पूर्व सांसद, विधायक, विभागीय मंत्री की रखी रह गई सिफारिश!

  • कमाई के चक्कर में विभाग के आला अफसरों का तबादलो में बड़ा खेल
  • तबादला बदलवाने के लिए अफसरों के चक्कर काट कर जेलकर्मी

आरके यादव


लखनऊ। कारागार विभाग के तबादलों में कमाई के चक्कर में शासन और जेल मुख्यालय के अफसरों ने विभागीय मंत्री की तो छोडिय़े विधायक, मंत्री और पूर्व सांसद तक की सिफारिशों को नहीं सुना गई। यह बात सुनने में भले ही अटपटी लग रही हो लेकिन विभागीय मंत्री और पूर्व सांसद के सिफारिशी पत्र इस सच की पुष्टिï करते नजर आ रहे है। हकीकत यह है कि विभागीय मंत्री की सिफारिश लगाने वाले कई अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों को मनमाफिक जेलों पर स्थानांतरण कराने के लिए शासन व मुख्यालय के चक्कर लगाने का विवश होना पड़ रहा है।

मिली जानकारी के मुताबिक शासन की स्थानांतरण नीति आने के बाद से कारागार विभाग के अधिकारी और सुरक्षाकर्मी कमाऊ जेलों पर तैनाती कराए जाने की फिराख में जुट गए थे। पश्चिम की जेलों पर तैनात कई अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों ने कारागार विभाग के पूर्व मंत्री और वर्तमान समय में सरकार में गन्ना मंत्रालय का प्रभार संभाल रहे मंत्री से फोन और सिफारिशी पत्र लिखाकर पश्चिम की कमाऊ जेलों पर तैनात कराए जाने का आग्रह किया। यह नहीं एक पूर्व सांसद ने एक सिफारिशी पत्र लिखकर एक कर्मी का तबादला जिला कारागार लखनऊ से केंद्रीय कारागार नैनी कराए जाने का आग्रह किया था। इसी प्रकार विभाग के राज्यमंत्री ने भी दो अधिकारी और एक सुरक्षाकर्मी का तबादला किए जाने का आग्रह किया था।

इसी प्रकार कई विधायकों, पूर्व विधायकों, पूर्व मंत्रियों और पूर्व सांसदों ने कई अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों की तैनाती को लेकर महानिदेशक/ महानिरीक्षक कारागार को सिफारिशी पत्र भेजकर तबादले किए जाने का आग्रह किया गया। सूत्रों का कहना है कि कमाई के चक्कर में शासन और जेल मुख्यालय में बैठे अफसरों ने इन सिफारिशी पत्रों को नजरअंदाज करके अपने मनमाफिक तरीके से तबादले कर दिए। विभाग के अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों की तबादला सूची जारी होने के बाद से अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों में हडक़ंप मचा हुआ है। सिफारिश करवाने वाले अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों का आरोप है कि विभाग के अफसरों ने कमाई के चक्कर में मनमाने तरीके से तबादले कर दिए। तबादलों में पूर्व विधायक, पूर्व सांसद की बात तो दूर की बात अधिकारियों ने विभागीय मंत्री तक की नहीं सुनी गई। यही वजह है सिफारिश लगवाने वाले अधिकारी और कर्मचारी अब स्थानांतरण बदलवाने के लिए जेल मुख्यालय व शासन के चक्कर काट रहे है। उधर इस संबंध में जब डीआईजी जेल मुख्यालय एके सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि यह आरोप निराधार है।

तबादले बदलने का सिलसिला बदस्तूर जारी

स्थानांतरण सत्र की अंतिम तारीख से एक सप्ताह पूर्व किए गए कारागार विभाग के अधिकरियों और कर्मचारियों के तबादले बदलने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। शासन ने पहले केंद्रीय कारागार आगरा से जेल मुख्यालय स्थानांतरित किए गए वरिष्ठï अधीक्षक का तबादला आदेश बदला। इन्हें जेल मुख्यालय के स्थान पर केंद्रीय कारागार वाराणसी में तेनात किया गया। इसके अगले ही दिन जिला जेल बरेली स्थानांतरित किए गए वरिष्ठï अधीक्षक को जिला कारागार झांसी भेज दिया गया। स्थानांतरण सत्र के अंतिम दिन 30 जून को झांसी जेल से केंद्रीय कारागार फतेहगढ़ स्थानांतरित किए गए वार्डर सोनू शर्मा के तबादलें को बदलकर केंद्रीय कारागार इटावा कर दिया गया। यह तो बानगी है। इस प्रकार कई अन्य वार्डर के तबादले को भी बदलने का क्रम लगातार जारी है।

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