सेना ने पुलिस कमिश्नरेट दफ्तर को घेरा, पुलिस और सेना आमने-सामने

ITBP protest Kanpur

कानपुर में ITBP जवानों ने लापरवाही का आरोप लगा पुलिस कमिश्नरेट में काटा बवाल

यूं तो पुलिस के फेल होने पर सेना के जवान मौका-ए-वारदात पर पहुंचते हैं और हालात को संभाल लेते हैं। लेकिन यहां मामला थोड़ा सा अलग है। सेना के जवानों ने हथियारबंद होकर कानपुर पुलिस कमिश्नरेट के दफ्तर को घेर लिया और जमकर बवाल काटा… क्या है मामला और क्यों उपजा यह आक्रोश… तफ्शील से तफ्तीश करती नया लुक संवाददाता ‘अंशिका यादव’ की रिपोर्ट…

ITBP protest Kanpur :  इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है, जब किसी पुलिस दफ्तर को सेना के जवानों ने घेरा हो। यानी एक बल ने दूसरे बल के दफ्तर को घेर लिया हो। खबर है कि भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के जवानों ने कानपुर पुलिस कमिश्नरेट परिसर के बाहर जबरदस्त प्रदर्शन किया। खबर लिखे जाने तक जवान वहां जमे हुए थे और स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई थी। यह मामला तब शुरू हुआ जब ITBP के एक जवान विकास सिंह की मां के साथ कथित तौर पर गम्भीर दुर्घटना हुई और इलाज में देरी हुई। वहीं प्रशासन के लोगों ने भी घोर लापरवाही का परिचय दिया।

बताया जा रहा है कि घायल महिला के इलाज में देरी और उचित सहायता न मिलने से जवानों में गहरा आक्रोश फैल गया। धीरे-धीरे यह गुस्सा संगठित रूप लेता गया और बड़ी संख्या में ITBP जवान पुलिस कमिश्नरेट पहुंच गए। मौके पर हथियारबंद कमांडो की मौजूदगी ने स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना दिया। प्रदर्शन के दौरान जवानों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब वर्दीधारी ही न्याय के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हो जाएं, तो आम नागरिक की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। इस घटना ने पूरे पुलिस प्रशासन में हलचल पैदा कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिशें जारी हैं और आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है।

क्या है मामला और क्यों पसरा आक्रोश

ITBP जवान विकास सिंह के अनुसार उसकी मां को 13 मई को सांस लेने में तकलीफ होने के बाद कानपुर स्थित जीटी रोड के कृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। परिवार का आरोप है कि इलाज के दौरान दिए गए एक इंजेक्शन के बाद मरीज की स्थिति अचानक बिगड़ गई और दाहिने हाथ में गंभीर संक्रमण फैल गया। स्थिति खराब होने पर परिजनों ने उन्हें दूसरे अस्पताल में शिफ्ट कराया। बाद में पारस अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि संक्रमण तेजी से शरीर में फैल रहा है, जिसे रोकने के लिए सर्जरी जरूरी है। इसी दौरान हाथ को लेकर गंभीर मेडिकल निर्णय लिया गया। परिवार का कहना है कि पूरी घटना के बाद से वे न्याय और उचित जांच की मांग कर रहे हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इलाज में कहीं कोई चूक हुई है या नहीं।

बकौल विकास, संक्रमण लगातार गंभीर होता गया, जिसके चलते 17 मई को डॉक्टरों को उनकी मां का दाहिना हाथ काटने का निर्णय लेना पड़ा। परिवार का कहना है कि यह पूरी स्थिति कथित मेडिकल लापरवाही के कारण पैदा हुई। हालांकि, अस्पताल प्रशासन या किसी आधिकारिक मेडिकल जांच रिपोर्ट की पुष्टि के बिना इन आरोपों को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।

FIR न दर्ज होने का आरोप

जवान का आरोप है कि वह लगातार कृष्णा हॉस्पिटल के डॉक्टरों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए रेल बाजार थाने के चक्कर लगाता रहा, लेकिन उसकी एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इसी से आहत होकर वह कथित सबूत के तौर पर अपनी मां का कटा हुआ हाथ एक मेडिकल किट (थर्माकोल बॉक्स) में रखकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गया। कमिश्नर ऑफिस में इस घटना को देखकर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी जैसा माहौल बन गया। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने तुरंत स्थिति को संभाला और पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए संज्ञान में लिया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को निर्देश जारी किए हैं कि पूरे प्रकरण की जांच के लिए एक विशेष मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाए। इस बोर्ड के माध्यम से यह विस्तार से जांच की जाएगी कि इलाज के दौरान किसी प्रकार की लापरवाही हुई थी या नहीं। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है। इसके आधार पर आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई तय की जाएगी, जिसमें संबंधित अस्पताल और डॉक्टरों की भूमिका भी शामिल हो सकती है।

CMO की अध्यक्षता में एक विशेष टीम करेगी मामले जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को निर्देश दिए हैं कि पूरे प्रकरण की जांच के लिए एक विशेष मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाए। इस जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि इलाज के दौरान किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही हुई थी या नहीं। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी, जिसमें संबंधित अस्पताल और डॉक्टरों की जिम्मेदारी भी स्पष्ट हो सकेगी।

यह मामला केवल एक परिवार की पीड़ा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, मरीजों की सुरक्षा और शिकायतों पर पुलिस की प्रतिक्रिया प्रणाली जैसे कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल सभी की नजरें मेडिकल बोर्ड की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं, जो इस पूरे प्रकरण की दिशा तय करेगी। सूत्रों के अनुसार, घटना के बाद प्रशासन ने तत्काल सक्रियता दिखाई और मामले की जांच तेज कर दी गई है। वरिष्ठ अधिकारियों ने संबंधित विभागों से रिपोर्ट तलब की है और कहा जा रहा है कि जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे लोगों में भी नाराजगी और बहस का माहौल बन गया है। फिलहाल कमिश्नरेट परिसर में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं।


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