आत्महत्या मामले में फतेहगढ़ सेंट्रल जेल अधीक्षक पर होगी कार्रवाई!

आईजी
  • कारागार विभाग में आत्महत्याओं पर हो रही पक्षपातपूर्ण कार्यवाही
  • मऊ जिला जेल में घटना होने पर अधीक्षक को मुख्यालय से किया गया था संबद्ध
  • सुल्तानपुर, गोंडा, उरई जेलों में आत्महत्या की घटनाओं पर नहीं हुई कोई कार्यवाही

नया लुक संवाददाता

लखनऊ। कारागार विभाग में पक्षपातपूर्ण कार्यवाही होने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक जेल में फांसी लगाकर आत्महत्या के मामले में अधीक्षक को जेल से हटाकर मुख्यालय से संबद्ध कर दिया जाता है। वहीं दूसरी ओर जेल में आत्महत्या के मामले में वरिष्ठ अधीक्षक पर कार्यवाही करने के बजाए उसे अभयदान दे दिया जाता है। इसको लेकर विभागीय अधिकारियों में तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे है। चर्चा है कि इस विभाग में सेटिंग गेटिंग रखने वाले अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं होती है। विभाग में समरथ को नहीं दोष गोसाईं वाली कहावत एकदम फिट बैठती है। विभाग के आला अफसर इस मसले पर कुछ भी बोलने से बचते नजर आ रहे हैं।

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विभागीय जानकारों से मिली जानकारी के मुताबिक अभी हाल ही में केंद्रीय कारागार फतेहगढ़ में कैदी प्रभात कुमार ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इसकी भनक लगते ही जेल प्रशासन के अधिकारियों और कर्मियों में हड़कंप मच गया। इसी प्रकार उरई जेल में भी एक विचाराधीन बंदी ने सुरक्षाकर्मियों को चकमा देकर फांसी लगा ली। इसके अलावा सुल्तानपुर और गोंडा जेल में भी आत्महत्या की घटनाएं हुई। इन आत्महत्या की घटनाओं में शासन और कारागार मुख्यालय में बैठे आला अफसरों ने फतेहगढ़ सेंट्रल जेल के वरिष्ठ अधीक्षक आशीष तिवारी, गोंडा अधीक्षक मृत्युंजय पांडे और सुल्तानपुर जेल अधीक्षक प्रांजल पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है।

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सूत्र बताते हैं कि इससे पूर्व मऊ जिला जेल में एक विचाराधीन बंदी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। मुख्यालय के अधिकारियों ने इस आत्महत्या की घटना को गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच दूसरे परिक्षेत्र के डीआईजी से कराई। डीआईजी की जांच रिपोर्ट आने के बाद हरकत में आए कारागार मुखिया ने मऊ जेल अधीक्षक आनंद शुक्ला को जेल से हटाकर कारागार मुख्यालय से संबद्ध कर दिया। इससे पूर्व समयपूर्व रिहाई का एक गलत प्रस्ताव भेजने पर कानपुर देहात जेल के अधीक्षक राजेंद्र कुमार को निलंबित कर दिया गया जबकि समयपूर्व रिहाई के दो गलत प्रस्ताव भेजने वाले फतेहगढ़ सेंट्रल जेल के तत्कालीन वरिष्ठ अधीक्षक पीएन पांडेय को बचा लिया गया। शासन और कारागार मुख्यालय की पक्षपातपूर्ण कार्रवाई के यह मामले विभागीय अधिकारियों और कर्मियों में चर्चा का विषय बने हुए है। उधर इस संबंध में जब प्रमुख सचिव कारागार अनिल गर्ग से बात करने का प्रयास किया गया तो निजी सचिव ने व्यस्त होने की बात कहकर बात कराने से मना कर दिया।

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अब जेल में बंदियों नहीं मिलेंगे अंगौछे!

प्रदेश की जेलों में फरारी और लगातार हो रही आत्महत्याओं की घटनाओं पर अंकुश लगाने और सुरक्षा व्यवस्था को चाक चौबंद रखने के लिए मातहत अधिकारियोंके साथ बैठक की। इस बैठक मातहत अधिकारियों के सुझाव पर बंदियों के अंगौछे जेल के बाहर निकालने और डोरी वाले जूतों पर निगरानी रखने का निर्देश दिया। यह अलग बात है कि इस निर्देश से जेल अधिकारियों में अफरा तफरी मची हुई है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो यह आदेश व्यावहारिक नहीं है। इस पर अमल कर पाना आसान नहीं होगा। उधर किसान बेल्ट की एक जेल के अधीक्षक ने तो दावा किया है कि उन्होंने अपनी जेल से सभी अंगछों को बाहर निकलवा कर नष्ट कर दिया है। पूर्व में तैनात रहे अधिकारियों का दावा है कि इसकी जांच कराई जाए तो दूध का दूध पानी सामने आ जाएगा।

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