सुप्रीम` फार्मूला न हिन्दुओं को रास आया, न मुस्लिमों को

Gyanvapi Case 

सुप्रीम` फार्मूला न हिन्दुओं को रास आया, न मुस्लिमों को

दोनों पक्ष कोर्ट में ही लड़ेंगे कानूनी लड़ाई

Gyanvapi Case  : अयोध्या में राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद के फैसले के बाद अब मथुरा और काशी के प्रमुख धर्मस्थलों से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। ज्ञानवापी मस्जिद, श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह और संभल मस्जिद विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को मध्यस्थता के जरिए समाधान निकालने का सुझाव दिया था। हालांकि, हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि इन मामलों का फैसला केवल न्यायिक प्रक्रिया के जरिए ही होना चाहिए और वे अदालत में कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सभी पक्षों से मध्यस्थता पर सहमति जाननी चाही थी, लेकिन दोनों पक्षों ने स्पष्ट कर दिया कि वे समझौते के बजाय अदालत के फैसले को ही अंतिम मानेंगे।

विवाद और दावे

ज्ञानवापी मस्जिद और काशी विश्वनाथ परिसर से जुड़ा विवाद देश के सबसे चर्चित धार्मिक मामलों में शामिल है। वाराणसी में स्थित इन दोनों स्थलों को लेकर हिंदू और मुस्लिम पक्षों के बीच लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा है। हिंदू पक्ष का दावा है कि मुगल शासक औरंगजेब के शासनकाल में मूल काशी विश्वनाथ मंदिर को ध्वस्त कर उसके स्थान पर ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण कराया गया था। वहीं, मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह मामला उपासना स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 के दायरे में आता है और मस्जिद में लंबे समय से नियमित रूप से नमाज अदा की जाती रही है।

साल 2021 में पांच हिंदू महिलाओं ने वाराणसी की अदालत में याचिका दायर कर ज्ञानवापी परिसर में नियमित पूजा-अर्चना की अनुमति मांगी थी। इसके बाद अदालत के आदेश पर हुए सर्वे के दौरान वज़ूखाने के भीतर एक संरचना मिलने का दावा किया गया, जिसे हिंदू पक्ष ‘शिवलिंग’ बताता है, जबकि मुस्लिम पक्ष का कहना है कि वह मस्जिद के फव्वारे का हिस्सा है। वर्ष 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने उस स्थान को संरक्षित रखने का आदेश दिया और यह भी सुनिश्चित किया कि मुस्लिम पक्ष की नमाज में कोई बाधा न आए। इसके बाद 2024 में शीर्ष अदालत ने वाराणसी जिला अदालत के उस आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसमें मस्जिद परिसर के ‘व्यासजी के तहखाना’ में हिंदू पक्ष को नियमित पूजा की अनुमति दी गई थी।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद मथुरा के कटरा केशव देव स्थित 13.37 एकड़ परिसर से जुड़ा है। इसी परिसर में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर और शाही ईदगाह मस्जिद स्थित हैं। हिंदू पक्ष का दावा है कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्मस्थान पर पहले भव्य मंदिर था, जिसे मुगल शासक औरंगजेब के शासनकाल में ध्वस्त कर उसके स्थान पर शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण कराया गया। इस आधार पर मंदिर स्थल की बहाली और भूमि पर अधिकार की मांग की जा रही है।

दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह विवाद उपासना स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 के दायरे में आता है और इसलिए इस पर नए दावे स्वीकार नहीं किए जा सकते। वर्तमान में हिंदू पक्ष की ओर से दायर 18 दीवानी मुकदमे इलाहाबाद हाई कोर्ट में लंबित हैं, जिनमें भूमि पर अधिकार और मंदिर की बहाली की मांग की गई है। 1 अगस्त 2024 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जिनमें इन मुकदमों की वैधता पर सवाल उठाए गए थे। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि प्रथम दृष्टया ये वाद न तो परिसीमा अधिनियम, न वक्फ अधिनियम और न ही उपासना स्थल अधिनियम, 1991 के कारण स्वतः प्रतिबंधित माने जा सकते हैं। इसके बाद से मामले की सुनवाई हाई कोर्ट में जारी है।

शाही जामा मस्जिद, संभल, उत्तर प्रदेश

संभल की शाही जामा मस्जिद से जुड़ा विवाद वर्ष 2024 में उस समय सुर्खियों में आया, जब एक स्थानीय अदालत ने हिंदू पक्ष की याचिका पर मस्जिद परिसर के सर्वेक्षण का आदेश दिया। याचिका में दावा किया गया था कि मौजूदा मस्जिद उस स्थान पर बनी है, जहां पहले भगवान कल्कि से संबंधित हरिहर मंदिर मौजूद था और मुगल शासक बाबर के शासनकाल में उसे ध्वस्त कर मस्जिद का निर्माण कराया गया।

सर्वेक्षण की कार्रवाई के दौरान क्षेत्र में तनाव बढ़ गया। दूसरे चरण के सर्वे के समय प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़प हुई, जिसमें कई लोग घायल हुए और चार लोगों की मौत हो गई। दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष ने सर्वेक्षण का विरोध करते हुए कहा कि मस्जिद समिति को पर्याप्त अवसर दिए बिना कार्रवाई कराई गई और यह उपासना स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 की भावना के विपरीत है। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मामले से संबंधित विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुनवाई के दौरान विवादित स्थल पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया, जबकि मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे जारी है।


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