
Ethanol in ATF : हवाई जहाज के ईंधन को लेकर देश में नई राजनीतिक बहस छिड़ गई है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और BJP IT सेल के प्रमुख अमित मालवीय सोशल मीडिया पर आमने-सामने आ गए हैं। विवाद की वजह ATF में इथेनॉल मिलाने की कथित योजना और सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल को लेकर फैली चर्चाएं हैं। एक तरफ केजरीवाल ने सरकार पर विमान यात्रियों की सुरक्षा से समझौता करने का आरोप लगाया, वहीं बीजेपी ने इन दावों को भ्रामक बताते हुए कहा कि सरकार केवल प्रमाणित SAF को नियमों में शामिल कर रही है, न कि सामान्य इथेनॉल को।
केजरीवाल ने क्या कहा?
अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा करते हुए दावा किया कि सरकार एविएशन टरबाइन फ्यूल में इथेनॉल मिलाने की तैयारी कर रही है। उन्होंने लिखा कि यदि ऐसा हुआ तो उड़ान के दौरान विमान की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कोई यात्री ऐसे विमान में सफर करना चाहेगा जो “मिलावटी ईंधन” पर उड़ रहा हो। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर ATF और इथेनॉल को लेकर बहस तेज हो गई।
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अमित मालवीय ने बताया दावा भ्रामक
केजरीवाल के आरोपों पर पलटवार करते हुए अमित मालवीय ने कहा कि सरकार ने ATF में सामान्य इथेनॉल मिलाने का कोई फैसला नहीं लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने केवल सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल को ATF की परिभाषा में शामिल करने का रास्ता खोला है।
मालवीय के अनुसार SAF आधुनिक तकनीक से तैयार किया गया एविएशन ग्रेड ईंधन है, जिसका रासायनिक स्वरूप पारंपरिक जेट फ्यूल जैसा होता है। इसे विमान इंजनों के साथ पूरी तरह अनुकूल बनाने के बाद ही उपयोग की अनुमति मिलती है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी SAF को इस्तेमाल से पहले ASTM इंटरनेशनल और ICAO जैसे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के तहत कठोर परीक्षण और प्रमाणन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
सरकार ने ATF नियमों में क्या बदलाव किया?
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 17 अप्रैल को जारी अधिसूचना के जरिए एविएशन टरबाइन फ्यूल से जुड़े नियमों में संशोधन किया है। नए प्रावधान के अनुसार अब सिंथेटिक हाइड्रोकार्बन आधारित ब्लेंडेड एविएशन फ्यूल को भी ATF की श्रेणी में शामिल किया जा सकेगा।यह बदलाव भारतीय मानक IS 1571 और IS 17081 के अनुरूप किया गया है, ताकि भविष्य में पर्यावरण के अनुकूल और कम कार्बन उत्सर्जन वाले ईंधन का उपयोग बढ़ाया जा सके। इसका मतलब यह नहीं है कि विमानों में सीधे इथेनॉल डालकर उड़ाया जाएगा, बल्कि केवल प्रमाणित एविएशन फ्यूल को ही अनुमति मिलेगी।
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SAF और इथेनॉल में क्या अंतर है?
यही सबसे बड़ा भ्रम है। इथेनॉल एक अल्कोहल आधारित जैव ईंधन है, जिसका उपयोग भारत में पेट्रोल के साथ E20 ब्लेंड के रूप में किया जा रहा है। वहीं सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल सीधे इथेनॉल नहीं होता। इसे कृषि अपशिष्ट, इस्तेमाल हो चुके कुकिंग ऑयल, बायोमास और अन्य जैविक स्रोतों से उन्नत तकनीक के जरिए तैयार किया जाता है। इसके बाद इसे इस तरह प्रोसेस किया जाता है कि इसकी रासायनिक संरचना पारंपरिक जेट ईंधन जैसी हो जाए और यह बिना किसी तकनीकी बदलाव के विमान इंजनों में सुरक्षित रूप से इस्तेमाल किया जा सके।
सरकार ने क्या कहा?
नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) ने स्पष्ट किया है कि सरकार की ATF में इथेनॉल मिलाने की कोई योजना नहीं है। मंत्रालय ने इस तरह के दावों को पूरी तरह भ्रामक और गैर-जिम्मेदाराना बताया है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि विमान ईंधन को लेकर गलत जानकारी फैलाने से यात्रियों के बीच अनावश्यक भय और भ्रम पैदा हो सकता है। उन्होंने दोहराया कि सरकार केवल अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रमाणित SAF को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है।
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