T20 वर्ल्ड कप 2026 के दौरान पाकिस्तान के स्पिनर उस्मान तारिक एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गए हैं। कोलंबो में USA के खिलाफ मुकाबले में शानदार गेंदबाजी के बावजूद, उनके एक्शन को लेकर सोशल मीडिया पर ‘चकिंग’ के आरोप तेज हो गए। इसी बहस के बीच भारत के पूर्व क्रिकेटर श्रीवत्स गोस्वामी और अनुभवी ऑफ-स्पिनर रविचंद्रन अश्विन आमने-सामने आ गए, जिससे यह मुद्दा सिर्फ गेंदबाज तक सीमित न रहकर बल्लेबाजों के नियमों तक पहुंच गया।
फिर क्यों उठा चकिंग विवाद?
ग्रुप A के मुकाबले में उस्मान तारिक ने तीन अहम विकेट झटककर पाकिस्तान को 32 रन से जीत दिलाई। मैच के बाद उनके बॉलिंग एक्शन के वीडियो वायरल हुए, जिनमें कोहनी के मुड़ने और डिलीवरी से पहले ठहराव को लेकर सवाल उठाए गए। यह पहली बार नहीं है जब तारिक का नाम इस तरह के विवाद से जुड़ा हो। इससे पहले भी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मैचों में उनके एक्शन पर चर्चा हो चुकी है, हालांकि ICC पहले ही उन्हें क्लीन चिट दे चुका है।
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गोस्वामी ने उठाई आपत्ति
श्रीवत्स गोस्वामी ने तारिक के एक्शन की बजाय उनके रन-अप में आने वाले ठहराव पर सवाल खड़े किए। उन्होंने फुटबॉल का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर पेनल्टी के दौरान खिलाड़ी रुक नहीं सकता, तो क्रिकेट में गेंदबाज को यह छूट क्यों दी जा रही है। उनके मुताबिक, नियमों में एकरूपता होनी चाहिए और ऐसे ग्रे एरिया को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
अश्विन का पलटवार
गोस्वामी की टिप्पणी पर रविचंद्रन अश्विन ने जवाब देते हुए बहस को नया आयाम दे दिया। अश्विन ने सवाल किया कि जब बल्लेबाज बिना अंपायर को बताए स्विच-हिट या रिवर्स शॉट खेल सकता है, तो नियमों की सख्ती सिर्फ गेंदबाजों पर ही क्यों लागू हो? उन्होंने कहा कि गेंदबाज को हाथ बदलने तक के लिए अंपायर को सूचना देनी पड़ती है, जबकि बल्लेबाज को कहीं ज्यादा स्वतंत्रता मिली हुई है।
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ICC नियमों का हवाला
अश्विन ने स्पष्ट किया कि गेंदबाजी एक्शन की वैधता केवल ICC के बॉलिंग एक्शन टेस्टिंग सेंटर में ही तय की जा सकती है। मैदान पर अंपायर 15 डिग्री के कोहनी नियम को माप नहीं सकते। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक कोई नियम स्पष्ट रूप से नहीं टूट रहा, तब तक किसी खिलाड़ी पर आरोप लगाना गलत है।
बहस का सार
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर क्रिकेट के नियमों में मौजूद असमानता पर बहस छेड़ दी है। जहां एक तरफ गेंदबाजों की हर हरकत पर नजर रखी जाती है, वहीं बल्लेबाजों को ज्यादा छूट मिलती है। अश्विन का मानना है कि अगर बदलाव की बात हो, तो वह दोनों पक्षों के लिए समान होनी चाहिए।
