
New Delhi: दशहरा यानी विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन देशभर में रावण दहन किया जाता है और लोग एक-दूसरे को विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हैं। इसके साथ ही कई क्षेत्रों में शमी के पत्तों को सोने के समान मानकर बांटने की परंपरा भी निभाई जाती है।
![]()
लोग इन पत्तों को अपने परिवार, मित्रों और परिचितों को भेंट करते हैं तथा बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दशहरे पर शमी के पत्ते बांटने की परंपरा के पीछे रामायण और महाभारत से जुड़ी मान्यताएं भी प्रचलित हैं? धार्मिक मान्यताओं में शमी के वृक्ष को शुभता, साहस, समृद्धि और विजय का प्रतीक माना गया है। विजयादशमी पर इसकी पूजा करने और पत्ते बांटने की परंपरा इसी आस्था से जुड़ी हुई है।
ये भी पढें
भगवान श्रीराम से जुड़ी है शमी की मान्यता
पौराणिक परंपराओं में शमी के वृक्ष का संबंध भगवान श्रीराम की विजय से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि रावण के साथ युद्ध से पहले शमी के वृक्ष की पूजा की गई थी। भगवान श्रीराम ने युद्ध में विजय प्राप्त कर अधर्म का अंत किया और माता सीता को मुक्त कराया। एक अन्य प्रचलित लोकमान्यता के अनुसार, रावण पर विजय के बाद अयोध्या लौटने पर भगवान श्रीराम ने धन-संपत्ति बांटी थी। इसी कथा से जोड़कर कुछ क्षेत्रों में दशहरे पर शमी के पत्तों को सोने का प्रतीक मानकर बांटने की परंपरा निभाई जाती है। हालांकि, इस परंपरा से जुड़ी कथाओं के अलग-अलग क्षेत्रीय रूप भी मिलते हैं।
ये भी पढें
जलभराव के बीच भी नहीं रुका रामलीला का मंचन, भक्तों के उत्साह ने जीता दिल
महाभारत में भी मिलता है शमी के वृक्ष का प्रसंग
शमी के वृक्ष का संबंध महाभारत काल की एक प्रसिद्ध कथा से भी बताया जाता है। मान्यता के अनुसार, पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान अपने अस्त्र-शस्त्र एक शमी के वृक्ष पर छिपाकर रखे थे, ताकि उनकी पहचान उजागर न हो।
अज्ञातवास की अवधि पूरी होने के बाद अर्जुन ने शमी के वृक्ष से अपने अस्त्र-शस्त्र वापस प्राप्त किए। इसके बाद पांडवों ने अपनी शक्ति और पराक्रम के बल पर आगे की चुनौतियों का सामना किया। इस कथा के कारण शमी के वृक्ष को शौर्य, शक्ति और विजय के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। इसी मान्यता के आधार पर विजयादशमी के अवसर पर शमी के वृक्ष की पूजा करना शुभ माना जाता है। हालांकि, धार्मिक कथाओं और परंपराओं की व्याख्या अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न हो सकती है।
ये भी पढें
शमी के पत्तों को सोना मानकर बांटने का क्या है महत्व?
दशहरे पर शमी के पत्ते बांटना केवल एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि शुभकामनाएं और आपसी प्रेम व्यक्त करने का माध्यम भी माना जाता है। लोग इन पत्तों को एक-दूसरे को देकर सुख, समृद्धि, सफलता और खुशहाली की कामना करते हैं। कई जगहों पर छोटे-बड़े सभी लोग यह परंपरा निभाते हैं और बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लेते हैं।
नया लुक के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
Google Play Store: https://play.google.com/store/apps/details?id=com.app.nayalooknews
आजम खान से पूछताछ करने रामपुर जेल पहुंची ED की टीम
जलभराव के बीच भी नहीं रुका रामलीला का मंचन, भक्तों के उत्साह ने जीता दिल
नौतनवां विधायक ऋषि त्रिपाठी के आवास पर धूमधाम से संपन्न हुआ फलाहार कार्यक्रम
13 अक्टूबर LPG Price: घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडर के नए रेट जारी, देखें दिल्ली से पटना तक के दाम


One thought on “दशहरे पर शमी के पत्ते बांटने की परंपरा क्यों है खास? जानें पौराणिक महत्व”
Comments are closed.