नई दिल्ली : PM MODI ने देशभर के एक करोड़ से अधिक लोक सेवकों को एक महत्वपूर्ण पत्र लिखकर प्रशासनिक व्यवस्था में सेवा भावना को और मजबूत करने का संदेश दिया है। इस पत्र में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि “नागरिक देवो भव” यानी नागरिक ही सर्वोपरि हैं, और यही सिद्धांत हर सरकारी निर्णय का आधार होना चाहिए। PM ने अपने संदेश में लोक सेवकों को “कर्मयोगी” के रूप में संबोधित किया और कहा कि आज के समय में प्रशासन की भूमिका केवल नियमों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य जनता के जीवन को बेहतर बनाना होना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि शासन व्यवस्था में करुणा और संवेदनशीलता का होना अत्यंत आवश्यक है।
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यह पत्र सिविल सेवा दिवस से एक दिन पहले जारी किया गया और इसे 12 भाषाओं में प्रकाशित किया गया, जिसमें हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, तेलुगु, बांग्ला, गुजराती और अन्य प्रमुख भारतीय भाषाएँ शामिल हैं। इससे यह संदेश पूरे देश के प्रशासनिक ढांचे तक पहुंच सके। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि 21वीं सदी चुनौतियों और अवसरों दोनों से भरी हुई है। तेजी से बदलती तकनीक और नवाचारों के दौर में सरकारी तंत्र को भी खुद को लगातार अपडेट रखना होगा। उन्होंने iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म का उल्लेख करते हुए कहा कि लोक सेवकों को आजीवन सीखने की आदत विकसित करनी चाहिए।
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अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने विभिन्न भारतीय त्योहारों जैसे बैसाखी, बिहू, विशु और पोइला बोइशाख का भी उल्लेख किया और इसे नए उत्साह और शुरुआत का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में “साधना सप्ताह” जैसे कार्यक्रम प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक सकारात्मक कदम हैं। इस पत्र का मुख्य उद्देश्य प्रशासन में जनता-केंद्रित सोच को बढ़ावा देना और लोक सेवकों को अधिक जिम्मेदार, संवेदनशील और नवाचार के लिए प्रेरित करना है। प्रधानमंत्री का यह संदेश आने वाले समय में शासन प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
