
प्रतिदिन तीन करोड़ की उगाही, करोड़ों के राजस्व का हो रहा नुकसान
किशनगंज SP को हटाने के लिए 100 करोड़ लेकर पटना में बैठे हैं नेता
रंजन कुमार सिंह
Kishanganj: असम व मेघालय से पश्चिम बंगाल के रास्ते बिहार में अवैध तरीके से कोयले, मादक पदार्थ, मानव तस्करी पत्थर, रॉड, अवैध लॉटरी, जाली नोट की धड़ल्ले से तस्करी हो रही है। इसी रास्ते GST की चोरी कर धड़ल्ले से बिहार से बंगाल ईट लदे ट्रकों को भेजा जा रहा है। इस सब के पीछे एक बड़ा सिंडीकेट काम कर रहा है। बताया जाता है कि कोयला तस्कर और राष्ट्र विरोधी तत्वों का एक समूह 100 करोड़ लेकर किशनगंज के SP का ट्रांसफर करवाने के लिए एक नेता के साथ पटना में डेरा डाले हुए है।
सवाल बड़ा है, अगर 100 करोड़ की राशि कोई एक अधिकारी के ट्रांसफर के लिए देता है तो वह कई सौ करोड़ कमाने की गुंजाइश रखता है। यह गंभीर मामला है और जांच का विषय है। इतना ही नहीं अगर सौ करोड़ की राशि इस सीमांचल से गया है तो इसकी भी जांच होनी चाहिए कि इतनी बड़ी रकम कैसे सीमांचल को खोखला कर रहा है।
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बंगाल के तर्ज पर कोयला माफिया बनना चाहते है लाला: प्रवर्तन निदेशालय ने पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित करोड़ों रुपए के कोयला तस्करी मामले में संलिप्तता के आरोप में पुलिस अधिकारी मनोरंजन मंडल को गिरफ्तार किया है। इस मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी लंबे समय से उन पर नजर बनाए हुए थी। सीमांचल के चार राज्यों झारखंड, पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश में फैला 5,500 करोड़ का कोयला घोटाला: कोयले की काली कमाई के इस साम्राज्य का मालिक यानी अनूप मांझी उर्फ लाला अभी पूरे देश में सुर्खियों में बना हुआ है।
इस चर्चा की मुख्य वजह यही है कि घोटाले की कालिख पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी रुजिरा तक पहुंच गई है। चुनाव से ठीक पहले पश्चिम बंगाल की राजनीति में जिस शख्स के कारण यह बवंडर मचा है, उस लाला को बंगाल के पुरुलिया का भामुरिया गांव में कभी मछली बेचने वाले के तौर पर जानता था। 15 साल पहले तक लाला गांव में साइकिल पर मछली बेचता था। मगर आज लाला न सिर्फ 20 हजार करोड़ की संपत्ति का मालिक है, बल्कि देश का सबसे बड़ा कोयला तस्कर भी है। कई शेल कंपनियों का कर्ता-धर्ता भी है। तो क्या बिहार के माफिया भी स्वयं को लाला बनकर राजनीति के शीर्ष गलियारे तक पहुंचने की कोशिश में है।
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बंगाल के रास्ते सीमांचल में कोयला तस्करी का आरोप
कोयला तस्करी के खेल में करोड़ों की कमाई तस्करों के द्वारा की जा रही है। इसका असर सरकारी खजाने पर पड़ रहा है। वजह यह है कि तस्करों का गैंग फर्जी कागजात तैयार करता है और इसके आधार पर विभिन्न राज्यों की सीमाओं से होते हुए बिहार की सीमा में ट्रकों को प्रवेश करा देता है। इससे सेल्स टैक्स विभाग को खासा चूना लग रहा है। असम से कोयले की तस्करी कर किशनगंज (बिहार) जिले के रास्ते अवैध धंधा जारी है। कोयले की तस्करी के अवैध कारोबार से कई माफिया लाल हो रहे हैं। इस खेल में हर महीने सरकारी राजस्व को करोड़ों का चूना लग रहा है।
