बांग्लादेश में जमात की शर्मनाक हार, तारिक रहमान की प्रचंड जीत: भारत के लिए खुशखबरी

बांग्लादेश में हुए 13वें संसदीय चुनावों के नतीजों ने दक्षिण एशिया की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। इस चुनाव में Bangladesh Nationalist Party (BNP) ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जबकि Jamaat-e-Islami को करारी हार का सामना करना पड़ा। BNP के नेता तारिक रहमान अब देश के अगले प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। यह बदलाव सिर्फ बांग्लादेश की सत्ता परिवर्तन की कहानी नहीं है, बल्कि भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिए भी एक अहम मोड़ माना जा रहा है। भारत के प्रधानमंत्री PM मोदी ने रहमान को जीत की बधाई देकर संकेत दिया है कि नई सरकार के साथ सहयोग का रास्ता खुला है। भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका था कि वह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों का समर्थन करता है। ऐसे में BNP की जीत को भारत एक लोकतांत्रिक जनादेश के रूप में देख रहा है।

नया लुक के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

ये भी पढ़े

आज का राशिफल: जानिए कैसा रहेगा आपका दिन

भारत की सबसे बड़ी चिंता जमात-ए-इस्लामी की संभावित सत्ता वापसी को लेकर थी। इस संगठन को अक्सर कट्टरपंथी विचारधारा और पाकिस्तान से निकटता के कारण संदेह की नजर से देखा जाता रहा है। यदि जमात सत्ता में आती, तो भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव बढ़ने की आशंका थी। इसलिए जमात की हार को नई दिल्ली में राहत की सांस के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि ऐतिहासिक रूप से BNP और भारत के संबंध हमेशा सहज नहीं रहे हैं, फिर भी मौजूदा परिस्थितियों में भारत इसे एक व्यावहारिक विकल्प के तौर पर देख रहा है। बांग्लादेश इस समय आंतरिक अस्थिरता, आर्थिक दबाव और सामाजिक तनाव से गुजर रहा है। ऐसे में नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती स्थिरता बहाल करने और अंतरराष्ट्रीय संतुलन बनाए रखने की होगी।

ये भी पढ़े

मौलाना शमशुल हुदा के ठिकानों पर ED की रेड, कई पहचान पत्र और धार्मिक साहित्य बरामद

भारत के लिए यह चुनाव किसी जश्न का अवसर नहीं, बल्कि एक “लिटमस टेस्ट” की तरह है। सुरक्षा सहयोग, सीमा प्रबंधन, व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर दोनों देशों को व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना होगा। यदि रहमान की सरकार चीन या पाकिस्तान की ओर अधिक झुकाव दिखाती है, तो भारत की चिंताएं बढ़ सकती हैं। लेकिन यदि संतुलित विदेश नीति अपनाई जाती है, तो द्विपक्षीय संबंधों में नई ऊर्जा आ सकती है। बांग्लादेश के हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा भी एक संवेदनशील मुद्दा है। हाल के महीनों में हिंसा की घटनाओं ने चिंता बढ़ाई थी। BNP द्वारा इन घटनाओं की आलोचना करना एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इससे अल्पसंख्यकों के बीच उम्मीद जगी है कि नई सरकार उनके अधिकारों की रक्षा करेगी। कुल मिलाकर, बांग्लादेश की राजनीति में आया यह परिवर्तन दक्षिण एशिया की सामरिक तस्वीर को प्रभावित कर सकता है। भारत फिलहाल सतर्क आशावाद की नीति पर चल रहा है। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि यह बदलाव दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा देता है या नहीं।

ये भी पढ़े

मौलाना शमशुल हुदा के ठिकानों पर ED की रेड, कई पहचान पत्र और धार्मिक साहित्य बरामद

 

 

 

Business International

महंगाई मापने का नया फॉर्मूला, डिजिटल खर्च भी आए दायरे में

देश में खुदरा महंगाई दर (CPI) की गणना के तरीके में व्यापक बदलाव लागू कर दिया गया है। नई सीरीज में आधार वर्ष 2012 की जगह अब 2024 कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों की तुलना 2024 को संदर्भ वर्ष मानकर की जाएगी। यह संशोधन केवल आधार […]

Read More
Foods Health homeslider

मीठा खाने की इच्छा हो तो बनाएं पहाड़ी ‘शैय्या’, स्वाद और सेहत का बेहतरीन संगम

अगर आपको भी खाना खाने के बाद कुछ मीठा खाने की आदत है, तो पहाड़ी पारंपरिक मिठाई ‘शैय्या’ आपकी क्रेविंग को तुरंत शांत कर सकती है। यह डिश स्वाद में लाजवाब होने के साथ-साथ पोषक तत्वों से भरपूर भी होती है। खास बात यह है कि इसे बनाने के लिए ज्यादा सामग्री या जटिल प्रक्रिया […]

Read More
Analysis homeslider National

बांग्लादेश में बदलाव, भारत पर पड़ेगा सकरात्मक प्रभाव

बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार को जबरदस्ती अपदस्थ करने के बाद प्रदेश की बागडोर संभालने वाले युनुस मोहम्मद ने देश को अराजकता के दौर में पहुंचा दिया था, लेकिन लगता है कि अब बांग्लादेश का राजनीतिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। आम चुनाव के नतीजों के बाद यह तय है कि बांग्लादेश में […]

Read More