
National Handloom Day 2026 : भारत की पहचान सिर्फ उसकी विविध संस्कृतियों और परंपराओं से ही नहीं, बल्कि यहां की सदियों पुरानी हस्तकरघा कला से भी है। गांवों, कस्बों और छोटे शहरों में आज भी हजारों कारीगर अपने हाथों से खूबसूरत कपड़े और डिजाइन तैयार कर रहे हैं। खासतौर पर भारतीय हैंडलूम साड़ियां अपनी कला, बुनाई और अनोखे डिजाइनों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं। National Handloom Day 2026 के मौके पर आइए जानते हैं भारत के अलग-अलग राज्यों की मशहूर हैंडलूम साड़ियों के बारे में और किस नाम से इन्हें पहचाना जाता है।
उत्तर प्रदेश : बनारसी सिल्क साड़ी
उत्तर प्रदेश की बनारसी सिल्क साड़ी देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी बेहद लोकप्रिय है। इन साड़ियों पर सोने और चांदी के धागों से जरी और ब्रोकेड का शानदार काम किया जाता है। इन्हें तैयार करने में कई बार महीनों से लेकर सालों तक का समय लग जाता है।
गुजरात : पटोला और इकत साड़ी
गुजरात की पटोला साड़ी अपनी बेहतरीन बुनाई और आकर्षक डिजाइन के लिए जानी जाती है। इसके अलावा यहां की इकत प्रिंट वाली सिल्क साड़ियां भी हैंडलूम प्रेमियों की पसंद हैं।
राजस्थान : बांधनी और लहरिया साड़ी
राजस्थान की बांधनी, लहरिया और टाई-एंड-डाई तकनीक से तैयार की जाने वाली साड़ियां अपनी रंग-बिरंगी खूबसूरती के लिए मशहूर हैं।
तमिलनाडु : कांजीवरम साड़ी
तमिलनाडु के कांचीपुरम की कांजीवरम साड़ियां भारत की सबसे कीमती और पारंपरिक साड़ियों में शामिल हैं। भारी सिल्क और शानदार जरी वर्क इन्हें खास बनाता है।
केरल : कसावु साड़ी
केरल की सफेद रंग की साड़ी, जिस पर सुनहरे बॉर्डर का काम होता है, कसावु साड़ी के नाम से जानी जाती है। यह राज्य की पारंपरिक पहचान है।
तेलंगाना : पोचमपल्ली साड़ी
तेलंगाना की पोचमपल्ली साड़ी सॉफ्ट सिल्क और कॉटन ब्लेंड से तैयार की जाती है। इसकी खास इकत बुनाई इसे अलग पहचान देती है।
आंध्र प्रदेश और कर्नाटक : उप्पडा जामदानी और इल्कल साड़ी
आंध्र प्रदेश की उप्पडा जामदानी साड़ियां और कर्नाटक की इल्कल साड़ियां अपनी पारंपरिक बुनाई के लिए प्रसिद्ध हैं।
असम : मुगा सिल्क साड़ी
असम की मुगा सिल्क साड़ी अपनी प्राकृतिक सुनहरी चमक के लिए जानी जाती है। इसे हाथ से बुना जाता है और समय के साथ इसकी चमक और बढ़ती है।
मेघालय, सिक्किम और नागालैंड की खास बुनाई
मेघालय की एरी सिल्क साड़ियां, सिक्किम की लेप्चा बुनाई और नागालैंड की पारंपरिक ड्रेप व टाइट बुनाई वाली साड़ियां अपनी अलग पहचान रखती हैं।
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़: चंदेरी और कोसा सिल्क
मध्य प्रदेश की चंदेरी साड़ियां अपनी हल्की बनावट और खूबसूरत डिजाइन के लिए प्रसिद्ध हैं। वहीं छत्तीसगढ़ की कोसा सिल्क साड़ियां भी काफी पसंद की जाती हैं।
पंजाब और हरियाणा : फुलकारी और रेशम धुरिया
पंजाब की फुलकारी कढ़ाई दुनियाभर में प्रसिद्ध है, जिसका इस्तेमाल साड़ियों और दुपट्टों में किया जाता है। हरियाणा की रेशम धुरिया साड़ियां भी अपनी खास पहचान रखती हैं।
बिहार और झारखंड : भागलपुरी और टसर सिल्क
बिहार की भागलपुरी सिल्क साड़ियां काफी लोकप्रिय हैं। इन्हें टसर सिल्क से तैयार किया जाता है। झारखंड की आदिवासी टसर सिल्क साड़ियां भी अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए जानी जाती हैं।
पश्चिम बंगाल : बालुचरी और जामदानी साड़ी
पश्चिम बंगाल की बालुचरी और जामदानी साड़ियां अपनी कलात्मक बुनाई और पारंपरिक डिजाइनों के लिए प्रसिद्ध हैं।
हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड : पहाड़ी हैंडलूम
हिमाचल की कुल्लू पट्टी साड़ी और उत्तराखंड की पंचाचूली हैंडलूम साड़ियां पहाड़ी संस्कृति और कला को दर्शाती हैं।
गोवा : कुनबी साड़ी
गोवा की लाल चेक वाली कुनबी साड़ी काफी लोकप्रिय है। यह कॉटन से तैयार की जाती है और इसे पारंपरिक रूप से आदिवासी समुदायों द्वारा बनाया जाता है।
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