
अयोध्या विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास: 1967 से 2022 तक किस पार्टी का रहा दबदबा, जानिए पूरा रिकॉर्ड
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच अयोध्या विधानसभा सीट एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस समेत सभी प्रमुख दल इस हाई-प्रोफाइल सीट पर अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं। हाल ही में समाजवादी पार्टी ने पूर्व विधायक तेज नारायण पांडेय ‘पवन पांडेय’ को उम्मीदवार घोषित कर चुनावी मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।
अयोध्या केवल एक विधानसभा सीट नहीं, बल्कि देश की राजनीति का प्रतीक मानी जाती है। राम मंदिर, राम जन्मभूमि आंदोलन और हिंदुत्व की राजनीति के कारण इस सीट पर होने वाला हर चुनाव राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरता है।
1967 में अस्तित्व में आई अयोध्या विधानसभा सीट
वर्तमान अयोध्या विधानसभा सीट का गठन वर्ष 1967 में हुआ। इससे पहले 1952, 1957 और 1962 के चुनाव मौजूदा अयोध्या विधानसभा क्षेत्र के नाम से नहीं हुए थे, क्योंकि उस समय विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन अलग था।
1967 में हुए पहले चुनाव में भारतीय जनसंघ के बी. किशोर इस सीट से पहले विधायक बने। इसके बाद अलग-अलग दौर में कांग्रेस, जनता पार्टी, जनता दल, समाजवादी पार्टी और भाजपा ने यहां जीत दर्ज की।

लल्लू सिंह का सबसे लंबा राजनीतिक दबदबा
अयोध्या सीट पर सबसे लंबा दबदबा भाजपा के वरिष्ठ नेता लल्लू सिंह का रहा। उन्होंने लगातार पांच विधानसभा चुनाव—1991, 1993, 1996, 2002 और 2007 में जीत दर्ज कर रिकॉर्ड बनाया। करीब दो दशकों तक इस सीट पर भाजपा का मजबूत जनाधार कायम रहा।
हालांकि वर्ष 2012 में समाजवादी पार्टी के तेज नारायण पांडेय ‘पवन पांडेय’ ने लल्लू सिंह को हराकर बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया। इसके बाद 2017 और 2022 में भाजपा ने वापसी करते हुए वेद प्रकाश गुप्ता को लगातार दो बार विधायक बनाया।
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2022 में भाजपा ने बरकरार रखी बढ़त
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार वेद प्रकाश गुप्ता ने समाजवादी पार्टी के पवन पांडेय को करीब 19,990 वोटों से हराया। इस जीत के साथ भाजपा ने अयोध्या में लगातार दूसरी बार अपनी पकड़ मजबूत की।
अब 2027 के चुनाव से पहले सपा ने एक बार फिर पवन पांडेय को मैदान में उतारकर मुकाबले को रोचक बना दिया है।
2024 लोकसभा चुनाव ने बदले राजनीतिक संकेत
राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के कुछ महीने बाद हुए 2024 लोकसभा चुनाव में फैजाबाद संसदीय सीट पर भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। समाजवादी पार्टी के अवधेश प्रसाद ने जीत दर्ज कर सभी को चौंका दिया।
इस नतीजे ने यह संकेत दिया कि अयोध्या में धार्मिक मुद्दों के साथ-साथ स्थानीय विकास, सामाजिक समीकरण और उम्मीदवार की छवि भी चुनावी परिणामों को प्रभावित करती है।
क्यों खास है अयोध्या विधानसभा सीट?
अयोध्या विधानसभा सीट सामान्य (जनरल) श्रेणी की सीट है, लेकिन इसका राजनीतिक महत्व पूरे देश में सबसे अलग माना जाता है। राम मंदिर, बाबरी मस्जिद विवाद और हिंदुत्व की राजनीति के कारण यह सीट हमेशा राष्ट्रीय बहस का केंद्र रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अयोध्या का चुनावी संदेश केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहता, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी इसका प्रभाव दिखाई देता है। यही वजह है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में भी इस सीट पर पूरे देश की नजर रहने वाली है।
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