दो टूक : यूपी में बीजेपी के ब्राह्मण विधायक यूं ही नहीं परेशान

Untitled 5 copy 28

राजेश श्रीवास्तव


उत्तर प्रदेश का सत्तारूढ़ दल इन दिनों अपने ही अंदर सुलग रही जातीय राजनीति से परेशान है। बीते दिनों पार्टी के ब्राह्मण विधायकों ने जब सामूहिक बैठक की तो पार्टी के होश फाख्ता हो गये आनन-फानन में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने फरमान जारी कर दिया कि आगे से ऐसा हुआ तो यह अनुशासनहीनता मानी जायेगी। लेकिन इस मुद्दे पर यह समझना जरूरी है कि पार्टी विद डिफरेंस के नारे वाली भाजपा में ऐसी स्थिति आयी क्यों। इसे पार्टी के भीतर जातीय संतुलन को लेकर उभर रहे असंतोष के तौर पर भी देखा जा रहा है। बीते दिनों ठाकुर समुदाय ने कुटुंब परिवार की बैठक की थी, वह भी खासी चर्चा का सबब बनी थी। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में पार्टी के अंदर ब्राह्मण समाज की भूमिका, उनके प्रतिनिधित्व और शक्ति को लेकर चर्चा की गई है, जिससे इस बात बल मिलता दिख रहा है कि पार्टी में उनकी आवाज दब रही है जिससे उनमें असुरक्षा और असंतोष बढ़ रहा है। यूपी में ठाकुर और ब्राह्मण वर्ग शुरू से ही बीजेपी को कोर वोट बैंक रहा है।

ये भी पढ़े

दिल्ली‑NCR की हरियाली और सुरक्षा की ढाल अरावली पर्वतमाला को बचाने की निर्णायक लड़ाई

बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि ब्राह्मणों की आवाज कमजोर हो ही है। हालांकि ये बात यूं ही नहीं उठी है। योगी सरकार पर कई बार ब्राह्मणों की अनदेखी आरोप भी लगे हैं। समाजवादी पार्टी भी गाहे-बगाहे इसे हवा देते दिखती है और सरकार पर मुख्यमंत्री की जाति (ठाकुर) के लोगों को सरंक्षण देने और बचाने का आरोप भी लगाती रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यूपी में ब्राह्मणों की आबादी करीब 10-11 फीसदी है जबकि ठाकुरों की आबादी लगभग 6-7% है। यूपी विधानसभा में बीजेपी के कुल 258 विधायक हैं। इनमें से 42 ब्राह्मण, 45 ठाकुर, 84 ओबीसी, 59 अनुसूचित जाति, 0 मुस्लिम और 28 दूसरी सवर्ण जातियों के विधायक है। इनमें वैश्य, कायस्थ, पंजाबी और खत्री समेत अन्य जातियां शामिल हैं। वहीं विधान परिषद् में बीजेपी के पास कुल 79 एमएलसी हैं, जिनमें 14 ब्राह्मण, 23 ठाकुर, 26 ओबीसी, दो अनुसूचित जाति, दो मुस्लिम और 12 दूसरी सवर्ण जातियां हैं। इन आंकड़ों पर नजर डाले तो जातीय समीकरणों के हिसाब से ब्राह्मणों की संख्या ठाकुरों से ज्यादा है लेकिन विधानसभा और विधान परिषद् में राजपूतों के मुकाबले उनका प्रतिनिधित्व कम है।

