
40 साल पुराने बोफोर्स घोटाले का आखिरकार हुआ अंत, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की आखिरी याचिका
Bofors Case Supreme Court: करीब चार दशक तक देश की राजनीति और न्यायिक व्यवस्था में चर्चा का विषय रहे बोफोर्स रिश्वत मामले का आखिरकार कानूनी अंत हो गया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी अंतिम लंबित याचिका को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही 1980 के दशक के सबसे चर्चित रक्षा सौदों में शामिल इस मामले का कानूनी अध्याय हमेशा के लिए बंद हो गया।
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने अधिवक्ता अजय के. अग्रवाल द्वारा दायर अपील पर सुनवाई से इनकार कर दिया। इस अपील में दिल्ली हाई कोर्ट के वर्ष 2005 के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें हिंदूजा बंधुओं और स्वीडन की हथियार निर्माता कंपनी एबी बोफोर्स को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने समय देने से किया इनकार
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अदालत से श्रीचंद पी. हिंदूजा और गोपीचंद पी. हिंदूजा के नाम हटाने के लिए अतिरिक्त समय देने की मांग की गई, क्योंकि दोनों का निधन हो चुका है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह अनुरोध स्वीकार नहीं किया।
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पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस मामले को अब और लंबा नहीं खींचा जा सकता। अदालत ने माना कि जब दिल्ली हाई कोर्ट पहले ही आरोपों को समाप्त कर चुका है और सीबीआई की याचिका भी पहले खारिज हो चुकी है, तब इस मामले को आगे बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं है।
2005 में हाई कोर्ट ने सभी आरोप किए थे खारिज
31 मई 2005 को दिल्ली हाई कोर्ट ने हिंदूजा बंधुओं और एबी बोफोर्स के खिलाफ लगाए गए आरोपों को निरस्त कर दिया था। उस समय अदालत ने सीबीआई की जांच पर भी गंभीर सवाल उठाए थे। न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की थी कि इस जांच पर सरकारी खजाने से लगभग 250 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
इसके बाद नवंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की अपील भी खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा था कि एजेंसी ने याचिका दाखिल करने में 4,522 दिनों की देरी की और इस असाधारण देरी का कोई संतोषजनक कारण प्रस्तुत नहीं किया।
क्या था बोफोर्स मामला?
बोफोर्स मामला वर्ष 1986 में भारत सरकार और स्वीडन की कंपनी एबी बोफोर्स के बीच हुए 1,437 करोड़ रुपये के रक्षा सौदे से जुड़ा था। इस समझौते के तहत भारतीय सेना के लिए 400 हॉवित्जर तोपों की खरीद की जानी थी।
वर्ष 1987 में स्वीडन के एक रेडियो प्रसारण में दावा किया गया कि इस रक्षा सौदे के बदले भारतीय नेताओं, बिचौलियों और रक्षा अधिकारियों को कथित रूप से रिश्वत दी गई थी। इसके बाद यह मामला देश के सबसे बड़े राजनीतिक विवादों में शामिल हो गया और कई वर्षों तक राष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख मुद्दा बना रहा।
40 साल बाद कानूनी अध्याय समाप्त
सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद बोफोर्स मामले से जुड़े सभी कानूनी विकल्प समाप्त हो गए हैं। लगभग 40 वर्षों तक अदालतों में चले इस बहुचर्चित मामले का अब औपचारिक रूप से समापन हो गया है। यह फैसला भारतीय न्यायिक इतिहास के सबसे लंबे समय तक चले चर्चित मामलों में से एक के अंत के रूप में देखा जा रहा है।
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