
शबाना आजमी ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन का समर्थन करते हुए बॉलीवुड पर उठे सवालों का जवाब दिया।
Shabana Azmi : वरिष्ठ अभिनेत्री शबाना आजमी एक बार फिर सामाजिक मुद्दों को लेकर अपनी सक्रियता के कारण चर्चा में हैं। रविवार को उन्होंने सिविल सोसायटी समूह सीजेपी के ‘चलो संसद’ मार्च में हिस्सा लेकर प्रदर्शनकारियों के साथ अपनी एकजुटता दिखाई। इससे एक दिन पहले भी वह जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे प्रदर्शनकारियों के समर्थन में पहुंची थीं। राजधानी दिल्ली में आयोजित इस मार्च के दौरान उन्होंने शांतिपूर्ण विरोध को लोकतंत्र का मूल अधिकार बताते हुए संविधान और महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख किया।
मार्च के दौरान मीडिया से बातचीत में शबाना आजमी ने कहा कि वे और अन्य प्रदर्शनकारी पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के लिए वहां मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान हर नागरिक को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार देता है और लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात रखने का यही सबसे उचित तरीका है। उन्होंने कहा, “हम यहां शांतिपूर्ण विरोध के लिए आए हैं। यह हमारा संवैधानिक अधिकार है। महात्मा गांधी ने हमें अहिंसा और शांतिपूर्ण आंदोलन का रास्ता दिखाया था और हम उसी पर चल रहे हैं। हमारा किसी भी तरह की हिंसा से कोई संबंध नहीं है।”
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मार्च के दौरान 75 वर्षीय शबाना आजमी अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ पैदल चलती नजर आईं। उम्र को देखते हुए कुछ लोग उन्हें सहारा देकर आगे बढ़ाते दिखाई दिए। इसके बावजूद उनका उत्साह और सक्रियता देखने लायक थी। उनकी मौजूदगी ने प्रदर्शन में शामिल लोगों का मनोबल भी बढ़ाया। इस दौरान जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि इस मार्च में बॉलीवुड के अन्य बड़े कलाकार क्यों नजर नहीं आ रहे हैं, तो शबाना आजमी ने इस सवाल पर स्पष्ट और बेबाक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बार-बार केवल फिल्म उद्योग के लोगों की अनुपस्थिति पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि यदि यह सवाल पूछा जा रहा है कि बॉलीवुड के लोग क्यों नहीं आए, तो यही सवाल बड़े उद्योगपतियों और अन्य प्रभावशाली वर्गों से भी पूछा जाना चाहिए। उनके मुताबिक केवल फिल्मी हस्तियों पर ध्यान केंद्रित करना असली मुद्दे से लोगों का ध्यान भटकाने जैसा है। शबाना आजमी ने कहा कि ऐसे प्रश्न अनावश्यक विवाद पैदा करते हैं, जबकि जरूरत इस बात की है कि उन लोगों का समर्थन किया जाए जो किसी मुद्दे पर लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने मीडिया से भी अपील की कि वह मुख्य विषय पर फोकस बनाए रखे और चर्चा को भटकाने से बचे।
गौरतलब है कि शबाना आजमी लंबे समय से सामाजिक और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों पर मुखर रही हैं। वे विभिन्न सामाजिक अभियानों, महिला अधिकारों, शिक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़े कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लेती रही हैं। उनकी यह भागीदारी भी उसी सामाजिक प्रतिबद्धता का हिस्सा मानी जा रही है। दिल्ली में आयोजित इस मार्च के दौरान उनके बयान सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। समर्थक उनके रुख की सराहना कर रहे हैं, जबकि इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
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