जहां विधानसभा में बीजेपी के 42 ब्राह्मण विधायक है जबकि 45 ठाकुर विधायक हैं वहीं विधान परिषद् में भी क्रमश: सदस्यों की संख्या 14 और 23 है। इसी वर्ष मानसून सत्र के दौरान जब ठाकुर विधायकों की बैठक हुई तो इसे मुख्यमंत्री के प्रति एकजुटता दिखाने के तौर पर देखा गया लेकिन इस बार ब्राह्मण विधायकों ने जब अपने विधायकों की बैठ की तो पार्टी ने उन्हें नसीहत की पुड़िया पकड़ा दी। इन तमाम बातों को देखते हुए ये कयास लग रहे हैं बीजेपी के भीतर जातीय संतुलन को लेकर असंतोष उभर रहा है। पार्टी के सामने अब अपने सबसे बड़े दो कोर वोट बैंक में संतुलन साधना जरूरी हो गया है नहीं तो आगामी चुनावों में इसका नतीजा भुगतना पड़ सकता है। पार्टी इसे लेकर खासी सतर्क है क्योंकि पीडीए ने ही उसे अभी बीते लोकसभा में अच्छी खासी चपत लगायी है अब ब्राह्मण भी अगर मोर्चा खोल लेगा तो 2027 का समीकरण मुसीबत का सबब बन जायेगा।

ये भी पढ़े

कर्नाटक का एंटी-हेट बिल नफरत रोकने की मंशा या अभिव्यक्ति पर सियासी शिकंजा?

संयोग से यह सब ऐसे समय में हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद लखनऊ जाकर पार्टी के तीन दिग्गज नेताओं- पंडित दीनदयाल उपाध्याय, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और भारत र‘ अटल बिहारी वाजपेयी की विशाल प्रतिमाओं का अनावरण करते हैं और यह तीनों ब्राह्मण समुदाय से ही आते हैं। भोज में गए नेता कह रहे हैं कि यह अनौपचारिक बैठक थी। विपक्ष ने इसमें यह कहकर तड़का लगाया कि पार्टी के ब्राह्मण विधायकों के बीच नाराजगी है। विपक्षी नेता कहने लगे कि ब्राह्मण नेता अपने भविष्य के बारे में सोच रहे हैं, प्लान बनाने के लिए साथ आना पड़ा। वैसे, भाजपा को लेकर विपक्ष की तरफ से ब्राह्मण बनाम क्षत्रिय की पॉलिटिक्स का मुद्दा उछालना नई बात नहीं है। अक्सर इसकी चर्चा होती रहती है। जब योगी आदित्यनाथ पहली बार सीएम बने तो दिनेश शर्मा का डिप्टी बनाया जाना, दूसरी बार बृजेश पाठक को डिप्टी सीएम बनाए जाने को इसी समीकरण से जोड़ा गया था। कोई कहे कुछ भी लेकिन इतना साफ है कि कोई भी पार्टी यूपी में ब्राह्मण समुदाय को नजरअंदाज या नाराज बिल्कुल नहीं कर सकती। यूपी में यह भी सच्चाई है कि एक तबका आज भी जाति देखकर ही वोट करता है। कम से कम यूपी-बिहार में यह समीकरण अंदरखाने भाजपा भी समझती है और सेट भी करती है।

डिनर में जाने का दावा करने वाले विधायक अनिल त्रिपाठी ने कहा, ‘हम वहां करीब 4 घंटे रहे। सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा हुई। हमारी सबसे बड़ी चिताओं में से एक यह थी कि हमारे समुदाय ने राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है लेकिन आज ब्राह्मण समाज के लोगों को समाज में अपमानित किया जा रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह एक सामाजिक और आम चिता थी, इसका सरकार से लेना-देना नहीं है। लेकिन आप इतना समझ लीजिये कि त्रिपाठी कुछ भी कहें लेकिन यूपी एक ऐसा राज्य है जहां ब्राह्मण निर्णायक भूमिका निभाते हैं। उनकी संख्या अच्छी खासी है। दर्जनों विधानसभाओं में ब्राह्मण समुदाय ही जीत हार का फैसला करता है। बहुगुणा, एनडी तिवारी से लेकर दिनेश शर्मा, ब्रृजेश पाठक तक सीएम-डिप्टी सीएम ब्राह्मण समुदाय से होते रहे हैं।

