रोहित शेखर तिवारी याद है न आप लोगों को..!

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राजीव तिवारी 

पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के पुत्र प्रतीक यादव की आज सुबह सुबह संदेहास्पद परिस्थितियों में मौत ने यूपी की राजनीति और मीडिया से जुडे लगभग हर किसी को स्तब्ध कर दिया। आम तौर पर विवादों से दूर रहने वाले प्रतीक पिछले कुछ समय से अपनी शादी को‌ लेकर चर्चा में थे। और इस चर्चा की शुरुआत भी उन्होंने ही की थी। प्रतीक की मौत पर कई सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।‌ ऐसे में अनायास ही मुझे रोहितशेखरतिवारी की याद आ गई। पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के पुत्र की हैसियत, रोहित ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ कर पाई थी। रोहित की मौत भी कुछ ऐसे ही संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी, जांच के बाद में जिसे हत्या पाया गया। प्रतीक के मामले में अभी ऐसा कुछ कहना जल्दबाजी होगी मगर संदेह और सवाल तो उठने शुरू हो गये हैं। इसलिए फिलहाल इंतजार करते हैं लेकिन दोनों व्यक्तियों के जीवन की परिस्थितियों और मौत की घटना की तुलना तो बनती है।

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प्रतीक यादव का निधन
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भारतीय राजनीति में प्रमुख परिवारों के युवा सदस्यों की अचानक और रहस्यमयी मौतें अक्सर सवाल खड़े करती हैं। आज 13 मई 2026 को मुलायम सिंह यादव के छोटे पुत्र प्रतीक यादव की 38 वर्ष की आयु में लखनऊ में अचानक मृत्यु हो गई, जबकि अप्रैल 2019 में नारायण दत्त तिवारी के पुत्र रोहित शेखर तिवारी (लगभग 40 वर्ष) की दिल्ली में मौत हुई थी। दोनों घटनाएं राजनीतिक परिवारों से जुड़ी हैं। दोनों के पिताजी अपने समय के महत्वपूर्ण राजनीतिक शख्सियत रहे। दोनों को उनके पिता का नाम काफी संघर्षपूर्ण तरीके से मिला। रोहित और उनकी मां को इसके लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी जबकि प्रतीक और उनकी मां को लंबे समय तक सामाजिक पारिवारिक उपेक्षा झेलने के बाद मान्यता मिली।

प्रतीक यादव मुलायम सिंह यादव और उनकी दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के पुत्र थे
प्रतीक यादव मुलायम सिंह यादव और उनकी दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के पुत्र थे

प्रतीक यादव मुलायम सिंह यादव और उनकी दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के पुत्र थे। अखिलेश यादव के सौतेले भाई प्रतीक सक्रिय राजनीति से दूर रहे। वे फिटनेस enthusiast थे, लखनऊ में जिम चलाते थे, रियल एस्टेट से जुड़े थे और जीव आश्रय नामक एनजीओ के माध्यम से पशु कल्याण कार्य करते थे। उनकी शादी 2011 में भाजपा नेता अपर्णा यादव से हुई थी, जिससे दो बेटियां हैं। हाल ही में जनवरी 2026 में वैवाहिक विवाद की खबर आई थी, जिसमें प्रतीक ने तलाक की इच्छा जताई थी, लेकिन बाद में मामला सुलझ गया था। रोहित शेखर तिवारी पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के पुत्र थे। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद पिता-पुत्र संबंध स्थापित हुआ था। रोहित भी राजनीति से ज्यादातर दूर रहे। उनकी शादी वकील अपूर्वा शुक्ला से हुई थी।

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दोनों ही प्रमुख उत्तर भारतीय राजनीतिक परिवारों के युवा बेटे थे, जिन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखी। प्रतीक यादव की सुबह अचानक तबीयत बिगड़ी। उन्हें लखनऊ के सिविल अस्पताल ले गए, जहां उन्हें ब्रॉट डेड घोषित कर दिया गया। डॉक्टरों के अनुसार पल्स पूरी तरह गिर चुकी थी और दिल रुक गया था। प्रतीक कुछ दिनों पहले (30 अप्रैल) भी स्वास्थ्य समस्या के चलते अस्पताल में भर्ती थे, जहां फेफड़ों की समस्या और ब्लड क्लॉटिंग का जिक्र था। वे घर लौट आए थे। पोस्टमॉर्टम KGMU में चल रहा है (या पूरा हो चुका है)। कुछ सूत्रों ने जहर की आशंका जताई, जबकि अन्य रिपोर्ट्स पुरानी फेफड़ों की बीमारी को कारण मान रही हैं। जांच जारी है, कोई स्पष्ट सबूत अभी नहीं। रोहित शेखर तिवारी 16 अप्रैल 2019 को दिल्ली के डिफेंस कॉलोनी स्थित घर में अचानक बीमार पड़े। उन्हें मैक्स अस्पताल ले जाया गया, जहां ब्रॉट डेड घोषित किया गया। शुरुआत में हार्ट अटैक बताया गया। लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में अस्फिक्सिया (दम घुटने) का खुलासा हुआ -स्ट्रैंगलिंग (गला दबाना) और स्मदरिंग (तकिए से मुंह दबाना) से मौत हुई। यह हत्या साबित हुई। पत्नी अपूर्वा शुक्ला पर आरोप लगा, उन्होंने कबूल भी किया कि वैवाहिक विवाद और संपत्ति के मुद्दे पर उन्होंने यह कदम उठाया।

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प्रतीक की मौत अभी चिकित्सकीय/रहस्यमय श्रेणी में है, जबकि रोहित की मौत स्पष्ट आपराधिक हत्या थी। दोनों 38-40 वर्ष की आयु में, घर पर अचानक बीमार पड़कर अस्पताल पहुंचे और ब्रॉट डेड घोषित। दोनों मामलों में पहले हार्ट संबंधी समस्या बताई गई। दोनों में वैवाहिक तनाव की खबरें थीं। प्रतीक-अपर्णा में हालिया सार्वजनिक विवाद, रोहित-अपूर्वा में गहरी नाराजगी। दोनों घटनाओं ने UP-दिल्ली की राजनीति में हलचल मचाई। क्रॉस-पार्टी शोक संदेश आए। इस तुलना का उद्देश्य रहस्य का वह तत्व है जो प्रतीक की मौत के शुरुआती घंटों में दिख रहा है। सच क्या है वह तो प्रतीक की मौत की विस्तृत जांच के बाद सामने आएगा। हार्दिक इच्छा तो है कि जांच में आशंकाएं सच न साबित हों। मगर जांच तो जरूरी है। ऐसे में एक पत्रकार और शुभचिंतक के नाते सलाह है कि परिजनों और शासन प्रशासन को भी चाहिए कि सीबीआई से विधिवत् जांच कराकर सभी के मन में घुमड़ रही आशंकाओं के मुकाबले सच को सामने लाएं।


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