

विजय श्रीवास्तव
क्या अब हाईवे व मेट्रो से अधिक प्रदेश की आंतरिक सड़कों, गड्ढों और मूलभूत सुविधाओं पर ध्यान देने से मिलेगा जनसमर्थन?
र्थिक आधार पर आरक्षण की मांग के बीच सवर्ण समाज में UGC में उपेक्षा को लेकर नाराज़गी की चर्चा।
बिहार सहित तीन उपचुनावों के बाद उत्तर प्रदेश के कई जिलों में किए गए मीडिया सर्वे की रिपोर्ट।
Uttar Pradesh Media Survey: राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सत्ता में थोड़ी-सी चूक या एक बड़ी गलती भी जनविश्वास को प्रभावित कर सकती है। जब कोई सरकार अपने समर्थकों या तंत्र पर अत्यधिक भरोसा कर लेती है और समय रहते विवादों पर कार्रवाई नहीं करती, तो कई प्रकार की शंकाएं जन्म लेने लगती हैं। ऐसे मामलों में कार्रवाई में देरी से सरकार की छवि भी प्रभावित हो सकती है और इसका असर चुनावों में दिखाई देता है।
सर्वे के दौरान कई लोगों ने अयोध्या चढ़ावा चोरी और कथित नीट परीक्षा लीक जैसे मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि दोषियों के विरुद्ध समय पर और कठोर कार्रवाई होती, तो विवाद इतना नहीं बढ़ता। कुछ लोगों की राय थी कि ऐसे मामलों में विलंब से जनता का भरोसा कमजोर होता है।
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राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सत्ता में मिली सफलता यदि अहंकार में बदल जाए तो जनता धीरे-धीरे दूरी बनाने लगती है। बातचीत में कुछ लोगों ने यह भी कहा कि जनप्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र के विकास पर लगातार ध्यान देना चाहिए। यदि स्थानीय समस्याओं की अनदेखी होती है, तो जनता में नाराज़गी बढ़ना स्वाभाविक है।
मीडिया सर्वे के दौरान सामने आया कि आम जनता की प्राथमिकताएं बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्टों से अधिक रोजमर्रा की मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी हैं। लोगों ने कहा कि उन्हें खेती के लिए खाद-पानी, फसलों का उचित मूल्य, युवाओं को समय पर रोजगार, व्यापारियों के लिए सुविधाएं, सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार से राहत तथा गांव, कस्बों और शहरों की सड़कों, नालियों और जलभराव जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान चाहिए।
कई लोगों का मानना था कि केवल मुफ्त राशन जैसी योजनाओं से लंबे समय तक अपेक्षित राजनीतिक लाभ मिलना कठिन हो सकता है। वहीं कुछ लोगों ने आयुष्मान कार्ड की पात्रता संबंधी शर्तों की भी समीक्षा किए जाने की आवश्यकता जताई।
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सर्वे में यह भी सामने आया कि कथित नीट परीक्षा लीक आंदोलन के बाद अब शहरों और गांवों में लोग अपनी समस्याओं के समाधान के लिए धरना, प्रदर्शन और अनशन को प्रभावी माध्यम मानने लगे हैं। न्यायालयों में मामलों के लंबे समय तक लंबित रहने और बार-बार तारीख मिलने को लेकर भी लोगों ने चिंता व्यक्त की।
कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर अधिकांश लोगों ने माफिया, भू-माफिया और संगठित अपराध के विरुद्ध सख्त कार्रवाई का समर्थन किया। हालांकि, कुछ लोगों का यह भी कहना था कि किसी भी कार्रवाई से पहले निष्पक्ष जांच और विधिक प्रक्रिया का पालन आवश्यक है तथा बिना पर्याप्त जांच के की जाने वाली कार्रवाई उचित नहीं मानी जानी चाहिए।
सर्वे में आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग और यूजीसी में कथित उपेक्षा को लेकर सवर्ण समाज के एक वर्ग में असंतोष की चर्चा भी सामने आई। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि इन मुद्दों पर समय रहते संवाद और समाधान नहीं हुआ तो आने वाले चुनावों में इनका प्रभाव देखने को मिल सकता है।
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One thought on “भक्तों की मांग: चढ़ावा चोरी व NEET परीक्षा लीक के दोषियों को शीघ्र सजा मिले, अन्यथा जनता 2027 में जवाब देगी?”
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