नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अब दुनिया के सामने एक नया खतरा खड़ा होता दिख रहा है। तेल और LPG सप्लाई पर असर के बाद अब इंटरनेट सेवाओं को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के नीचे बिछी अंडरसी इंटरनेट केबल्स को लेकर बड़ा कदम उठा सकता है, जिससे वैश्विक इंटरनेट व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी संकट का असर पहले ही कई देशों की सप्लाई चेन पर पड़ चुका है। भारत समेत कई आयात-निर्भर देशों में पेट्रोल, डीजल और LPG की आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई है। इसी बीच अब इंटरनेट ट्रैफिक को लेकर भी नई आशंकाएं सामने आ रही हैं।
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इंटरनेट केबल्स को लेकर ईरान की चेतावनी
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने समुद्र के नीचे बिछी उन फाइबर-ऑप्टिक केबल्स को लेकर सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं, जिनके जरिए एशिया, यूरोप और खाड़ी देशों के बीच डेटा ट्रांसफर होता है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) से जुड़े प्रवक्ताओं की ओर से सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया कि इन केबल्स के इस्तेमाल पर “शुल्क” लगाया जा सकता है। बताया जा रहा है कि ईरान गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, मेटा और अमेजन जैसी बड़ी टेक कंपनियों से इन नेटवर्क रूट्स के इस्तेमाल के बदले भारी फीस वसूलने की योजना बना सकता है। साथ ही केबल्स की मरम्मत और रखरखाव का काम केवल ईरानी कंपनियों को दिए जाने की बात भी कही जा रही है।
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क्यों अहम हैं समुद्र के नीचे बिछे ये केबल नेटवर्क?
संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (ITU) के अनुसार, दुनिया का करीब 99 फीसदी अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट ट्रैफिक इन्हीं अंडरसी फाइबर-ऑप्टिक केबल्स के जरिए चलता है। खाड़ी देशों की डिजिटल अर्थव्यवस्था, क्लाउड सेवाएं, ऑनलाइन बैंकिंग और AI इंफ्रास्ट्रक्चर काफी हद तक इन्हीं नेटवर्क्स पर निर्भर हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इन केबल्स को नुकसान पहुंचता है या इंटरनेट ट्रैफिक बाधित होता है, तो दुनिया भर में इंटरनेट स्पीड प्रभावित हो सकती है। ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट और कई जरूरी सेवाएं ठप पड़ सकती हैं, जिससे अरबों डॉलर का आर्थिक नुकसान होने की आशंका है।
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क्या सैटेलाइट इंटरनेट बन सकता है विकल्प?
टेलीकॉम विशेषज्ञों के मुताबिक फिलहाल सबसी केबल्स का कोई पूर्ण विकल्प मौजूद नहीं है। स्टारलिंक जैसे सैटेलाइट नेटवर्क सीमित स्तर पर मदद जरूर कर सकते हैं, लेकिन भारी डेटा ट्रैफिक और करोड़ों यूजर्स का लोड संभालना अभी उनके लिए आसान नहीं माना जाता।
फिर बढ़ सकता है पश्चिम एशिया में तनाव
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं। इसी वजह से ऊर्जा संकट के साथ-साथ अब डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर भी वैश्विक स्तर पर चिंता गहराने लगी है।
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