
Ayodhya Ram Mandir : राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी का मामले सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास को नोटिस जारी किया है। इसके अलावा एसआईटी से स्टेटस जांच रिपोर्ट तलब की गई है। कोर्ट ने जवाब फाइल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। अगले सोमवार को फिर से मामले की सुनवाई होगी। CJI की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच मामले की सुनवाई कर रही थी। इस मामले को लेकर कई याचिकाएं बेंच के सामने सूचीबद्ध की गई थीं। बता दें कि एसआईटी ने अपनी जांच में अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे की गिनती कक्ष में गंभीर लापरवाही की ओर इशारा किया था। इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। चंपत राय ने ट्रस्ट के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है।
कोर्ट में सुनवाई के दौरान वकील ने हा कि 123 साल के बाद एक और लड़ाई शुरू हो गई है। वकील ने कहा कि एसआईटी बना दी गई है और सबूतों को सुरक्षित रखा जाएगा। इसपर CJI सूर्यकांत ने कहा कि आप अपनी ऊर्जा बचाकर रखें। बाहर काम आएगी। कोर्ट ने तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और यूपी सरकार द्वारा बनाई गई एसआईटी से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।
चार याचिकाओं पर सुनवाई
हिंदू धर्मपरिषद में सुप्रीम कोर्ट में याचिका फाइल कर कोर्ट की ही निगरानी में चंदा चोरी की जांच करवाने की मांग की थी। सीजेआई सूर्यकांत की बेंच कुल चार याचिकाओँ पर सुनवाई कर रही थी। इसके अलावा दो अन्य याचिकाओं में सीबीआई जांच की मांग की गई है। एक याचिका में सीबीआई की विशेष टीम गठित कर जांच कराने की मांग की गई है। इसके अलावा यह भी कहा गया कि मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन की फरेंसिक ऑडिट कराई जाए।
याचिकाकर्ताओं की मांग है कि मामले की जांच पारदर्शी और निष्पक्ष हो। इन याचिकाओं वकील नरेंद्र कुमार गोस्वामी की रिट याचिका, आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह और अजय कुमार राय की श्री रामजन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट के खिलाफ याचिका भी शामिल है। सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया था। याचिकाकर्ताओं की मांग को देखते हुए जस्टिस सुंदरेश की अगुआई वाली बेंच ने कहा था कि छुट्टियों के बाद इसे लिस्ट किया जाएगा।
नरेंद्र गोस्वामी की क्या है मांग
वकील नरेंद्र गोस्वामी ने अपनी याचिका में कहा था कि राम मंदिर में दान से जुड़े दस्तावेजों और सबूतों का संरक्षिण किया जाए और इस जांच में पारदर्शिता लाई जाए। याचिका में कहा गया था कि कोई भी न्यास कानूनी इकाई के तरह देवता के लिए होती है और इसलिए यह संपत्ति भी देवता की ही है। इसके प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।
SIT पर उठाए गए सवाल
याचिकाओं में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की तरफ से गठित की गई एसआईटी को लेकर सवाल किए गए हैं। इमसें कहा गया था कि बिना एफआईआर के ही एसआईटी बना दी गई। मामले की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। बता दें कि राम मंदिर पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ही ट्रस्ट के गठन का आदेश दिया था। अब ट्रस्ट के महासचिव रहे चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा को ही इस मामले में दोषी बताया जा रहा है। हालांकि SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट में चंपत राय का नाम कहीं नहीं है।
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