एआईजी शासन का नहीं तो जेल अधिकारी नहीं मानते एआईजी का आदेश!

  • एआईजी के आदेश के बाद भी अभी तक उन्हीं जेलों पर जमे दोनों जेलर
  • शासन के टेंडर की जांच के निर्देश के बाद भी एआईजी ने चहेती फर्म को थमा दिया वर्क ऑर्डर

राकेश यादव 

लखनऊ। न बाप बड़ा न भईया, सबसे बड़ा रुपया…यह कहावत जेल अधिकारियों पर एकदम फिट बैठती है। कारागार विभाग में रुपए की खातिर एआईजी जेल प्रशासन शासन की बात नहीं मानते है तो एआईजी का आदेश जेल अधिकारियों के लिए भी कोई मायने नहीं रखता है। हाल ही में फरारी की घटना के बाद एआईजी ने एक जेलर की विशेष ड्यूटी दूसरी जेल पर लगाई और दूसरी जेल पर लगाई गई विशेष ड्यूटी को समाप्त कर वहां के जेलर को मूल तैनाती स्थल पर वापस किए जाने का आदेश दिया। दिलचस्प बात यह है कि आदेश को हुए कई दिन बीत गए गए लेकिन यह दोनों जेलर अभी भी उन्हीं जेलों पर जमे हुए है। यह मामला विभागीय अधिकारियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसको लेकर अटकलें लगाई जा रही है कि यदि यही हाल रहा तो वह दिन दूर नहीं जब जेल अधिकारी अपने आला अफसरों के आदेशों का अनुपालन करना ही न बंद कर दें।

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कन्नौज जेल से दो बंदियों की फरारी की घटना के बाद बीती 27 जनवरी को एआईजी जेल प्रशासन धर्मेंद्र सिंह ने दो आदेश जारी किए थे। एक आदेश में कहा गया कि मेरठ से विशेष ड्यूटी पर कन्नौज जेल पर लगाए गए जेलर अवनीश सिंह को प्रशासनिक दृष्टिकोण को देखते हुए कन्नौज से मेरठ जेल पर वापस किया जाता है। इसके साथ ही आगरा जिला जेल में तैनात जेलर राजेश कुमार राय की दो माह के कन्नौज जिला जेल पर विशेष ड्यूटी लगाए जाने का निर्देश दिया गया।

सूत्रों का कहना है कि इस निर्देश के छह दिन बाद भी आगरा जिला जेल का जेलर राजेश कुमार राय आगरा जेल और विशेष ड्यूटी पर मेरठ से कन्नौज जेल भेजे गए जेलर अवनीश सिंह कन्नौज जेल पर ही जमे हुए है। सूत्रों का कहना है कि आगरा कमाऊ जेल होने की वजह से जेलर वहां से हटने को तैयार नहीं है तो जेलर के नहीं आने की वजह से विशेष ड्यूटी पर लगे कन्नौज के जेलर मेरठ जेल पर वापस नहीं जा पा रहे है। एआईजी का आदेश इन दोनों जेलरों के कोई मायने नहीं रखता है। यही वजह है निर्देश के बाद भी दोनों जेलर उन्हीं जेलों पर डेरा डाले है।

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बीते दिनों प्रदेश की जेलों के लिए मसालों की आपूर्ति के लिए मांगे गए टेंडरों में एआईजी जेल ने चहेते ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए टेंडर में जमकर गोलमाल किया। मामला सुर्खियों में आने के बाद शासन ने टेंडरों की जांच कराए जाने का आदेश दिया। डीजी जेल ने टेंडरों की जांच कानपुर परिक्षेत्र को सौंपी गई। जांच शुरू भी नहीं हो पाई थी कि एआईजी जेल प्रशासन ने शासन के आदेश को ठेंगे पर रखकर चहेती फर्म को वर्क ऑर्डर जारी कर मसालों की आपूर्ति तक करा ली। सूत्रों की माने तो मसालों की आपूर्ति करने वाली चहेती फर्म के ठेकेदार को भुगतान किए जाने की तैयारी अंतिम चरण में है। उधर इस संबंध में जब एआईजी प्रशासन धर्मेंद्र सिंह से सीयूजी नंबर (9454418152) पर बात करने की कोशिश की गई तो कई प्रयासों के बाद भी उनका फोन नहीं उठा।

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कन्नौज जेल फरारी में हेड वार्डर व दो वार्डर और हुए निलंबित

कन्नौज जेल में फरारी की घटना की जांच रिपोर्ट आने के बाद एक हेड वार्डर और दो और वार्डरों को निलंबित कर दिया गया है। कन्नौज जेल में बीती पांच जनवरी को दो बंदी सुरक्षाकर्मियों को चकमा देकर मेनवॉल फांदकर भाग गए थे। घटना के बाद प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए जेलर, डिप्टी जेल, हेड वार्डर समेत सात लोगों को निलंबित किया गया था। घटना की जांच कानपुर जेल परिक्षेत्र के डीआईजी प्रदीप कुमार गुप्ता को सौंपी गई थी। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद चीफ हेड वार्डर जयपाल चौधरी, वार्डर अतुल मिश्रा और कपिल को निलंबित किया गया है। उधर जांच रिपोर्ट के बारे में जब डीआईजी से पूछा गया तो उन्होंने कोई जवाब ही नहीं दिया।

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