ऑनलाइन गेम के खिलाफ अब उठने लगी आवाजें, कितना खतरनाक है यह गेम, जानें…

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  • राज्यसभाः ऑनलाइन गेम के खिलाफ अब उठने लगी आवाजें, कितना खतरनाक है यह गेम, जानें…
  • कई सांसदों ने भरा हुंकार, कहा- ऑनलाइन गेम बंद करो, नहीं तो करेंगे जनआंदोलन
  • ऑनलाइन गेम्स का दुष्परिणाम, डिप्रेशन में जा रहा है भारत का भविष्य
  • कई मौतों का जिम्मेदार है ऑनलाइन गेम
  • छोटे और नौनिहाल फंसते हैं इसके जाल में

 अंशिका यादव

नई दिल्ली। ऑनलाइन गेम्स के चलते हो रही मौतों के कारण आज राज्यसभा में कई सांसदों ने इसे बंद करने की गुहार लगाई। साथ ही दो टूक लहजे में कहा कि यदि इस पर रोक नहीं लगा तो जन आंदोलन भी किया जाएगा। युवाओं में मोबाइल और ‘ऑनलाइन गेम्स’ के दुष्परिणामों पर रोक लगाने के लिए जन आंदोलन की राज्यसभा में मंगलवार को मांग की गई। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सुमित्रा बाल्मीक ने शून्यकाल के दौरान बच्चों और युवाओं में मोबाइल पर ऑनलाइन गेम की बढ़ती आदत के कारण होने वाले अवसाद की समस्या को उठाया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के सपने को पूरा करना है तो इस चुनौती से निपटना होगा। कॉलेजों और स्कूलों में हर सप्ताह एक बार इस बारे में संकल्प लिया जाना चाहिए। गौरतलब है कि ऑनलाइन गेम की लत के कारण मौत के मामलों में सबसे प्रमुख कारण लंबे समय तक गेम खेलना (12-24 घंटे से अधिक), जिसके परिणामस्वरूप पल्मोनरी एम्बोलिज्म, सेरेब्रल हेमरेज या कार्डियक अरेस्ट (हृदय गति रुकना) जैसी समस्याएँ होती हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया में ऐसे मामले ज्यादा देखे गए हैं, जिनमें से अधिकतर 11-40 वर्ष की आयु के पुरुष थे।

बच्चों के लिए जानलेवा गेमिंग: बढ़ रहा है खतरा, भारत में गेमर्स की संख्या 59 करोड़, बढ़ रही हैं चिंता

आज भारत में  59 करोड़ गेमर्स हैं, जिसमें  से 74 फीसदी युवा  हर हफ्ते छह घंटे से ज्यादा गेम खेलते हैं।  लेकिन ये गेम्स बच्चों और युवाओं के लिए जानलेवा बन सकते हैं  । डॉक्टर्स  के पास हर हफ्ते चार से पांच केस सिर्फ गेमिंग एडिक्शन’ के मिल रहे है । कर्नाटक में तो कुछ महीनों के अंदर सुसाइड के 32 केस के मामले दर्ज हुए है। स्वास्थ्य सलाहकारों के मुताबिक गेम जीतने पर दिमाग में डोपामिन का  बढ़ता है। खेल हमें  खुशी  अहसास कराता है।  लेकिन यह  खुशी धीरे-धीरे एडिक्शन बन जाती है।  हारने पर   गुस्सा, चिड़चिड़ापन, नींद खराब, पढ़ाई खत्म, रिश्ते  में खटास जैसी समस्याएं होने लगती हैं। साल 2026 की एक स्टडी के मुताबिक  भारत में 60 प्रतिशत मानसिक बीमारियां 35 वर्ष के उम्र से पहले  में शुरू हो रही हैं और इसकी बड़ी वजह मोबाइल, स्क्रीन और ऑनलाइन गेमिंग का नशा है।

इसके अलावा तीन और मुद्दे मंगलवार को ‘अपर हाउस’ में उठे। BJP की ही गीता उर्फ चंद्रप्रभा ने यूपी के औरेया जिले में विभिन्न स्टेशनों पर कोरोना के दौरान बंद किए गए ट्रेनों के ठहराव को फिर से बहाल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इन स्टेशनों पर ट्रेनों के नहीं रूकने के कारण अनेक लोग और यात्री प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये लोग व्यापारिक गतिविधियों से अपने परिवारों का भरण पोषण करते थे लेकिन कोरोना के दौरान इन स्टेशनों पर ट्रेनों का ठहाराव बंद कर दिया गया। उन्होंने कहा कि इसका यात्रियों और स्थानीय लोगों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है । उन्होंने रेल मंत्री से इस दिशा में ठोस कदम उठाने का अनुरोध किया।

