
राजेन्द्र गुप्ता
हर महीने की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत होता है। यह दिन देवों के देव महादेव को समर्पित है। हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत अधिक महत्व है। मान्यता है कि जो लोग इस शुभ दिन पर व्रत रखते हैं उन्हें सुख और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही व्रत भी किया जाता है। मान्यता के अनुसार, ऐसा करने से साधक की लंबी आयु होती है और जीवन में खुशियों का आगमन होता है। हर महीने में 2 प्रदोष व्रत होते हैं।
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प्रदोष व्रत की पूजा विधि
प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ वस्त्र धारण करें। मंदिर की साफ-सफाई करने के बाद एक दीप प्रज्वलित करें। प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल यानी गोधूलि बेला में करने का विधान है। ऐसे में इस दौरान भगवान भोलेनाथ का गंगा जल से अभिषेक करें। अब महादेव को धतूरा, शमी के फूल और बिल्वपत्र समेत आदि चीजें अर्पित करें। अब आरती करें और शिव चालीसा का पाठ करें। इसके पश्चात भगवान को विशेष चीजों का भोग लगाएं। अंत में लोगों में प्रसाद का वितरण करें।
प्रदोष व्रत के दिन न करें ये काम
प्रदोष व्रत के दिन पूजा के दौरान भगवान शिव को सिन्दूर, हल्दी, तुलसी, केतकी और नारियल का जल भूलकर भी न चढ़ाएं। ऐसा करने से भोलेनाथ रुष्ट होते हैं। प्रदोष व्रत के दिन महिलाओं को शिवलिंग स्पर्श नहीं करना चाहिए। इससे देवी पार्वती के प्रकोप का सामना करना पड़ता है। इस दिन तामसिक भोजन जैसे – शराब , मांस, प्याज, लहसुन आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन किसी का भी अपमान करने से बचना चाहिए। प्रदोष व्रत के दिन देर तक नहीं सोना चाहिए। व्रतियों को अन्न, चावल और नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। प्रदोष व्रत के दिन काले वस्त्र पहनने से बचना चाहिए।
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