
Delivery Boys : कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले डिलीवरी बॉयज के लिए पुलिस ने सजा का तरीका बदल दिया है। अब पहली बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर डिलीवरी एजेंटों से जुर्माना वसूलने के बजाय उन्हें चार घंटे का अनिवार्य ट्रैफिक सेफ्टी लेक्चर अटेंड करना होगा। पुलिस का मानना है कि आर्थिक दंड से ज्यादा प्रभावी सड़क सुरक्षा की शिक्षा हो सकती है। बेंगलुरु ट्रैफिक पुलिस ने यह व्यवस्था शहर के 53 ट्रैफिक पुलिस स्टेशनों में लागू कर दी है और जल्द ही इसे पूरे शहर में विस्तारित करने की तैयारी है।
4000 चालानों के बाद लिया बड़ा फैसला
बेंगलुरु के संयुक्त पुलिस आयुक्त (ट्रैफिक) कार्तिक रेड्डी के अनुसार, सिर्फ तीन दिनों में लगभग 4,000 ट्रैफिक उल्लंघन डिलीवरी एजेंटों द्वारा दर्ज किए गए। इनमें रेड लाइट जंप करना, गलत दिशा में वाहन चलाना, हेलमेट न पहनना और ओवरस्पीडिंग जैसी घटनाएं प्रमुख हैं। पुलिस का कहना है कि अधिकांश गिग वर्कर्स छोटे शहरों से रोजगार के लिए आते हैं। ऐसे में बार-बार जुर्माना लगाने से उनकी आर्थिक स्थिति पर असर पड़ता है, लेकिन इससे नियमों का पालन भी सुनिश्चित नहीं हो पा रहा था।
चार घंटे की क्लास, ताकि दोबारा न टूटे नियम
नई व्यवस्था के तहत नियम तोड़ने वाले डिलीवरी एजेंटों को सड़क सुरक्षा, ट्रैफिक कानून, दुर्घटना से बचाव और जिम्मेदार ड्राइविंग से जुड़े विषयों पर चार घंटे की क्लास में शामिल होना होगा।
पुलिस का मानना है कि डिलीवरी एजेंटों के लिए चार घंटे काम से दूर रहना किसी भी जुर्माने से ज्यादा प्रभावी साबित होगा। इससे वे भविष्य में ट्रैफिक नियमों का पालन करने के लिए अधिक सतर्क रहेंगे।
डिलीवरी के दबाव में बढ़ रहे हैं उल्लंघन
पुलिस के अनुसार, ऑनलाइन फूड और ई-कॉमर्स कंपनियों की तय समय सीमा में डिलीवरी पूरी करने के दबाव के कारण कई डिलीवरी एजेंट ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करते हैं। समय बचाने के लिए वे रेड लाइट पार करना, गलत दिशा में चलना और तेज रफ्तार जैसी गलतियां करते हैं, जिससे सड़क हादसों का खतरा बढ़ जाता है।
यूलू बाइक भी बनी चिंता की वजह
अधिकारियों ने बताया कि कई डिलीवरी एजेंट किराये पर मिलने वाली यूलू (Yulu) इलेक्ट्रिक बाइक का इस्तेमाल करते हैं। इन वाहनों की गति कम होती है, लेकिन इनकी पहचान और चालान प्रक्रिया अपेक्षाकृत जटिल होने के कारण नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई आसान नहीं होती। इसी वजह से पुलिस ने जुर्माने की जगह जागरूकता आधारित कार्रवाई का विकल्प चुना है।
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