
Lucknow: उत्तर प्रदेश कैडर की IAS अधिकारी दिव्या मित्तल के इस्तीफे को लेकर प्रदेश की राजनीति में चर्चा तेज हो गई है। इस मामले में अब उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को पत्र लिखकर केंद्र सरकार के स्तर पर हस्तक्षेप की मांग की है। अजय राय ने कहा कि इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लिया जाना चाहिए, ताकि ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ काम करने वाले अधिकारियों का मनोबल प्रभावित न हो।
राज्यपाल से केंद्र के सामने मामला उठाने की मांग
अजय राय ने अपने पत्र में राज्यपाल से आग्रह किया है कि वह IAS दिव्या मित्तल के इस्तीफे के मामले को केंद्र सरकार के समक्ष उठाएं। उनका कहना है कि प्रशासनिक व्यवस्था में अधिकारियों को संविधान और नियमों के मुताबिक स्वतंत्र होकर काम करने का अवसर मिलना चाहिए।
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कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी किसी राजनीतिक दल के लिए नहीं, बल्कि संविधान और आम जनता के प्रति जवाबदेह होते हैं। ऐसे में प्रशासनिक अधिकारियों की निष्पक्षता और सम्मान बनाए रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है।
फील्ड पोस्टिंग से हटाए जाने के बाद दिया इस्तीफा
दिव्या मित्तल वर्ष 2013 बैच की IAS अधिकारी हैं। उन्हें इसी साल मई में देवरिया के जिलाधिकारी पद से हटाकर राजस्व विभाग में विशेष सचिव की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बाद से ही उनके स्थानांतरण और नई तैनाती को लेकर चर्चा बनी हुई थी। रविवार को दिव्या मित्तल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे में व्यक्तिगत और पारिवारिक कारणों का उल्लेख किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इस्तीफे के पीछे की परिस्थितियों को लेकर राजनीतिक स्तर पर अलग-अलग सवाल उठाए जा रहे हैं।
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इस्तीफा नियुक्ति विभाग को मिला
दिव्या मित्तल का इस्तीफा सोमवार को उत्तर प्रदेश के नियुक्ति विभाग को प्राप्त हुआ। बताया जा रहा है कि नियमानुसार इसे आगे केंद्र सरकार को भेजा जाएगा, क्योंकि IAS अधिकारियों के इस्तीफे को स्वीकार करने की अंतिम प्रक्रिया केंद्र के स्तर पर पूरी होती है। सूत्रों के अनुसार, मामले की फाइल केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) तक भेजी जा सकती है। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत इस्तीफे पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
अजय राय ने उठाया राजनीतिक दबाव का सवाल
अजय राय ने अपने पत्र में प्रशासनिक अधिकारियों पर कथित राजनीतिक दबाव को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यदि वरिष्ठ अधिकारी भी नियमों के अनुसार अपनी क्षमता और अनुभव का इस्तेमाल करते हुए काम नहीं कर पाएंगे, तो इसका असर निचले स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी पड़ेगा। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सेवा की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को बनाए रखना सरकार और व्यवस्था दोनों की जिम्मेदारी है। कांग्रेस का कहना है कि ईमानदार अधिकारियों को ऐसा माहौल मिलना चाहिए, जिसमें वे बिना किसी दबाव के जनता के हित में काम कर सकें।
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