Lucknow: राजधानी में पुराने और जर्जर भवनों से होने वाले संभावित हादसों को रोकने के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने बड़ा अभियान शुरू किया है। प्राधिकरण ने अपनी आवासीय और व्यावसायिक योजनाओं में स्थित पुराने भवनों की स्थिति का आकलन कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। शुरुआती स्तर पर करीब 160 इमारतों को चिह्नित किए जाने की तैयारी है।
LDA के अधिकारियों के मुताबिक, शहर के अलग-अलग जोनों में सर्वे कराया जा रहा है। प्रत्येक जोन में पुराने भवनों की पहचान कर उनकी मौजूदा स्थिति की जानकारी जुटाई जाएगी। इसके बाद तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से भवनों की सेफ्टी ऑडिट कराई जाएगी। ऑडिट में यदि कोई इमारत बेहद कमजोर या लोगों के लिए खतरनाक पाई जाती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा सकती है।
30 साल से पुराने भवन रडार पर
प्राधिकरण की ओर से खासतौर पर 30 वर्ष से अधिक पुराने भवनों पर ध्यान दिया जा रहा है। सर्वे के दौरान मकान, दुकान, व्यावसायिक परिसर, बहुमंजिला भवन और अन्य निर्माणों की स्थिति देखी जाएगी। अधिकारियों की टीम भवन की संरचना, निर्माण की मौजूदा हालत और सुरक्षा से जुड़े मानकों का जायजा लेगी।
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LDA उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के अनुसार, पुराने भवनों की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए सर्वे और तकनीकी जांच जरूरी है। इसका उद्देश्य कमजोर भवनों की समय रहते पहचान करना है, ताकि किसी संभावित दुर्घटना को रोका जा सके।
जांच के बाद ही होगा ध्वस्तीकरण
प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि केवल पुराने होने के आधार पर किसी भवन को गिराने का फैसला नहीं किया जाएगा। पहले संबंधित इमारत की तकनीकी जांच कराई जाएगी। सेफ्टी ऑडिट की रिपोर्ट के आधार पर भवन की स्थिति का आकलन होगा। यदि किसी भवन को सुरक्षित पाया जाता है तो उसे गिराने की कार्रवाई नहीं होगी। वहीं, गंभीर रूप से जर्जर और खतरनाक भवनों के मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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भवन मालिकों को मिलेगा अपना पक्ष रखने का मौका
किसी भी इमारत को ध्वस्त करने से पहले भवन मालिक या संबंधित पक्ष को नोटिस दिया जाएगा। इसके बाद सक्षम प्राधिकारी के समक्ष सुनवाई होगी। भवन स्वामी को अपना पक्ष रखने और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। सुनवाई और तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर यदि भवन को खतरनाक घोषित किया जाता है, तभी नियमानुसार ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया जाएगा। इसके बाद आदेश के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।
नगर निगम से भी ली जाएगी जानकारी
LDA अधिकारियों के मुताबिक, प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र से बाहर आने वाले इलाकों के जर्जर भवनों को लेकर नगर निगम से जानकारी मांगी जाएगी। शहर के दूसरे हिस्सों में खतरनाक भवनों की पहचान और उन पर कार्रवाई की जिम्मेदारी संबंधित नगर निकाय की होगी।
हादसों पर लगाम लगाने की कोशिश
पुराने भवनों की कमजोर होती संरचना कई बार हादसों की वजह बन सकती है। ऐसे में LDA का यह सर्वे अभियान संभावित दुर्घटनाओं को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्राधिकरण का जोर इस बात पर है कि जोखिम वाले भवनों की पहचान समय रहते हो और तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाए।
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