IAS Rinku Rahi: चिल्ल-पों मचाकर दिया इस्तीफा, चुपके से लिया वापस

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आशीष द्विवेदी

  • परिजनों ने मीडिया के सामने अपनी जाति का उल्लेख कर जताया था दुःख
  • इस्तीफा वापसी के सवाल पर शासन से लेकर रिंकू तक सभी चुप, कोई बोलने को तैयार नहीं

लखनऊ। जब इस्तीफा देना था तो मीडिया के सामने चिल्ल-पों मचाया। लेकिन अब जब इस्तीफा वापस लिए तो किसी को कानों-कान खबर नहीं लगी। न उनके परिजन कैमरे के सामने आए और न रिंकू स्वयं कुछ कहे। उन्होंने धीरे से इस्तीफा वापस लिया और काम पाने की आस में चुपचाप घर में बैठ गए। मामला उत्तर प्रदेश कैडर के साल 2023 बैच के IAS अधिकारी Rinku Singh Rahi का है। उन्होंने कुछ दिनों पहले राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा भेज दिया था। उन्होंने सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा सवाल भी खड़ा किया था। उन्होंने दो टूक लहजे में प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया था कि उन्हें प्रभावी ढंग से काम करने का अवसर नहीं दिया जा रहा है और संवैधानिक व्यवस्था के समानांतर एक ‘अलग सिस्टम’ संचालित हो रहा है। तब रिंकू उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद से अटैच थे।

Rinku Singh Rahi
Rinku Singh Rahi

गौरतलब है कि रिंकू सिंह राही ने 26 मार्च को राष्ट्रपति को अपना तकनीकी इस्तीफा भेजा था। इस पत्र की प्रतिलिपि उन्होंने राज्य के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों यानी मुख्य सचिव, राजस्व परिषद के अध्यक्ष और प्रमुख सचिव (नियुक्ति एवं कार्मिक) को भी भेजी थी। अब जब उन्होंने इस्तीफा वापस ले लिया है तो प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम को बेहद गोपनीय रखा है। शासन स्तर पर कोई भी अधिकारी इस मामले में आधिकारिक तौर पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। रिंकू राही ने केवल इतना कहा है कि मामला ‘हाईकमान’ के पास विचाराधीन है, फिलहाल अभी इस पर टिप्पणी नहीं कर सकता।

बताते चलें कि 30 मार्च को उनका इस्तीफा पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था, जिसके बाद उन्होंने स्वयं मीडिया के सामने आकर अपने निर्णय की पुष्टि की थी। इस खुलासे के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई थी। हालांकि अब सूत्रों का कहना है कि उन्होंने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया को इतनी गोपनीयता के साथ अंजाम दिया गया कि इसकी भनक तक नहीं लगी। नियुक्ति विभाग के अधिकारी भी इस पर चुप्पी साधे हुए हैं।

IAS Rahul Bhatnagar
IAS Rahul Bhatnagar

 

उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मुख्य सचिव साल 1984 बैच के आईएएस राहुल भटनागर कहते हैं कि ट्रांसफर-पोस्टिंग सिस्टम का हिस्सा है। भाषा विभाग में भी किसी न किसी अफसर की पोस्टिंग होती है। अब ये कहकर कि यहां काम नहीं है आप नौकरी से कैसे इस्तीफा दे सकते हैं। हां, शाहजहांपुर में वकीलों द्वारा किए अपमान और उसके बाद राजस्व परिषद में सम्बद्धता से वो जरूर टूटे होंगे। लेकिन इस्तीफा वापस लेकर उन्होंने ठीक किया। आज काम नहीं है, कब ऐसे विभाग में होंगे, जहां 24 घंटे सेवाएं देनी पड़ सकती हैं। सरकार में संजय प्रसाद जैसे अफसर इसकी मिसाल हैं। रिंकू ईमानदार अफसर हैं, पूरे प्रदेश को उनसे निश्चित लाभ मिलेगा।

 

विवादों से रहा है पुराना नाता

रिंकू सिंह राही इससे पहले भी विवादों और चर्चाओं में रह चुके हैं। जुलाई 2025 में शाहजहांपुर की पुवायां तहसील में संयुक्त मजिस्ट्रेट (एसडीएम) के पद पर तैनाती के दौरान वकीलों के विरोध से जुड़ा एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वह कान पकड़कर उठक-बैठक करते हुए नजर आए थे। यह सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था। तब निरीक्षण के दौरान उन्होंने कचहरी परिसर में गंदगी फैलाते हुए एक मुंशी को देखा था, जिसके खिलाफ कार्रवाई करने पर वकीलों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। हालात को शांत करने के लिए रिंकू स्वयं वकीलों के बीच पहुंचे, माफी मांगी और सार्वजनिक रूप से उठक-बैठक कर यह संदेश देने की कोशिश की कि नियम सभी पर समान रूप से लागू होते हैं। इस घटना के बाद राज्य सरकार ने उन्हें राजस्व परिषद से संबद्ध कर दिया था।

गौरतलब है कि उनकी पहचान एक सख्त और ईमानदार अधिकारी के रूप में भी रही है। वर्ष 2009 में मुजफ्फरनगर में समाज कल्याण अधिकारी के रूप में तैनाती के दौरान उन्होंने विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपये के घोटाले का खुलासा किया था। इस कार्रवाई से नाराज तत्वों ने उन पर जानलेवा हमला किया था, जिसमें उन्हें सात गोलियां लगी थीं। पांच पेट में और एक सिर में। गम्भीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने लम्बा इलाज कराया और बाद में फिर से अपनी सेवा में लौटे।

रिंकू राही का प्रशासनिक सफर भी उल्लेखनीय रहा है। मूल रूप से अलीगढ़ के निवासी रिंकू सिंह ने साल 2004 में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UP PCS) परीक्षा उत्तीर्ण कर जिला समाज कल्याण अधिकारी के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। नौकरी के साथ-साथ उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी जारी रखी और साल 2023 में संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास कर IAS जैसे बड़े पद पर सुशोभित हुए। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उन्हें वर्ष 2025 में शाहजहांपुर में एसडीएम के पद पर तैनात किया गया था।

Avinash Shukla
Avinash Shukla

 

वरिष्ठ पत्रकार अविनाश शुक्ला कहते हैं कि सरकार में सभी अफसरों को काम करने का अवसर मिल रहा है। अब कौन सा विभाग आपके मुताबिक है और कौन सा नहीं। यह पूछकर सरकार पोस्टिंग देने लगे तो इसी में दर्जनों अफसरों को जुटना पड़ेगा। राजस्व परिषद से ही पूरे सूबे की राजस्व टीम संचालित होती है, आपको काम खुद खोजना पड़ेगा।

 

 


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