डेरा सच्चा सौदा गुरमीत राम रहीम सिंह प्रमुख से जुड़ा एक बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने पत्रकार हत्या मामले में राम रहीम को बड़ी राहत देते हुए उन्हें बरी कर दिया है। यह मामला लगभग दो दशक पुराना था और लंबे समय से अदालत में सुनवाई चल रही थी। दरअसल यह मामला वर्ष 2002 में हुई पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या से जुड़ा है। रामचंद्र छत्रपति सिरसा से प्रकाशित होने वाले अखबार पूरा सच के संपादक थे। अक्टूबर 2002 में उनके घर के बाहर अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी। इस मामले में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह पर साजिश रचने का आरोप लगाया गया था। इस मामले की जांच बाद में केंद्रीय एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई थी। जांच के बाद सीबीआई की विशेष अदालत ने 2019 में गुरमीत राम रहीम और तीन अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया था और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी।]
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हालांकि इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। अब सात साल से अधिक समय बाद पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए राम रहीम को इस मामले में बरी कर दिया है। राम रहीम के वकील जितेंद्र खुराना के अनुसार, अदालत ने उपलब्ध सबूतों और गवाहियों का पुनः मूल्यांकन करने के बाद यह निर्णय सुनाया। यह मामला उस समय सुर्खियों में आया था जब पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के अखबार में एक गुमनाम पत्र प्रकाशित हुआ था। इस पत्र में डेरा मुख्यालय में महिला अनुयायियों के कथित यौन शोषण का आरोप लगाया गया था। इसके बाद पत्रकार की हत्या ने पूरे देश में चर्चा पैदा कर दी थी।
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हालांकि इस मामले में राहत मिलने के बावजूद गुरमीत राम रहीम अभी भी जेल में ही हैं। उन्हें 2017 में अपनी दो शिष्याओं से दुष्कर्म के मामले में 20 साल की सजा सुनाई जा चुकी है। फिलहाल वे हरियाणा के रोहतक स्थित सुनारिया जेल में सजा काट रहे हैं। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है और कानूनी हलकों में इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
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