कविता
Litreture
Exclusive Poem: महाशक्ति का आह्वान
•बलराम कुमार मणि त्रिपाठी एक बार फिर आओ मां रणचंडी! बढ़े पाप को खा जाओ रणचंडी।। राक्षस कुल बढ़ते जाते हैं, पापी सभी कहर ढाते हैं। सत्य बोलने वाले डरते, ढोंगी अब बढ़ते जाते हैं।। भटक रहे है लोग, इन्हे सन्मार्ग दिखाओ!! महाश्मशान कालिके आओ! अट्टहास कर रोर मचाओ। जो नृशंश […]
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साहित्य में मनभावन सावनः … जब मदमस्त हो खुद गाने लगती है प्रकृति
डॉ. सौरभ मालवीय वर्षा ऋतु कवियों की प्रिय ऋतु मानी जाती है। इस ऋतु में सावन मास का महत्व सर्वाधिक है। ज्येष्ठ एवं आषाढ़ की भयंकर ग्रीष्म ऋतु के पश्चात सावन का आगमन होता है। सावन के आते ही नीले आकाश पर काली घटाएं छा जाती हैं। जब वर्षा की बूंदें धरती पर पड़ती हैं, […]
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