घरेलू शेयर बाजार में बुधवार को भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई। कारोबारी सत्र के अंत में BSE Sensex 1,342 अंकों से अधिक टूटकर 76,863 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं Nifty 50 भी करीब 395 अंकों की गिरावट के साथ 23,866 के आसपास बंद हुआ। बाजार में कमजोरी का असर लगभग सभी सेक्टरों में देखने को मिला और बड़ी संख्या में शेयर लाल निशान में बंद हुए।
बाजार में आई इस तेज गिरावट के पीछे कई अहम कारण बताए जा रहे हैं। सबसे प्रमुख कारण विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली को माना जा रहा है। हाल के दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारतीय शेयर बाजार से बड़ी मात्रा में निवेश निकालना शुरू किया है। जब विदेशी निवेशक बड़े पैमाने पर शेयर बेचते हैं तो बाजार पर दबाव बढ़ जाता है और सूचकांक नीचे आने लगते हैं।
हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने कुछ हद तक खरीदारी जरूर की, लेकिन विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर ज्यादा भारी पड़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर बनी अनिश्चितता के कारण विदेशी निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं।
दूसरा बड़ा कारण मुनाफावसूली को माना जा रहा है। पिछले कुछ समय से बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिली थी और कई शेयरों ने ऊंचे स्तर छू लिए थे। ऐसे में कई निवेशकों ने अपने मुनाफे को सुरक्षित करने के लिए शेयर बेचने शुरू कर दिए। इसका सीधा असर बाजार पर पड़ा और कई बड़े शेयरों में गिरावट देखने को मिली।
ऑटो, बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के शेयरों में खास तौर पर दबाव रहा। इन सेक्टरों की बड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट से सूचकांकों पर और अधिक असर पड़ा।
तीसरा कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव माना जा रहा है। खासकर Iran, Israel और United States के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। निवेशकों को डर है कि यदि यह स्थिति लंबी चली तो इसका असर तेल की कीमतों, महंगाई और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में शेयर बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक घटनाक्रम और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी। अगर अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य होते हैं और विदेशी निवेशक दोबारा खरीदारी शुरू करते हैं, तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है।
