बरसाने की लट्ठमार होली 2026: ब्रजभूमि की होली का जिक्र होते ही रंग, गुलाल और राधा-कृष्ण की लीलाओं की छवि मन में उभर आती है। मथुरा और वृंदावन की होली दुनियाभर में प्रसिद्ध है, लेकिन सबसे खास पहचान बरसाने और नंदगांव की लट्ठमार होली को मिली है। हर साल हजारों श्रद्धालु और पर्यटक इस अनोखी परंपरा को देखने पहुंचते हैं।
साल 2026 में बरसाना की लट्ठमार होली शुक्रवार, 27 फरवरी को मनाई जाएगी। यह तिथि फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी को पड़ रही है। परंपरा के अनुसार, इस दिन बरसाना में नंदगांव के गोप आते हैं और यहां की महिलाएं, जिन्हें हुरियारिन कहा जाता है, लट्ठ से उनका स्वागत करती हैं। यह आयोजन राधा रानी की नगरी में प्रेम और परंपरा का प्रतीक माना जाता है।
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उत्सव की शुरुआत सुबह मंदिरों की मंगला आरती से होती है। स्थानीय मंदिर प्रातः लगभग 5:00 से 5:30 बजे के बीच खुल जाते हैं। भक्त पहले दर्शन और पूजा में शामिल होते हैं, उसके बाद रंगों और लट्ठमार की रस्में शुरू होती हैं। मुख्य कार्यक्रम आमतौर पर सुबह 9:30 से 11:00 बजे के बीच आरंभ होता है और दोपहर तक चलता है। सुबह 10:30 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक भीड़ अपने चरम पर रहती है। इस दौरान ढोल-नगाड़ों की गूंज, पारंपरिक गीत और रंगों की बारिश से पूरा वातावरण सराबोर हो जाता है। सुरक्षा व्यवस्था के तहत दर्शकों को दूरी बनाकर कार्यक्रम देखने की सलाह दी जाती है। फोटोग्राफी की अनुमति होती है, लेकिन निर्धारित क्षेत्र से ही।
अगर आप लट्ठमार होली देखने की योजना बना रहे हैं, तो समय से पहले पहुंचना बेहतर रहेगा ताकि बैठने की अच्छी जगह मिल सके। ब्रज की यह परंपरा सिर्फ रंगों का खेल नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और लोक संस्कृति का जीवंत उत्सव है।