भाजपा के महेन्द्र भट्ट ने उत्तराखंड के जोशीमठ के आस पास के क्षेत्रों में रहने वाली आबादी की 73 जातियों को केन्द्र की अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची में शामिल किये जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस बारे में कई बार सिफारिश कर चुकी है। उन्होंने कहा कि यह समाज के समग्र विकास की दिशा में सकारात्मक कदम होगा। भाजपा की सुमित्रा बाल्मीक ने बच्चों में मोबाइल पर आनलाइन गेम की बढती आदत के कारण होने वाले अवसाद की समस्या को उठाया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के सपने को पूरा करना है तो इस चुनौती से निपटना होगा । सदस्य ने डिजिटल गेमों के दुष्परिणामों के खिलाफ जनांदोलन शुरू करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कालेजों और स्कूलों में हर सप्ताह एक बार इस बारे में संकल्प लिया जाना चाहिए।

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बीजू जनता दल की सुलता देव ने रास्तों में घायल होने वाले पशुओं के उपचार का मामला उठाया। उन्होंने इन घायल पशुओं के लिए हर जिले में अस्पताल और एम्बुलेंस की सुविधा शुरू किये जाने की मांग की। उन्होंने इसके लिए एक हेल्पलाइन नम्बर शुरू किये जाने की भी मांग की। कांग्रेस के मुकुल बालकृष्ण वासनिक ने बजट से एक दिन पहले पेश किये जाने वाले आर्थिक सर्वेक्षण की तर्ज पर हर वर्ष सामाजिक न्याय पर वार्षिक रिपोर्ट को संसद में पेश किये जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट में देश में सामाजिक न्याय से संबंधित व्यापक आंकड़े शामिल होने चाहिए। इसमें विभिन्न वर्गों के लोगों के साथ असमानता की घटनाओं का भी ब्योरा होना चाहिए। भाजपा के ब्रजलाल ने देश में विशेष धान की खेती करने वाले किसानों पर समय -समय पर लगायी जाने वाली निर्यात पाबंदियों से संबंधित परेशानियों को उठाया।

जानलेवा गेम्स की लिस्ट: 2025 के सबसे लोकप्रिय गेम्स

BGMI-Battlegrounds Mobile India

PUBG के बैन होने के बाद BGMI को खासतौर पर भारतीय यूजर्स के लिए लॉन्च हुआ , जो तुरंत लोकप्रिय  हो  गया।  इसमें HD ग्राफिक्स, भारतीय त्योहारों का इवेंट्स और बड़े  Sports टूर्नामेंट्स हैं।  इस गेस  को  टूर्नामेंट्स की वजह से यह युवाओं में सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है.

Free Fire MAX

कम RAM वाले मोबाइल पर भी चलने वाला   यह गेम  छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में  खूब पसंद किया जाता है। नए अपडेट्स और ग्राफिक्स इसे खास बनाते हैं।

Call of Duty: Mobile (COD Mobile)

प्रो गेमर्स  का  पसंद , जिसमें  PC जैसे ग्राफिक्स, टीम मोड्स, शूटआउट्स  हैं।

Clash of Clans

रणनीति आधारित गेम है  जिसमें खिलाड़ी अपना गांव बनाते और अन्य खिलाड़ियों  से लड़ते हैं। नया अपडेट इसे और मज़बूत बनाता है।

Ludo King

फैमिली गेम , जिसे बच्चे और बुजुर्ग दोनों खेलते हैं. 2025 में इसके नए थीम्स और ऑनलाइन मल्टीप्लेयर फीचर्स ने इसे फिर से  लोकप्रिय हो गया है।

खतरे की गहराई

इस तरह, ये पांच गेम्स भारत में 2025 के सबसे लोकप्रिय और ज्यादा खेले जाने वाले गेम्स हैं. गेमिंग भारत में अब सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि करियर और कनेक्शन का भी जरिया बन गया है. हालांकि गेम में पैसे लगाना जोखिम हो सकता है इसलिए ऐसा करने से पहले जरूर सोचें.

मौत के मामले और जोखिम

2002-2021 के बीच 24 मामले ऐसे सामने आए हैं, जहां गेम खेलने के दौरान अचानक मौत हुई। इनमें फेफड़े में खून के थक्के, मस्तिष्क में रक्तस्राव या हृदय गति रुकने जैसी समस्याएं थीं। इसके अलावा, गेमिंग के कारण आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव से आत्महत्या के मामले भी सामने आए हैं। खबरों के मुताबिक गेमिंग के कारण आर्थिक नुकसान या गेम की लत के कारण सुसाइड के मामले भी सामने आए हैं। लगभग 15 बरसों में हर 20 लाख गेमर्स पर एक मौत या तीन करोड़ में से एक मौत का अनुमान लगाया गया है, लेकिन जोखिम वाले सबसे ज्यादा गेम खेलने वालों में यह दर अधिक हो सकती है।

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