असम के गुवाहाटी सहित अन्य जगहों से कोयले की तस्करी कर सीमांचल के किशनगंज के गलगलिया चेकपोस्ट होकर रोज 100 से अधिक ट्रक – हाइवा से सप्लाई का खेल चल रहा है। ट्रक -हाइवा पर ओवरलोड कोयले की खेप को गलगलिया चेकपोस्ट पार कर किशनगंज के रास्ते इस अवैध कारोबार को अंजाम दिया जा रहा है। अवैध कागजात, फर्जी चालान के सहारे कोयले की बेरोकटोक तस्करी के लिए इंट्री माफिया गिरोह सक्रिय है। इसका प्रमाण है कि पूर्व के डीएम ने देर रात गलगलिया चेकपोस्ट पर औचक छापेमारी में कई कोयला लदे ट्रक को पकड़ा था। जुर्माना भी लगाया था।
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इसके पीछे चलता है इंट्री माफिया का कोड वर्ड : मिली जानकारी के अनुसार तस्करी का कोयला लदा ट्रक -हाइवा को चेक पोस्ट से लेकर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए एक कोड वर्ड दिया जाता है। बंगाल से किशनगंज को जोड़ने वाले एनएच 327 होकर कोयले लदे ओवरलोड ट्रक को गलगलिया चेकपोस्ट पार करवाने का काम इंट्री माफिया गिरोह का होता है। जहां से किशनगंज की सीमा में प्रवेश कर तस्करी के कोयले निर्धारित स्थानों व ईट चिमनी भट्ठे में सप्लाई की जाती है। मिली जानकारी के अनुसार रात के 10 बजे से लेकर सुबह के चार बजे तक तस्करी के कोयले से लोड ट्रक सहित अन्य वाहनों को पार करवाया जाता है।
ट्रकों के चक्के के अनुसार फिक्स होता है इंट्री रेट: फर्जी चालान सहित अन्य कागजात के सहारे तस्करी के कोयले लदे ट्रक को चेकपोस्ट सहित रास्ते पार करवाने के लिए ट्रकों में लगे चक्के की संख्या के अनुसार इंट्री का रेट देना होता है। 6 चक्के के ट्रक लिए 10 हजार रूपये, 12 से 16 चक्के वाले ट्रक के लिए 15 हज़ार रूपये प्रति महीने इंट्री माफिया को देना होता है। 16 से ज्यादा चक्के वाले ट्रक को प्रति महीने 20 हज़ार रूपये इंट्री फीस देकर ही कोयले लदे ट्रक पार हो सकते हैं। बताया जाता है कि निर्धारित इंट्री फीस नहीं देने वाले ट्रक को माफिया तुरंत प्रशासन से पकड़वा देते है।
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इंट्री माफिया द्वारा बिना रंगदारी शुल्क दिए पार करने वाले कई ट्रक को पकड़ कर ड्राइवर व स्टाफ के साथ मारपीट व बंधक बनाने की बात आए दिन सामने आती रहती है। बताया जाता है कि वर्तमान में अरशद नामक इंट्री माफिया द्वारा कोयले की तस्करी को अंजाम दिया जा रहा है। असली ई–वे–बिल को स्कैन कर कंप्यूटर के माध्यम से तिथि व अन्य में बदलाव कर भी फर्जी ई-वे बिल बना दिया जाता है। इसे पुलिस व अन्य प्रशासनिक अधिकारी आसानी से नहीं पकड़ पाते हैं।
सूत्र बताते हैं कि कोयला ही अवैध खनन का रहता है, जिस कारण इसी बिल व चालान को लेकर इंट्री माफिया से संपर्क कर वाहनों को बिहार में प्रवेश कराते हैं। पिछले दिनों बिहार पुलिस मुख्यालय ने भी इंट्री माफिया की सक्रियता को लेकर पत्र भेजा था, जिसमें 12 माफिया के नाम का उल्लेख भी किया गया है। पर उसपर फिलहाल कार्रवाई नहीं हो सकी है और यह करोड़ों का धंधा बेरोकटोक जारी है।
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