जयशंकर ने अफ्रीकी मिशन प्रमुखों के साथ साझा किया भविष्य का रोडमैप

India-Africa Partnership

जयशंकर ने बताया भविष्य का विजन

India-Africa Partnership:  विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने  राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित ‘अफ्रीका दिवस 2026’ समारोह में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने भारत में तैनात अफ्रीकी मिशन प्रमुखों और राजनयिक समुदाय के वरिष्ठ प्रतिनिधियों से मुलाकात कर भविष्य का रोडमैप साझा किया। बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत और पूरे अफ्रीकी महाद्वीप के बीच गहरे रणनीतिक, आर्थिक और रक्षा सहयोग को और अधिक प्रगाढ़ बनाना था।

विदेश मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, समारोह को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने दोनों पक्षों के बीच के मजबूत वैचारिक और ऐतिहासिक आधार को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “भारत और अफ्रीका के बीच का रिश्ता ऐतिहासिक संबंधों, सांस्कृतिक समानता और उपनिवेशवाद के खिलाफ संघर्ष के साझा अनुभवों से आपस में मजबूती से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के लिए दोनों पक्षों का साझा संघर्ष आज आधुनिक वैश्विक मंच पर एक अटूट और भरोसेमंद साझेदारी के रूप में विकसित हो चुका है।

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भारत-अफ्रीका संबंधों को नई दिशा

डॉ. जयशंकर ने इस बात पर विशेष प्रकाश डाला कि भारत आज अफ्रीका के सबसे बड़े व्यापार और निवेश भागीदारों में से एक है। उन्होंने आंकड़ों को साझा करते हुए बताया कि दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 93 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है और अफ्रीका में भारत का संचयी निवेश 80 अरब डॉलर से अधिक हो गया है। उन्होंने रेखांकित किया कि अफ्रीका महाद्वीप अपनी युवा आबादी और प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों के साथ बदलाव की दहलीज पर है, जो भारत की नवाचार-आधारित विकास यात्रा का पूरक है।

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उन्होंने कहा भारत अफ्रीका के साथ समावेशी और मांग-आधारित विकास सहयोग का पक्षधर है, जो राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को पूरा करने के लिए स्थानीय क्षमता को बढ़ाता है। इस दिशा में, मैं आज यह बताना चाहता हूं कि भारत सरकार ने अफ्रीका के 40 से अधिक देशों में परियोजनाओं के लिए 10 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की 190 लाइन ऑफ क्रेडिट (LOC) दी हैं। अब तक, 4.5 अरब डॉलर की 220 से अधिक परियोजनाएं सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी हैं, और कई अन्य पाइपलाइन में हैं।

‘ग्लोबल साउथ’ के प्रति भारत की प्रतिबद्धता जाहिर करते हुए जयशंकर ने कहा ऐसे समय में जब संघर्षों का असर ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) पर तेज़ी से बढ़ रहा है, हमारी साझेदारी का फ़ोकस खाद्य सुरक्षा पर भी रहा है। हाल के उदाहरणों में बुर्किना फ़ासो, मोज़ाम्बिक, लेसोथो, नामीबिया, ज़ाम्बिया, ज़िम्बाब्वे, नाइजीरिया, बोत्सवाना और सिएरा लियोन को अनाज की सप्लाई शामिल है। मोटे अनाज (मिलेट) के उत्पादन को फिर से बढ़ाने का हमारा अनुभव भी अफ़्रीकी देशों के लिए बहुत काम का है। इसके अलावा, एकजुटता दिखाते हुए पिछले 5 सालों में 25 से ज़्यादा अफ़्रीकी देशों को दवाएं, टीके, मेडिकल उपकरण और आपदा राहत सामग्री भेजी गई है।

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