- हत्या मामले में पुलिस की भूमिका पर उच्च न्यायालय सख्त,
- नोएडा पुलिस कमिश्नर और हापुड़ SSP को कोर्ट में पेश होने का आदेश
नया लुक डेस्क
लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के एक गंभीर मामले में पुलिस की भूमिका पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने गौतम बुद्ध नगर के पुलिस कमिश्नर और हापुड़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने पाया कि पुलिस ने गैर-जमानती वारंट की तामील में लापरवाही बरती, जिससे आरोपी को राहत मिली और न्यायिक प्रक्रिया बाधित हुई। कोर्ट ने इसे पुलिस और अपराधी के संभावित “सांठगांठ” का उदाहरण बताया है।
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12 फरवरी 2026 को व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य
जस्टिस सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति सत्य वीर सिंह की खंडपीठ ने निर्देश दिया है कि दोनों वरिष्ठ अधिकारी 12 फरवरी 2026 को दोपहर 2 बजे अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहें। यह मामला हत्या के आरोपी कौशल किशोर उर्फ बाबा की अपील से जुड़ा है। कोर्ट ने सुनवाई के लिए आरोपी को बुलाने हेतु गैर-जमानती वारंट जारी किया था।
पुलिस रिपोर्ट और आरोपी के हलफनामे में विरोधाभास
सूरजपुर थाना प्रभारी ने कोर्ट में रिपोर्ट दी कि आरोपी का पता सत्यापित नहीं हो सका, इसलिए वारंट वापस किया जा रहा है। हालांकि, आरोपी ने स्वयं 10 जनवरी को दाखिल हलफनामे में स्वीकार किया कि पुलिस ने उसे वारंट की जानकारी दी थी। पुलिस रिपोर्ट और आरोपी के बयान में विरोधाभास को देखते हुए हाईकोर्ट ने इसे मिलीभगत का संकेत माना।
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“अपराधी स्थानीय पुलिस को मैनेज कर रहा था” – हाईकोर्ट
कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि अपराधी स्थानीय पुलिस को मैनेज कर रहा था और गैर-जमानती वारंट को विफल करने का प्रयास किया गया ताकि मामले की सुनवाई मेरिट पर न हो सके। हाईकोर्ट ने इसे सेवा में कदाचार, अक्षमता और अवमानना का गंभीर मामला मानते हुए वारंट तामील से जुड़े सभी अधिकारियों को हलफनामा दाखिल कर अपनी विफलता स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।
