फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा: 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बंद हो, भारत भी कदम उठाए।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने India AI Summit 2026 के मंच से बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि फ्रांस में 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर सख्त प्रतिबंध लागू किया गया है और उम्मीद जताई कि भारत भी इसी दिशा में कदम बढ़ाएगा। उन्होंने सीधे तौर पर नरेंद्र मोदी से अपील की कि बच्चों और किशोरों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ऐसे कदमों पर विचार किया जाए। मैक्रों ने अपने संबोधन में कहा कि डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा केवल कानून का विषय नहीं, बल्कि सभ्य समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया का अनियंत्रित उपयोग कम उम्र के बच्चों के मानसिक और सामाजिक विकास पर असर डाल सकता है। इसलिए फ्रांस ने नीतिगत स्तर पर निर्णय लेते हुए 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की पहुंच सीमित कर दी है।

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अपने भाषण में मैक्रों ने भारत की डिजिटल क्रांति की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने जिस तेजी से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया है, वह दुनिया के लिए उदाहरण है। उन्होंने उल्लेख किया कि आज भारत में करोड़ों लोगों के पास डिजिटल पहचान है और मोबाइल आधारित भुगतान प्रणाली ने आम नागरिक के जीवन को आसान बनाया है। मैक्रों के अनुसार, यह परिवर्तन दर्शाता है कि तकनीक का सही उपयोग समाज को सशक्त बना सकता है।

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उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने स्वास्थ्य और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में डिजिटल साधनों के जरिए व्यापक पहुंच सुनिश्चित की है। उनका मानना है कि जब कोई देश 1.4 अरब लोगों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ सकता है, तो वह बच्चों की सुरक्षा के लिए भी मजबूत डिजिटल नियम लागू कर सकता है। मैक्रों ने वैश्विक स्तर पर डिजिटल टूल्स के उपयोग को लेकर भी विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में जब वैश्विक तनाव बढ़ रहे हैं, तब तकनीक का उपयोग विभाजन के बजाय सहयोग के लिए होना चाहिए। उन्होंने अफ्रीकी देशों के साथ तकनीकी साझेदारी की बात भी कही और सुझाव दिया कि डिजिटल मॉडल ऐसा होना चाहिए जो डेटा सुरक्षा और नागरिक अधिकारों का सम्मान करे।

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उन्होंने यह भी केत दिया कि फ्रांस अपने अंतरराष्ट्रीय मंचों, विशेषकर जी7 की अध्यक्षता के दौरान, डिजिटल जिम्मेदारी और बच्चों की सुरक्षा जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देगा। साथ ही उम्मीद जताई कि भारत भी अपने वैश्विक मंचों पर इस विषय को आगे बढ़ाएगा। मैक्रों के इस बयान के बाद सोशल मीडिया रेगुलेशन और बाल सुरक्षा पर नई बहस शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल स्वतंत्रता और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन बच्चों के हित सर्वोपरि होने चाहिए।

 

 

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