ये भी पढ़े

तिरुवनंतपुरम में सत्ता परिवर्तन 45 साल का वाम राज खत्म भाजपा के हाथ नगर निगम

यूपी की चुनावी राजनीति में ब्राह्मण असल में भाजपा की सोशल इंजीनियरिग और चुनावी जीत के लिए एक अहम रोल अदा करता है। दावा किया जाता है कि 60 से लेकर 150 विधानसभा सीटों पर ब्राह्मण वोटबैंक जीत हार तय करता है। इसमें भी अवध और पूर्वांचल बेल्ट में ब्राह्मण ज्यादा हावी हैं। यह समुदाय पहले कांग्रेस को वोट देता था। राम मंदिर आंदोलन के बाद भाजपाई हुआ तो जुड़ता ही गया। बीच में, सतीश मिश्रा फैक्टर के चलते बसपा को भी वोट दे आया। 2017 के विधानसभा और 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को करीब 8०-82 प्रतिशत ब्राह्मणों का वोट मिला था। यह समुदाय प्रभावशाली नरैटिव बनाने की भी ताकत रखता है। जातिवादी राजनीति से दूरी, राष्ट्रवाद, 370, आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख, संघ से वैचारिक जुड़ाव के कारण ब्राह्मण समुदाय भाजपा को वोट देता आ रहा है। बीजेपी की रणनीति हर जाति को साधने और संतुलन बनाने की रहती है। उसका नारा भी है- सबका साथ, सबका विकास। इसे बनाए रखने के लिए भाजपा सरकार और संगठन में ब्राह्मणों को महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व देती रही है। डिप्टी सीएम ब्राह्मण बनाया तो कई जिलों के अध्यक्ष भी। लखनऊ में तीन ब्राह्मण नेताओं की मूर्तियां लगाए जाने को ओबीसी के बाद अब ब्राह्मणों को साधने की कोशिश माना जा रहा है। 2027 का विधानसभा चुनाव भी 14 महीने बाद है। उससे पहले मार्च-अप्रैल में पंचायत चुनाव होने हैं। ऐसे में पार्टी ब्राह्मणों की बैठक को बेहद गंभीरता से ले रही है। पार्टी कोई रिस्क लेने की स्थिति में नहीं है। अब देखना है कि भीतर ही भीतर सुलग रही यह चिंगारी ठाकुर मुख्यमंत्री तक भी कोई असर डाल पाती है या सिर्फ एक संदेश देकर ब्राह्मण विधायकों ने छुट्टी पा ली है।

Spread the love

Lucknow
Crime News Uttar Pradesh

चिनहट: घर में धावा बोलकर चोरी करने वाले गिरोह का राजफाश

गिरोह का एक सदस्य गिरफ्तार, एक गैस सिलेंडर, दो साड़ी व नकदी बरामद ए अहमद सौदागर Lucknow: बीते 30 जुलाई 2026 को चिनहट क्षेत्र के मटियारी स्थित बी-5 ओम साई विष्णु विहार कॉलोनी कांतिपुरम निवासी विनय कुमार तिवारी के घर में धावा बोलकर चोरी करने वाले गिरोह का खुलासा कर इंस्पेक्टर चिनहट दिनेश चंद्र मिश्रा […]

Spread the love
Read More
homeslider Uttar Pradesh

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहनीय पहल

 खत्म कर दी प्रदेश जेलों में ओवरक्रॉडिंग की समस्या जेलों को आधुनिक और सुरक्षित बनाने के उठाए कदम राकेश यादव Lucknow: योगी सरकार प्रदेश की जेल व्यवस्था को आधुनिक, सुरक्षित और मानवीय बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। बढ़ती बंदी संख्या और जेलों में ओवरक्राउडिंग की समस्या को दूर करने के लिए […]

Spread the love
Read More
Crime News Delhi Uttar Pradesh

LSR छात्राओं ने बताई असुरक्षा की आपबीती, बोलीं- शाम होते ही लगता है डर

New Delhi:  दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर वुमेन (LSR) के आसपास छात्राओं की सुरक्षा को लेकर चिंता एक बार फिर सामने आई है। दक्षिण दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय किशोरी से कथित सामूहिक दुष्कर्म और कॉलेज के पिछले गेट के पास पुलिस मुठभेड़ की घटना के बाद छात्राओं में डर और […]

Spread the love
Read More