दागी पुलिसकर्मियों की हकीकत: कोई मुखबिरों का एनकाउंटर कर बना इंस्पेक्टर तो कोई लूटकांड कर बना करोड़पति

Policeman shot

ए अहमद सौदागर

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में तैनात दो पुलिसकर्मियों के कारनामों पर गौर करें तो थोड़ी देर के लिए अटपटा लगेगा, लेकिन सच है। लखनऊ का चर्चित माज हत्याकांड के मास्टर माइंड पुलिस इंस्पेक्टर संजय के बाद अब जहरीले कफ सीरप कांड के आरोपी चंदौली के बलुआ थाना क्षेत्र स्थित कैथी निवासी बर्खास्त सिपाही आलोक प्रताप सिंह के काले कारनामों की परतें धीरे-धीरे खुलती जा रही है। जांच-पड़ताल में लगे पुलिस अधिकारियों को पता चला है कि लूटकांड के बाद बर्खास्त सिपाही जल्द करोड़पति बनने के लिए नशीले और ज़हरीले कफ सीरप की सप्लाई कर न जाने कितने लोगों के लिए काल बन गया। वह गोरखधंधे के जरिए लखनऊ में महल तो बना लिया, लेकिन उसके करतूत की पोल खुलते ही सलाखों के पीछे पहुंच गया। बर्खास्त सिपाही आलोक के बारे में जानकार सूत्र बताते हैं कि उत्तर प्रदेश के पूर्वी जिलों चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर, वाराणसी और आजमगढ़ के युवाओं की मानो एक फौज तैयार कर रखा है। यूपी पुलिस में नौकरी करने के दौरान आलोक प्रताप सिंह को जुर्म, जरायम और कानूनी बचाव सभी दांव पेंच चले, लेकिन उसका पैंतरा उसी के विभाग की कार्रवाई के आगे घुटने टेक गया जो आज जेल की दाल-रोटी खाने के लिए मजबूर है।

ठीक इसी तरह आलोक प्रताप सिंह से पहले वर्ष 2013 में तत्कालीन और बर्खास्त इंस्पेक्टर संजय राय भी ताबड़तोड़ एनकाउंटर कर अफसरों के सामने खूब वाहवाही बटोरी, लेकिन उसके एक घिनौने कृत्य ने उसे भी सलाखों के पीछे जाना पड़ गया। संजय राय की कुंडली और हकीकत पर गौर करें तो सूत्र बताते हैं कि इलाहाबाद व फतेहपुर जनपद में तैनाती के बाद राजधानी लखनऊ आए संजय राय का शुमार साधारण दरोगा के रूप में था। लखनऊ आमद कराने के कुछ दिनों बाद वर्ष 2001 बैच के सब इंस्पेक्टर संजय राय को सबसे पहले चार फरवरी 2009 को गुडंबा का थानाध्यक्ष बनाया गया। छह फरवरी 2010 को उसे गुडंबा थाने से हटाकर गाजीपुर थाने की कमान सौंपी।

गाजीपुर में तैनाती रहते हुए संजय राय राजधानी की आवोहवा से रूबरू हुआ। एसओ बनते ही पंख लग गए, जिसमें उसकी गिनती चुनिंदा थानेदारों में होने लगी और वह इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस का मास्टरमाइंड माना जाने लगा और कुछ चर्चित घटनाओं का खुलासा कर उच्च पुलिस अधिकारियों का राज़दार बन गया। लेकिन इसी बीच उसकी आंखें चार ऐसी हुई कि आठवीं के छात्र मासूम माज मोहम्मद उर्फ माज का खून कराकर मानो खाकी वर्दी पहनने वाला एक खूंखार अपराधी बन गया। एनकाउंटर करते-करते इंस्पेक्टर भी बना, लेकिन इश्क का भूत ऐसा सवार हुआ कि वह नौकरी से तो गया साथ ही सलाखों के पीछे पहुंच गया।

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