आशुतोष मिश्रा
संत कबीर नगर जिले में प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर एक मामला चर्चा का विषय बन गया है, जहां लेखपाल के खिलाफ शिकायत करना ही शिकायतकर्ता के लिए मुसीबत बन गया। मामला संत कबीर नगर के महुली थाना क्षेत्र के नाथनगर का है। यहां निवासी आरिफ मोहम्मद पुत्र बिस्मिल्लाह ने 16 फरवरी को जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया था कि भिटनी दुधारी उर्फ नाथनगर के तत्कालीन लेखपाल ने कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर गांव के 11 लोगों को कीमती सरकारी जमीन का पट्टा कर दिया। शिकायतकर्ता ने मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की थी।
जिलाधिकारी द्वारा प्रकरण की जांच के लिए उप जिलाधिकारी धनघटा को निर्देशित किया गया। बताया जाता है कि 21 फरवरी को आरिफ मोहम्मद संपूर्ण समाधान दिवस में अपनी शिकायत पर हुई कार्रवाई की जानकारी लेने पहुंचे थे। आरोप है कि इसी दौरान उप जिलाधिकारी डॉ. सुनील कुमार नाराज हो गए और शिकायतकर्ता को महुली पुलिस के हवाले करते हुए धारा 151 के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दे दिए।
पुलिस ने आरिफ मोहम्मद को SDM कोर्ट में पेश किया, जहां देर रात करीब 9 बजे उनकी जमानत निरस्त कर उन्हें जेल भेज दिया गया। इस घटना के बाद प्रशासनिक कार्यप्रणाली और अधिकारियों के रवैये को लेकर सवाल उठने लगे हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि वर्ष 2024 में सरकारी भूमि के कई गाटा नंबरों की लगभग 10 बिस्वा जमीन अपात्र लोगों को आवासीय पट्टे पर दे दी गई थी। इस संबंध में ग्राम पंचायत सदस्यों और अन्य ग्रामीणों द्वारा शपथ पत्र सहित साक्ष्य भी अधिकारियों को सौंपे गए थे, लेकिन कार्रवाई के बजाय शिकायतकर्ता पर ही कार्रवाई कर दी गई। अब स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यदि शिकायत करने वालों पर ही कार्रवाई होगी, तो आम नागरिक को न्याय कैसे मिल पाएगा।
