
हिंदू धर्म में जितिया या जीवित्पुत्रिका व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से यह व्रत करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत के दौरान भगवान जीमूतवाहन की कथा के साथ चील्हो और सियारिन की कहानी सुनना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस कथा में त्याग, संकल्प और व्रत के नियमों की महत्ता का वर्णन मिलता है।
जीमूतवाहन ने बचाई एक मां की संतान
पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय ऋषियों ने सूतजी से पूछा कि कलियुग में ऐसा कौन-सा व्रत है, जिसे करने से संतान को दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त हो सकता है। तब सूतजी ने उन्हें जीमूतवाहन से जुड़ी कथा सुनाई। कहा जाता है कि जीमूतवाहन नाम के एक धर्मपरायण राजा एक बार अपने ससुराल में रह रहे थे। इसी दौरान उन्हें एक महिला के विलाप की आवाज सुनाई दी। राजा ने जब कारण पूछा तो महिला ने बताया कि गरुड़ प्रतिदिन एक नागवंशी युवक को अपना आहार बनाते हैं और आज उसके पुत्र की बारी है।
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मां का दुख देखकर जीमूतवाहन ने स्वयं को उसके पुत्र के स्थान पर गरुड़ के सामने प्रस्तुत कर दिया। गरुड़ ने जब राजा के शरीर पर प्रहार किया तो भी जीमूतवाहन विचलित नहीं हुए। उनके त्याग और साहस से प्रभावित होकर गरुड़ ने उनसे वरदान मांगने को कहा।

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चील्हो और सियारिन की कथा
जितिया व्रत से जुड़ी दूसरी लोकप्रिय कथा चील्हो और सियारिन की है। मान्यता है कि दोनों ने व्रत की कथा सुनी और व्रत रखने का संकल्प लिया। चील्हो ने पूरे नियम और संयम के साथ व्रत पूरा किया, जबकि सियारिन व्रत के दौरान अपनी भूख पर नियंत्रण नहीं रख सकी और नियम भंग हो गया। समय बीतने पर दोनों का पुनर्जन्म हुआ। मान्यता के अनुसार, चील्हो के रूप में जन्मी स्त्री के कई पुत्र हुए और वे सभी स्वस्थ एवं दीर्घायु रहे। वहीं सियारिन के रूप में जन्मी स्त्री की संतानें जीवित नहीं रह पाती थीं। बाद में उसे अपने पिछले जन्म के कर्म और अधूरे व्रत का स्मरण कराया गया। तब उसने भी विधिपूर्वक जीवित्पुत्रिका व्रत किया। धार्मिक कथा के अनुसार, इसके बाद उसे संतान सुख प्राप्त हुआ और उसके पुत्र भी दीर्घायु हुए।
व्रत में कथा सुनने की परंपरा
जितिया व्रत की कथाएं माताओं को त्याग, संयम और संकल्प का संदेश देती हैं। व्रत रखने वाली महिलाएं पूजा के दौरान जीमूतवाहन की कथा तथा चील्हो-सियारिन की कहानी सुनती हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत करने से संतान के जीवन में सुख-समृद्धि और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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