नया लुक डेस्क
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच इजरायल की सेना को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। इजरायल डिफेंस फोर्सेज के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल एयाल जमीर ने चेतावनी दी है कि बढ़ते युद्ध दबाव और सैनिकों की भारी कमी के चलते सेना “अंदर से कमजोर होकर टूट सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जनरल जमीर ने सुरक्षा कैबिनेट की बैठक में मंत्रियों के सामने 10 बड़े खतरों का जिक्र करते हुए कहा कि सेना की मौजूदा स्थिति बेहद चिंताजनक है और तत्काल कानूनी कदम उठाने की जरूरत है।
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“सामान्य कामकाज भी हो सकता है प्रभावित”
IDF प्रमुख ने साफ कहा कि भर्ती कानून, रिजर्व ड्यूटी कानून और अनिवार्य सैन्य सेवा की अवधि बढ़ाने जैसे फैसले जल्द लेने होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ये कदम नहीं उठाए गए, तो सेना का सामान्य कामकाज भी प्रभावित हो सकता है और रिजर्व सिस्टम पूरी तरह टूट सकता है। जनरल जमीर पहले भी इस मुद्दे को उठा चुके हैं। उन्होंने जनवरी में बेंजामिन नेतन्याहू को पत्र लिखकर सैनिकों की कमी को लेकर आगाह किया था। गाजा में युद्ध शुरू होने के बाद हालात और गंभीर हो गए हैं। अक्टूबर 2023 के हमलों के बाद से सेना लगातार दबाव में है और करीब 12,000 सैनिकों की कमी बताई जा रही है।
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छूट बना रही है संकट को गहरा
इस संकट को और जटिल बना रहा है अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स समुदाय को मिली सैन्य सेवा से छूट। 2024 में इजरायल हाई कोर्ट ने इस छूट को कानूनी आधारहीन बताया था, लेकिन इसके बावजूद इसे जारी रखने की कोशिशें हो रही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, 18 से 24 वर्ष के लगभग 80,000 अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स युवा सैन्य सेवा के योग्य हैं, लेकिन अब तक उन्होंने सेना में भर्ती नहीं ली है।
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बढ़ते संकट के संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि IDF प्रमुख की यह चेतावनी केवल एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं, बल्कि इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा है। लगातार युद्ध और सीमित संसाधनों के बीच सेना पर बढ़ता दबाव आने वाले समय में गंभीर परिणाम ला सकता है।
