
India Supreme Court News : सुप्रीम कोर्ट ने शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन को नागरिकों का संवैधानिक अधिकार बताते हुए स्पष्ट किया है कि केवल प्रदर्शन होने के आधार पर पुलिस की कथित ज्यादतियों को सही नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने यह भी संकेत दिए कि वह पूरे देश में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए एक समान राष्ट्रीय प्रोटोकॉल तैयार करने पर विचार कर सकती है, ताकि प्रदर्शनकारियों के अधिकारों और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन बनाया जा सके। यह अहम टिप्पणी सोमवार को उस समय की गई जब अदालत NEET-UG पेपर लीक और शिक्षा एवं परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाओं में पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
CJI बोले- विरोध का अधिकार संविधान की गारंटी
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे, ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार संविधान द्वारा संरक्षित है। सुनवाई के दौरान CJI ने कहा, “शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार संविधान में निहित है। यह पूरी तरह से गारंटीकृत अधिकार है और इससे इनकार नहीं किया जा सकता। सिर्फ इसलिए कि आंदोलन हो रहा है, पुलिस की ज्यादती को उचित नहीं ठहराया जा सकता।”
पुलिस पर हमले भी चिंता का विषय
सुनवाई के दौरान एक अन्य याचिका का भी उल्लेख किया गया, जिसमें आरोप लगाया गया कि एक बेकाबू भीड़ ने पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों पर हमला किया। इस पर जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा, “पुलिसकर्मियों का घायल होना भी उतनी ही गंभीर चिंता का विषय है। राज्य से यह पूछा जा सकता है कि पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं की गई।”
देशभर में एक समान प्रोटोकॉल बनाने पर विचार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए देशभर में एक समान व्यवस्था होनी चाहिए। अदालत का मानना है कि प्रदर्शनकारियों के लिए निर्धारित स्थान और स्पष्ट दिशा-निर्देश होने चाहिए, जबकि कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाले असामाजिक तत्वों से सख्ती से निपटने की व्यवस्था भी बनी रहनी चाहिए। CJI ने कहा,“जब कोई शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करना चाहता है तो उसके लिए एक तय प्रोटोकॉल होना चाहिए। प्रदर्शन के लिए उचित स्थान उपलब्ध कराया जाए। यदि कोई असामाजिक तत्व माहौल बिगाड़ने की कोशिश करता है तो उससे अलग से निपटा जा सकता है।“
मंगलवार को फिर होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे पर पूरे देश में एक समान दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है और इसी उद्देश्य से व्यापक दिशानिर्देश तैयार करने पर विचार किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को होगी।
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