- उलूलजुलूल निर्णय ”पीड़िता का स्तन पकड़ना, पजामे का नाड़ा तोड़ना…ये रेप की कोशिश का मामला नहीं”
- इलाहाबाद के एक जज ने दिया था बड़ा ही विवादित बयान, सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के विवादित फैसले पर कड़ी नाराजगी जताई। चीफ जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ की बेंच ने कहा, “स्तनों को पकड़ना, पायजामा की डोरी तोड़ना और पुलिया के नीचे घसीटना – ये रेप प्रयास नहीं? ये टिप्पणी असंवेदनशील और अमानवीय है।” कोर्ट ने हाईकोर्ट के 17 मार्च 2025 के ऑर्डर पर स्टे को बरकरार रखा और आरोपियों को IPC 376 (रेप) और POCSO एक्ट की धारा 18 के तहत ट्रायल का आदेश दिया।
क्या है पूरा मामला? कासगंज में 10 नवंबर 2021 को 14 वर्षीय लड़की के साथ छेड़छाड़ का केस। एक महिला अपनी बेटी को लेकर देवरानी के घर गई। लौटते समय पवन, आकाश और अशोक मिले। पवन ने बाइक पर छोड़ने की बात की। रास्ते में पवन-आकाश ने प्राइवेट पार्ट्स पकड़े, आकाश ने पुलिया के नीचे घसीटने की कोशिश की, पायजामा की डोरी तोड़ी। चीख सुन सतीश-भूरे आए, तो आरोपियों ने तमंचा दिखाकर भाग गए। FIR में IPC 376, 354B, POCSO 18 लगी।
आरोपी हाईकोर्ट गए। जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा ने 17 मार्च को फैसला दिया – “ये तैयारी है, रेप प्रयास नहीं।” धाराएं हल्की कर दीं – IPC 354B और POCSO 9/10। तीन आरोपियों की रिवीजन स्वीकार। देशभर में आक्रोश फैला। महिला संगठनों ने कहा – “ये पीड़ितों को चुप कराने का हथियार है।”
सुप्रीम कोर्ट की फटकार 25 मार्च को SC ने सुो मोटो नोटिस जारी किया। 8 दिसंबर को CJI सूर्यकांत की बेंच ने कहा, “ये टिप्पणियां चिलिंग इफेक्ट पैदा करती हैं। पीड़ित शिकायत वापस लेने को मजबूर हो सकती हैं। हाईकोर्ट को सेंसिटिविटी रखनी चाहिए।” कोर्ट ने गाइडलाइंस बनाने का संकेत दिया। केंद्र, यूपी सरकार को नोटिस। ट्रायल रेप चार्ज पर चलेगा।
देशभर में हंगामा कांग्रेस, सपा ने हाईकोर्ट की निंदा की। प्रियंका गांधी बोलीं, “महिलाओं के सम्मान पर हमला।” BJP ने कहा, “SC सही कर रहा।” विशेषज्ञों ने कहा, “ये जेंडर सेंसिटिविटी की कमी दिखाता है।”
