- सबसे क्रूर काल होता है: कौशिक चैतन्य
लखनऊ। कथा व्यास स्वामी कौशिक चैतन्य जी महाराज ने कहा कि काल किसी का सगा नहीं होता है। यह समय चलायमान है। इस नदी रूप जग में हम अपनों संग बहते हैं, किन्तु पीछे से काल की थपेड़ यकायक आती है और हम सब बिलग हो जाते हैं। श्रीमद भागवत कथा के पांचवे दिन ब्रह्मचारी कौशिक चैतन्य जी महाराज ने कहा कि कर्म पर जितना ध्यान देने की जरूरत है। उससे कहीं ज्यादा कर्म फल पर ध्यान देने की आवश्यकता है। प्राणी को कोई भी कर्म करने से पहले उसके परिणाम पर विचार करना चाहिए। सबके जीवन में कोई न कोई समय आता है,
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जब वह बहुत कुछ कर सकता है। हर व्यक्ति को समय के इस सुयोग को उपलब्धियों में परिवर्तित करना चाहिए। कथा के दौरान दिव्य गोवर्धन पूजा हुई। भक्तों ने गिरिराज भगवान की भव्य आरती उतारी। इस भागवत कथा की यजमान पुष्पा दीक्षित हैं। जबकि कथा की व्यवस्था में तृप्ति तिवारी, वरद तिवारी, तनय तिवारी, स्तुति तिवारी, नमन तिवारी, नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान, धनंजय पांडे गीता पांडे जुटे मौजूद रहे।
