- इस बार हजारीबाग सेंट्रल जेल से तीन साथियों संग भागकर मचाई अफरातफरी
- तीनों भुगत रहे थे आजीवन कारावास की सज़ा
रंजन कुमार सिंह
रांची/हजारीबाग। “ऐसी कोई जेल नहीं जो मुझे दो हफ्ते से ज्यादा अंदर रख सके” किसी फिल्म का यह डायलॉग लोयाबाद के कुख्यात अपराधी देवा भुईयां पर एक बार फिर सटीक बैठता नजर आ रहा है। शातिर अपराधी देवा भुईयां ने हजारीबाग सेंट्रल जेल से अपने तीन साथियों के साथ फरार होकर जेल प्रशासन और पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यह पहली बार नहीं है जब देवा ने कानून को खुली चुनौती दी हो। इससे पहले वह धनबाद जेल से फरार हो चुका है और उससे भी पहले लोयाबाद थाना से पुलिस को चकमा देकर भागने में कामयाब रहा है।
हर बार उसकी फरारी ने सुरक्षा इंतजामों की पोल खोली है और पुलिस के लिए गंभीर चुनौती बनती रही है। धनबाद जेल से फरारी के करीब तीन साल बाद देवा एक बार फिर लोयाबाद पुलिस के हत्थे चढ़ा था। पिछले साल दिसम्बर में तत्कालीन लोयाबाद थाना प्रभारी सत्यजीत कुमार ने सेन्द्रा 10 नंबर इलाके से उसे गिरफ्तार करने में सफलता पाई थी। इसके बाद देवा को धनबाद जेल भेजा गया और बाद में सुरक्षा कारणों से उसे हजारीबाग सेंट्रल जेल ट्रांसफर किया गया था। बावजूद इसके देवा ने एक बार फिर जेल की सुरक्षा को धता बताते हुए फरारी को अंजाम दे दिया। देवा भुईयां इलाके का एक शातिर और खतरनाक अपराधी माना जाता है।
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उसके खिलाफ धनबाद इलाके के कतरास थाना, राजगंज, ईस्ट बसूरिया, लोयाबाद सहित विभिन्न थानों में कुल 9 आपराधिक मामले दर्ज हैं। वह पॉक्सो एक्ट के तहत सजायाफ्ता है। धनबाद कोर्ट ने उसे इस गंभीर मामले में 20 साल की सजा सुनाई थी। वर्ष 2016 में कतरास थाना में उसके खिलाफ मामला दर्ज हुआ था।देवा के फरार होने की खबर सामने आते ही सोशल मीडिया और विभिन्न न्यूज चैनलों पर यह मामला तेजी से सुर्खियों में आ गया है। इलाके में दहशत का माहौल है, वहीं बार-बार हो रही फरारी ने पुलिस और जेल प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुलिस की कई टीमें देवा भुईयां और उसके साथ फरार हुए तीन आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही हैं। जेल से फरारी की इस घटना ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर कब तक एक कुख्यात अपराधी कानून को इस तरह खुली चुनौती देता रहेगा।
