
New Delhi: त्योहारों का सीजन शुरू होते ही सोने की खरीदारी को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई है। नवरात्रि, करवाचौथ, धनतेरस और दिवाली जैसे मौकों पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है। ऐसे में निवेशकों और आम ग्राहकों की नजर इस समय सोने की कीमतों पर बनी हुई है। फिलहाल देश में 24 कैरेट सोने का भाव करीब 1.48 लाख से 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच चल रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या धनतेरस और दिवाली से पहले सोने की कीमतों में और गिरावट आ सकती है? ऑल इंडिया जेम एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल (GJC) के चेयरमैन राजेश रोकड़े के मुताबिक, अगर सोने की कीमत में गिरावट आती है तो इसमें करीब 10 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम तक की कमी देखने को मिल सकती है।
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1.40 लाख रुपये से नीचे जाने की संभावना कम
राजेश रोकड़े के मुताबिक, सोने की कीमत फिलहाल एक दायरे में कारोबार कर रही है। उनका अनुमान है कि यदि कीमतों में गिरावट आती भी है तो सोना 1.40 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर से नीचे जाने की संभावना कम है।
इसका मतलब यह हुआ कि मौजूदा स्तर से करीब 10 हजार रुपये तक की संभावित गिरावट के बाद भी सोने का भाव लगभग 1.40 लाख रुपये के आसपास रह सकता है। हालांकि, यह केवल बाजार का अनुमान है और वास्तविक कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर और अन्य आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर बदल सकती है।
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फिर कब पहुंचेगा दो लाख के पार?
सोने की कीमतों को लेकर लंबी अवधि का अनुमान भी काफी दिलचस्प है। राजेश रोकड़े का मानना है कि सोना भविष्य में दो लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार कर सकता है। हालांकि, यह स्तर कब आएगा, इसकी सटीक समयसीमा बताना मुश्किल है।
उनके मुताबिक यह संभव है कि सोना दिवाली तक, दिसंबर तक या फिर मार्च 2027 तक दो लाख रुपये के स्तर पर पहुंच जाए। पिछले कुछ समय में सोने की कीमतों में जिस तरह तेजी आई है, उससे निवेशकों की नजर इस संभावित लक्ष्य पर बनी हुई है।
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क्यों आई सोने की कीमतों में गिरावट?
सोने की कीमतों में हालिया दबाव के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय कारण बताए जा रहे हैं। इनमें अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी प्रमुख है। यील्ड बढ़ने पर निवेशकों के लिए ब्याज देने वाले बॉन्ड अधिक आकर्षक हो जाते हैं, जबकि सोने से नियमित ब्याज नहीं मिलता। दूसरा बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर की मजबूती है। डॉलर मजबूत होने पर दूसरी मुद्राओं में सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे मांग पर असर पड़ सकता है।
इसके अलावा, लगातार तेजी के बाद निवेशकों की ओर से मुनाफावसूली और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों को लेकर रुख ने भी सोने की कीमतों पर दबाव बनाया। सितंबर में इन कारणों से सोने की कीमतों में करीब छह फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई थी।
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