
Toronto: अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति के जवाब में कनाडा अब ऐसे कदम उठाने की तैयारी कर रहा है, जिनका असर अमेरिकी कारोबार और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह अमेरिकी दबाव का जवाब भी दे और कनाडा की अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक नुकसान से भी बचाए।
कनाडा की अर्थव्यवस्था का अमेरिका के साथ व्यापार पर काफी बड़ा निर्भरता है। देश अपने कुल निर्यात का बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार में भेजता है। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच बढ़ता टकराव कनाडाई कारोबार और उद्योगों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। हालांकि, अमेरिकी बाजार भी कनाडा से होने वाली सप्लाई पर कई क्षेत्रों में निर्भर है। कनाडा सरकार की जवाबी रणनीति में फिलहाल अमेरिकी उत्पादों पर समान मूल्य के टैरिफ लगाने की योजना प्रमुख है। इसके तहत स्टील, डेयरी उत्पाद, घरेलू उपकरण, कृषि मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, लुगदी और कागज जैसे क्षेत्रों को निशाना बनाया जा सकता है।
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सरकार का उद्देश्य अमेरिका पर आर्थिक दबाव बनाना और यह संदेश देना है कि एकतरफा व्यापारिक कदमों का जवाब दिया जाएगा। कनाडा के पास अपनी स्थिति मजबूत करने का एक और रास्ता अमेरिकी राज्यों और वहां के कारोबार पर पड़ने वाले असर का इस्तेमाल करना है। कनाडा अमेरिका के कई राज्यों के लिए प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल है। ऐसे में सीमा पार व्यापार में किसी भी तरह की बाधा का असर अमेरिकी कंपनियों, किसानों और उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है।
इस बीच कनाडा में घरेलू राजनीतिक दबाव भी बढ़ रहा है। कई कनाडाई नागरिक चाहते हैं कि सरकार अमेरिकी टैरिफ के सामने झुकने के बजाय मजबूती से जवाब दे। ओंटारियो के प्रीमियर डग फोर्ड भी ट्रंप की व्यापार नीति के मुखर आलोचक रहे हैं। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति की टैरिफ धमकियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है।
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हालांकि, कनाडा के लिए पलटवार करना आसान नहीं होगा। अमेरिका उसका सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और दोनों देशों की सप्लाई चेन दशकों से एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। ऑटोमोबाइल, ऊर्जा, कृषि और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के कारोबार का गहरा संबंध है। ऐसे में लंबे समय तक चलने वाला ट्रेड वॉर दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए महंगा साबित हो सकता है।
कनाडा की सरकार अब ऐसे उपायों पर भी विचार कर रही है, जिनसे घरेलू कामगारों और कंपनियों को संभावित नुकसान से बचाया जा सके। वित्त विभाग की ओर से अतिरिक्त राहत और समर्थन उपायों की घोषणा किए जाने की बात कही गई है। विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर है कि कनाडा और अमेरिका के बीच टैरिफ विवाद किस दिशा में जाता है। यदि दोनों देश बातचीत के जरिए समाधान नहीं निकालते हैं, तो इसका असर सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक सप्लाई चेन, कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी इसका असर पड़ सकता है।
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