस्तान के पूर्व मंत्री फ़वाद चौधरी के ट्वीट से हुई थी। वे इमरान ख़ान की सरकार में सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्री थे। चौधरी ने चंद्रयान-3 की लैंडिंग को पाकिस्तान में लाइव दिखाने की बात कही। उन्होंने इसे मानव जाति के लिए ऐतिहासिक पल भी बताया। लेकिन साल 2019 में जब भारत ने चंद्रयान-2 मिशन चांद पर भेजा था, तब चौधरी ने इसका मज़ाक बनाया था। तब उन्होंने कहा था : “भारत को चंद्रयान जैसे फालतू मिशन पर पैसे बर्बाद करने की बजाय अपनी ग़रीबी पर ध्यान देना चाहिए।”
पाकिस्तान की न्यूज़ वेबसाइट “फ्राइडे टाइम्स” ने चंद्रयान-3 की कामयाबी से पहले विज्ञान के प्रोफ़ेसर डॉ सलमान हामीद का एक लेख छापा है। इसमें उन्होंने लिखा : “1960 के दशक में पाकिस्तान का अपना अंतरिक्ष कार्यक्रम था। लेकिन चीज़ें ख़राब होती गईं। भारत कहाँ से कहाँ चला गया ?” सलमान ने लिखा है : ”मुझे याद है कि 2019 में भारत का चंद्रयान-2 नाकाम रहा था तो पाकिस्तान के तत्कालीन विज्ञान मंत्री चौधरी ने मज़ाक उड़ाया था। उन्हें पता होना चाहिए कि विज्ञान में नाकामी अहम हिस्सा है। इसी से कामयाबी की राह खुलती है। पाकिस्तान में मून मिशन को लेकर कोई ज़िक्र तक नहीं होता है। पाकिस्तान के “द डॉन” ने चैंपियन-3 की सफल सॉफ्ट लैंडिंग को लेकर हेडिंग दी है : “चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास अंतरिक्ष यान उतारने वाला भारत पहला देश बन गया है। दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश (भारत) और उसके कम बजट वाले अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए चंद्रयान एक ऐतिहासिक जीत है। इसकी सफलतापूर्वक लैंडिंग ऐसे समय में हुई है जब उसी क्षेत्र में कुछ दिन पहले रूसी मून मिशन लूना-25 क्रैश हो गया था। भारत के चंद्रायन-3 की भी यह सफल सॉफ्ट लैंडिंग चंद्रयान-2 की विफलता के चार साल बाद हुई है।” कितने ईमानदार हैं पाकिस्तानी सियासी नेता ! आभार !!

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